अफ़सर-ए-आ’ला (हर रविवार को सुशांत की कलम से)
अफ़सर-ए-आ’ला (हर रविवार को सुशांत की कलम से)

अफ़सर-ए-आ’ला
(हर रविवार को सुशांत की कलम से)
समय सबका हिसाब करता है
तत्कालीन रमन सरकार में बहुचर्चित नान घोटाला 10 साल बाद भी सुर्खियों में बना हुआ है।इस घोटाले की शुरुआत हुई थी वर्ष 2011 से तब कौशलेद्र सिंह नान के एमडी थे। एमडी बदलते गए घोटाला चलता रहा , बताते है इस घोटाले के चढ़ावे में सबका कल्याण हो रहा था मसला बिगड़ा तब जब चढ़ावा आना बंद हुआ चूंकि कौशलेंद्र के बाद अनिल टुटेजा नान के एमडी बने। 2015 में जब इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ तब उस समय के एसीबी चीफ ने जो जांच की वह जून 2014 से फरवरी 2015 तक कि ही जांच की। जबकिं घोटाले की चढ़ावा 2011 से सबको पहुँच रहा था। एसीबी के मुखिया चाहते थे कि वह इस घोटाले के दो सरगनाओं को बाहर निकाल दे चूंकि अगर यह दोनों अरझेगे तो साहेब भी लपेटे में आ जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि 2011 से इन्हें भी बराबर लाभ पहुँच रहा था।इस घोटाले का जो एक किरदार है CM Sir और CM medam यह बेहद ही रोचक है सारा खेल इसी में अटका था। 2018 में जब सत्ता बदली तब तक “एटी” ने इतनी अकूत संपत्ति बना ली थी कि वह डारेक्ट सरकार से ही डील करने लगा चढ़ोत्तरी चढ़ाकर वह सरकार का मुकुट बन बैठा , सरकार ने भी सरकारी चाभी इस एटी को सौप दी जिसके बाद एटी ने पुराने पापो पर मिट्टी डालना शुरू किया , बताते है कांग्रेस शासन काल मे एसीबी के चीफ रहे सरदार जी पर भयंकर दबाव बनाने की कोशिस की गई थी, मगर उन्होंने इस एटी की जमकर क्लास लगा दी।एटी चाहता था कि ऐसा कोई गुमताड़ा हो कि सिद्ध हो जाए कि CM sir और CM medam का मतलब चिंतामणि चंद्राकर की जगह रमन सिंह और उनकी पत्नी हैं। इससे होता यह कि घोटालेबाज सफेशपोश बाहर निकल जाता और सारा ठीकरा रमन सरकार पर फुट जाता।बहरहाल मामला अब सीबीआई ने टेकओवर कर लिया जो बीते दिनों टूटेजा के ठिकानों पर सबूतों की जांच कर रही है।यह सबक है उन “अफ़सर-ए-आ’लाओ” के लिए जो मुगालते में है कि वह अपने पद का दुरुपयोग कर बच जाएंगे मगर “समय सबका हिसाब करता है”
माननीय नौकरशाह
प्रदेश में नौकरशाह माननीय हो गए है इन माननीयों ने नेताओ की राह पकड़ ली है इनका कहना है कि जब मंडल , बोर्ड , कॉर्पोरेशन में नियुक्त नेता जिनको पदभार ग्रहण करना था उन्होंने लावलश्कर के साथ जब कार्यक्रम कर सरकारी तिजोरी में डाका डाल सकते है तो हम भला क्यो पीछे रहे , इसी तर्ज के साथ बीते दिनों एक आमंत्रण आता है यह आमंत्रण मुख्यमंत्री के अधीन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिया गया था। विदाई और स्वागत समारोह मतलब एक अधिकारी प्रतिनियुक्ति में जाने और दूसरे के आने की खुशी में था। यह समारोह किसी सितारा होटल में आयोजित होना था। आमंत्रण कार्ड जब बंटा सवालों की झड़ी के साथ हल्ला मचा और अच्छा यह हुआ कि कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा। मगर सवाल यह है कि इस तरह का आमंत्रण छापकर सितारा होटल की बुकिंग का प्लान किसका था ? आखिर मुख्यमंत्री जी अधीन विभाग में उनके नाक के नीचे इतना बड़ा खेल कौन कर रहा था।खैर जो भी हो मगर माननीय साहेब ध्यान दीजिए यह नौकरशाह अब माननीय बनने की होड़ में लगे हुए है समझाइए इन्हें।
शपथग्रहण का कारवां
छत्तीसगढ़ में जो ना हो वो कम है । ये वो राज्य है जहां शुरुआत से प्रावधानों पर कम और भावनाओं पर ज्यादा काम होता है । ऐसा ही कुछ नजारा सोलह अप्रैल को नजर आया । उस दिन एक साथ पांच निगम मंडल परिषद और आयोग का पदभार ग्रहण दिवस था । मुख्यमंत्री जी बी टी आई ग्राउंड पहुंचे । वहां से एक के पीछे एक गाड़ियां सायरन बजाते हुए नगर परिक्रमा पर निकल पड़ी । मुख्यमंत्री जी के पीछे सांसद , मंत्री ,विधायक ,अन्य अध्यक्ष और पदाधिकारियों की गाड़ियां चल पड़ीं । 20 से 25 गाड़ियों का सिलसिला सायरन बजाते हुए बीटीआई ग्राउंड से उद्योग भवन,वहां से दीनदयाल ऑडिटोरियम और फिर बाल आयोग पहुंचा। लोग हड़बड़ा गए कि कोई वी आई पी रायपुर आया है। अब कोई शपथग्रहण तो था नहीं ,ये तो पदभार ग्रहण था । अंदरखाने से खबर आई है कि सरकार और संगठन ने इस परम्परा को ठीक नहीं माना है । इस मामले में उद्योग भवन और बाल अधिकार संरक्षण आयोग में बिना ज्यादा तामझाम के कार्यालय में प्रभार लेने की तारीफ भी हुई । मजेदार किस्सा ये रहा कि हर जगह दर्शक दीर्घा में वो लोग ज्यादा पहुंचे जो उसी पद को पाने की आस लगाए बैठे थे । लाजमी है कि उन दिलों से एक आह तो निकली होगी जो स्वाभाविक भी है ।
परेशान मंत्री जी पार्ट 1
प्रदेश की एकमात्र महिला मंत्री पद धारण करने के बाद से ही अपने रिश्तेदारों के कारण बड़ी परेशान रहती हैं । शुरुआती दिनों में उनके जेठ और मित्रों का थानेदारों को चमकाते हुए वीडियो वायरल हो गया । मामला कार में बैठकर दारू पीने का था । सरगुजा पुलिस ने पकड़ा तो थप्पड़ भी पड़ गए । कैमरे पर बोलते हुए रिकॉर्ड हो गए कि मंत्री का जेठ हूं । जैसे तैसे मामला निपटा मगर मामला संभाला ही गया । मंत्री जी को मीडिया के सामने कहना पड़ा कि जो जवाबदार होगा और कानून तोड़ेगा उसके खिलाफ कार्यवाही होगी । कार्यवाही का तो अभी तक पता नहीं मगर मीडिया का वो वीडियो बरकरार है ।
परेशान मंत्री जी पार्ट 2
महिला मंत्री की परेशानी का सबब केवल रिश्तेदार नहीं बल्कि पतिदेव भी बनते जा रहे हैं । पिछले जनपद चुनाव में लोगों से जबरदस्त झगड़ा हो गया । श्रीमान का कुर्ता फाड़ दिया गया और उनके साथियों के भी । मामले ने तूल पकड़ा कि किस हैसियत से आप शासकीय कार्यालय में आकर चुनावी कार्यवाही में हस्तक्षेप कर रहे हैं । बचाव में उन्होंने क्या कहा ये तो पता नहीं मगर ये जरूर बोलते नज़र आए कि कांग्रेस ने बाहर से मारपीट के लिए गुंडे बदमाश बुलवाएं हैं । ये बात हजम नहीं हो रही है कि बाहर से गुंडे हत्या के लिए बुलवाए जाते हैं न कि कुर्ता फाड़ने के लिए । इसके लिए तो लोकल कोई भी आदमी काफी है भाई ।
परेशान मंत्री जी पार्ट 3
अब हाल ही में इन्हीं पतिदेव का तीसरा कांड होते होते बचा । हुआ ये कि सरगुजा क्षेत्र के एक शासकीय स्थान पर पति महोदय की पुराने कलेक्टर से मुलाकात हो गई । जब वो कलेक्टर उन्हीं के जिले में थे तब वहीं पतिदेव पंचायत सचिव थे । अब कहां पंचायत सचिव और कहां कलेक्टर । जमाना बदला और मेडम मंत्री बन गई । उसके बाद पतिदेव ने पद भी त्याग दिया । अब बंगला और बाकी *बूझने वाले काम* सम्हाल रहे हैं । अब हुआ ये कि जब पतिदेव यानी पूर्व सचिव अपने पुराने कलेक्टर से मिले तो बड़ी टेढ़ी नजर से देखते हुए सरनेम लेकर बोले “और….कैसे हो” ! आई ए एस साहब का खून खौल उठा । वैसे भी पतिदेव साहब से विनम्रता से बात करके भी पूछ सकते थे कि आप कैसे हैं ,कभी चाय पर बंगले आइए ।आखिर आई ए एस की बात अलग होती है ,उनसे मुख्यमंत्री तक आदर देकर बात करते हैं । लेकिन नहीं , नज़र टेढ़ी,आवाज में तल्खी और सरनेम से संबोधन । सुनने वाले बताते हैं कि साहब की आंखों में खून उतर आया था । वैसे भी ये साहब थप्पड़ जड़ने के लिए मशहूर हैं । वो तो भला हुआ कि उन्होंने किसी तरह खुद को जब्त कर लिया वरना किरकिरी तो सिर्फ मंत्री जी की ही होती । सच भी है क्योंकि पति होने से आप मंत्री थोड़े ही हो गए हो भाई।
मेरे तो दोनों हाथ मे लड्डू
राजधानी से लगा हुआ एक विधानसभा है जहाँ के विधायक अपने अजीबो गरीब करतब के लिए चर्चाओं में बने रहते है।अब उन्होंने जनसेवा की आड़ में वसूली-बाजी शुरू कर दी है।एक बार दो बार तक ठीक था लेकिन विधायक जी ने तो ढर्रा ही बना लिया है इससे अधिकारी ही नही व्यापारी भी परेशान है। बताते है कि जनसेवा के नाम पर माननीय डबल ट्रिपल वसूली करते है जितने में जनसेवा हुई उसकी बधाई और इसके बाद बची रकम माननीय की मिठाई ।अभी कुछ दिन पूर्व विधायक के पड़ोस के विधानसभा क्षेत्र में एक दुखद घटना हुई माननीय उसने भी अपनी राजनीति चमकाने में बाज नही आ आए। बाकी सब ठीक था माननीय इस काम मे भी जनसेवा तलाश लिए और उसके भी खर्च के लिए कार्यकताओं को लगा दिए है । माननीय अब सारा खेल समझ गए है कार्यकर्ताओ से वसूली कराओ और जनसेवा का लड्डू खुद चट कर जाओ । “मेरे तो दोनों हाथ लड्डू”
सैया भये कोतवाल
राजधानी रायपुर में लाभांडी और कचना में आनंदम वर्ल्ड सिटी में बिल्डर ने सरकारी बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। यहां फेज-1 से फेज-2 में जाने के लिए जो रास्ता बना है वह फेस 1 से होकर जाता है। जबकिं फेस 1 और फेस 2 के बीच सरकारी पट्टे की जमीन है। बिल्डर ने इन सरकारी जमीनों पर अब पक्के रास्ते बना दिये है सवाल यह उठता है कि आखिर टॉवन&कंट्री प्लानिंग के तहत इसको अप्रूव कैसे कर दिया। जबकिं यह दोनों ही प्रोजेक्ट अलग-अलग है।इतना ही नही 28.837 हेक्टेयर में फैली इस कॉलोनी में बिल्डर गोल्डब्रिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शासकीय घास भूमि खसरा नंबर 45 का रकबा 0.100 हेक्टेयर पर पक्का रास्ता एवं तार व कांटे से घेराव किया गया है। वहीं, खसरा नंबर 687 पर 0.100 हेक्टेयर भूमि पर पक्की सड़क बनवाई गई है। साथ ही खसरा नंबर 90 (डबरी) पर 0.0300 हेक्टेयर पर मुरुम डाला गया है और खसरा नंबर 91 के 0.0100 हेक्टेयर भाग पर पक्की दीवार बनाकर बेजा कब्जा किया गया है। रेरा , निगम , राजस्व से जब इस मामले की शिकायत की जाती है अधिकारी भी इस बिल्डर के रसूख के आगे नतमस्तक नजर आते है।बिल्डर कहता है कि यह अधिकारी और प्रशासन को उनका हिस्सा बराबर पहुँचता है। अब सैया भये कोतवाल तो डर काहे का ,
यक्ष प्रश्न
1. मनीष कुंजाम के गंभीर सवाल और उन सवाल में आरोप पर क्या ACB जांच की कार्रवाही करेगी ?
2. पिछले दौरे में अमित शाह छत्तीसगढ़ के मंत्रियों से क्यों नहीं मिले ?

