धान की 4,200 क्विंटल कमी से गिरफ्तारी तक, फिर आया 1:16 मिनट का टॉयलेट वीडियो; आरोप से ज्यादा अब वीडियो की कहानी सवालों में –

धान की 4,200 क्विंटल कमी से गिरफ्तारी तक, फिर आया 1:16 मिनट का टॉयलेट वीडियो; आरोप से ज्यादा अब वीडियो की कहानी सवालों में –

सक्ती – डभरा के पुटीडीह धान खरीदी केंद्र में 4,200 क्विंटल धान की कमी और करीब 1.31 करोड़ रुपये के नुकसान का मामला अब गिरफ्तारी तक पहुंच चुका है। लेकिन इसी कार्रवाई के बीच एक नया विवाद सामने आया है। संस्था प्रबंधक शशिकांत महंत ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर प्रशासन पर टॉयलेट साफ कराने का आरोप लगाया और इसके साथ एक वीडियो भी पेश किया।
वीडियो सामने आने के बाद सवाल कलेक्टर अमृत विकास तोपनो पर लगाए गए आरोप से ज्यादा अब उस वीडियो की परिस्थितियों और उसके पीछे की कहानी को लेकर उठ रहे हैं।
खास बात यह भी है कि कलेक्टर तोपनो स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं। विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वे अपनी निजी सैलरी से हर साल 10 हजार रुपये आदिवासी समाज के कल्याण कोष में देंगे। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से भी इस कोष में सहयोग की अपील की।

धान की कहानी, जिसने कार्रवाई यहां तक पहुंचाई –
24 नवंबर 2025 को पुटीडीह धान खरीदी केंद्र में रात के समय धान की बोरियों में मिट्टी मिलाए जाने की सूचना प्रशासन को मिली। जिला पंचायत सीईओ की टीम मौके पर पहुंची। जांच में करीब 4,200 क्विंटल धान की कमी सामने आने की बात कही गई। आरोप था कि इसी कमी को पूरा करने के लिए धान की बोरियों में मिट्टी मिलाई जा रही थी। मामले में शासन को करीब 1.31 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा सामने आया। शुरुआत में खरीदी केंद्र प्रभारी प्रकाश महंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। बाद में संयुक्त जांच में संस्था प्रबंधक शशिकांत महंत, कंप्यूटर ऑपरेटर द्रोण प्रताप शांडिल्य और समिति पुटीडीह की प्राधिकृत अधिकारी श्यामा बाई की भूमिका भी संदिग्ध पाए जाने की बात सामने आई। सहकारिता विभाग ने 29 मई 2026 को इन लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। अब संस्था प्रबंधक शशिकांत महंत और प्राधिकृत अधिकारी श्यामा बाई की गिरफ्तारी हुई है।
यानी यह कार्रवाई नवंबर 2025 की घटना के बाद शुरू हुई प्रक्रिया का अगला चरण है। इसे अचानक हुई कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जा सकता।

गिरफ्तारी के बाद आया टॉयलेट वीडियो –
6 अगस्त को शशिकांत महंत की ओर से मानवाधिकार आयोग में शिकायत की गई। आरोप लगाया गया कि प्रशासन ने उनसे टॉयलेट साफ कराया। शिकायत के साथ 1 मिनट 16 सेकेंड का वीडियो भी दिया गया।
वीडियो में शशिकांत महंत टॉयलेट साफ करते दिखाई देते हैं। लेकिन वीडियो को ध्यान से देखने पर कुछ बातें ध्यान खींचती हैं। वह टॉयलेट के भीतर जाते हैं, सफाई करते हैं, बीच-बीच में कैमरे की दिशा में देखते हुए दिखाई देते हैं और फिर पानी डालकर बाहर निकल जाते हैं। वीडियो में उन्हें कोई व्यक्ति निर्देश देता हुआ सुनाई नहीं देता। न कोई धमकी की आवाज सुनाई देती है, न किसी अधिकारी की आवाज और न ही ऐसा कोई संवाद जिसमें जबरदस्ती या दबाव का तत्काल संकेत मिले। वीडियो की प्रस्तुति ऐसी दिखाई देती है कि इसे किसी घटना के अचानक रिकॉर्ड हो जाने की बजाय जानबूझकर रिकॉर्ड कराया गया वीडियो भी माना जा सकता है। यही वह बिंदु है जहां आरोप से ज्यादा वीडियो की पूरी परिस्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है।
वीडियो यह दिखाता है कि सफाई हुई, लेकिन आदेश किसका था? वीडियो का सबसे सीधा निष्कर्ष यही है कि शशिकांत महंत टॉयलेट साफ करते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन इससे अगला निष्कर्ष अपने आप नहीं निकलता कि उन्हें यह काम कलेक्टर ने करवाया। क्या किसी स्वतंत्र व्यक्ति ने इसे देखा, यह भी जांच का विषय है।

क्या कहा कलेक्टर ने –
मामले में हमने सक्ती जिले के कलेक्टर अमृत विकास तोपनो से बात की। उन्होंने आरोप को साफ तौर पर खारिज किया है। उनका कहना है कि धान खरीदी मामले में कार्रवाई से बचने के लिए शशिकांत महंत पिछले कुछ समय से अलग-अलग प्रयास कर रहे थे और इसी क्रम में प्रशासन पर यह आरोप लगाया गया है। कलेक्टर का कहना है कि वह जिला कलेक्टर कार्यालय में किस जगह जाकर सफाई किए, किसके कहने पर किए, यह जांच का विषय है। जांच के बाद सारी तस्वीर साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि धान खरीदी मामले में चाहे जितने हथकंडे अपनाए जाएं, इस तरह की गड़बड़ी और अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो वीडियो सामने आया है, उसके साक्ष्य, वीडियो की तारीख, स्थान और रिकॉर्डिंग किसने की यह भी जांच का विषय है।

घटनाक्रम का समय देखिए
24 नवंबर 2025 को धान खरीदी में गड़बड़ी सामने आती है। 25 मई 2026 की संयुक्त जांच रिपोर्ट में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आती है। 29 मई 2026 को अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश जारी होते हैं। इसके बाद कार्रवाई आगे बढ़ती है और संस्था प्रबंधक की गिरफ्तारी होती है। फिर 6 अगस्त 2026 को मानवाधिकार आयोग में शिकायत और टॉयलेट वीडियो सामने आता है। इस पूरी टाइमलाइन को देखें तो कई सवाल खड़े होते हैं। क्या यह कार्रवाई से बचने के लिए अपनाया गया हथकंडा था? क्या जिला कलेक्टर कार्रवाई करेंगे तो उन्हें इस तरह फंसाने के आरोप मढ़े जाएंगे और इस आधार पर कार्रवाई को लचीला किया जाएगा? बहरहाल, मामले की जांच जारी है। देखना यह है कि आगे क्या कार्रवाई होती है।

कलेक्टर की दूसरी तस्वीर – 
विश्व आदिवासी दिवस पर कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने कहा कि वे स्वयं आदिवासी परिवार से आते हैं और आज जिस पद पर हैं, उसमें समाज का भी योगदान है। इसी भावना के साथ उन्होंने हर साल अपनी निजी सैलरी से 10 हजार रुपये समाज के कल्याण कोष में देने की घोषणा की। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से भी इस कोष में योगदान करने की अपील की। यह उनके सार्वजनिक जीवन की एक अलग तस्वीर जरूर सामने रखती है।

दोनों मामलों में सबूतों की जरूरत –
धान खरीदी के मामले में सवाल है 4,200 क्विंटल धान की कमी कैसे हुई, स्टॉक और रिकॉर्ड में कितना अंतर था और जिम्मेदारी किसकी थी? टॉयलेट वीडियो के मामले में सवाल अलग है वीडियो कब का है, कहां बनाया गया, किसने बनाया, क्या यह घटनास्थल से स्वतः रिकॉर्ड हुआ या किसी उद्देश्य से रिकॉर्ड कराया गया और सबसे महत्वपूर्ण, टॉयलेट साफ कराने का आदेश किसने दिया? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

फिलहाल उपलब्ध सामग्री में एक तरफ धान खरीदी की जांच, विभागीय रिपोर्ट और उसके आधार पर आगे बढ़ी पुलिस कार्रवाई है। दूसरी तरफ गिरफ्तारी के बाद सामने आई मानवाधिकार शिकायत, 1 मिनट 16 सेकेंड का वीडियो और कलेक्टर का स्पष्ट खंडन है। इसलिए इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि टॉयलेट साफ हुआ या नहीं। वीडियो खुद इसका जवाब देता है। असली सवाल यह है कि टॉयलेट साफ कराने का आदेश किसने दिया और क्या उसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण है? यही वह कड़ी है, जो अभी इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा जांच की मांग करती है।

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