रिश्वत का वीडियो, BPM पर कार्रवाई… फिर घर वापसी! स्वास्थ्य मंत्री ने दिया निर्देश, स्वास्थ्य पर सख्ती करने वाले कलेक्टर का तबादला और अरविंद सोनी की पेंड्रा वापसी, मंत्री पर लेनदेन का आरोप विभाग में खलबली –

रिश्वत का वीडियो, BPM पर कार्रवाई… फिर घर वापसी! स्वास्थ्य मंत्री ने दिया निर्देश, स्वास्थ्य पर सख्ती करने वाले कलेक्टर का तबादला और अरविंद सोनी की पेंड्रा वापसी, मंत्री पर लेनदेन का आरोप विभाग में खलबली –

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – स्वास्थ्य विभाग में कार्रवाई और नियमों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक (BPM) अरविंद सोनी से जुड़ा है। सोनी का करीब ₹40 हजार लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद उन्हें पेंड्रा से हटाया गया था। उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर शिकायतों और कार्रवाई के दस्तावेज भी मौजूद हैं। अब 31 जुलाई 2026 के आदेश से उन्हें फिर उनकी पूर्व पदस्थापना पेंड्रा में भेज दिया गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस BPM पर रिश्वत लेने का वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई हुई, उसे दोबारा उसी जगह पदस्थ करने की जरूरत क्यों पड़ी? विभागीय हलकों में इसकी वजह स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश को बताया जा रहा है। और मामले में कथित लेनदेन की बात भी सामने आ रही है हालांकि इसकी जांच जरूरी है।

2023 में शिकायतों के बाद कार्रवाई –
अरविंद सोनी को लेकर विवाद नया नहीं है। वर्ष 2023 में उनके खिलाफ शिकायतें हुईं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एक पत्र में शिकायतों का उल्लेख करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया। बाद में उन्हें अंतिम चेतावनी भी जारी की गई। एक अन्य सरकारी आदेश में उनके निर्धारित मुख्यालय में निवास नहीं करने को लेकर भी नोटिस दिया गया। आदेश में कहा गया कि इससे विकासखंड में संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं और नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यानी सोनी के मामले में विभागीय स्तर पर पहले से ही शिकायत और कार्रवाई का रिकॉर्ड मौजूद था।

फिर आया ₹40 हजार का वीडियो –
वर्ष 2023 में पेंड्रा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा एक वीडियो सामने आया, जिसमें अरविंद सोनी को ₹40 हजार लेते हुए दिखाया गया। इस वीडियो के बाद मामला और गंभीर हो गया और उन्हें पेंड्रा से हटाकर मरवाही भेजे जाने की कार्रवाई हुई। स्थानीय स्तर पर यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा। बाद की विभागीय प्रक्रिया में भी उनके खिलाफ पूर्व की शिकायतों और चेतावनियों का रिकॉर्ड बना रहा।

तीन साल बाद पुराने आदेश निरस्त, फिर पेंड्रा वापसी –
अब 31 जुलाई 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया कि अरविंद सोनी के संबंध में पूर्व में जारी आदेश को निरस्त करते हुए उन्हें उनकी पूर्व पदस्थापना स्थल विकासखंड पेंड्रा में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन इस आदेश में यह नहीं बताया गया कि आखिर ऐसा कौन सा नया आधार सामने आया, जिसके कारण पूर्व की कार्रवाई और पदस्थापना व्यवस्था को बदलने की जरूरत पड़ी। यहीं से सवाल और गहरा जाता है कि क्या ₹40 हजार लेते हुए सामने आए वीडियो की कोई विभागीय जांच पूरी हुई? क्या सोनी को क्लीनचिट मिली? क्या उनके खिलाफ पहले जारी चेतावनियां समाप्त कर दी गईं? और अगर ऐसा हुआ तो उसका आदेश कहां है?

स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश की चर्चा क्यों?
अरविंद सोनी की पेंड्रा वापसी स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर हुई है। विभाग में यह भी चर्चा है कि सोनी खुद को मंत्री के करीबी के रूप में बताते रहे हैं। और कहते है कि उन्हें मंत्री का वरदहस्त मिला है। और बताया जाता है कि सोनी ने मंत्री को एक बड़े लेनदेन करके मामले को पटाक्षेप करा लिया है। उनकी वापसी का आदेश और पहले के रिश्वत मामले में कार्रवाही न होना भी इस बात का संकेत देता है कि मामले में कही न कही स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जैसवाल की भूमिका संदिग्ध है। अगर इस तरह का कोई लेनदेन कर कार्रवाही को बाधित करने का प्रयास करता है तो स्वास्थ्य ही नही पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।

वापसी के बाद बैंड-बाजे ने भी बढ़ाई चर्चा –
सोनी की पेंड्रा वापसी के बाद उनके स्वागत में बैंड-बाजे के साथ कार्यक्रम का वीडियो भी सामने आया। जिस अधिकारी की पुरानी पदस्थापना विवादों रिश्वत और कार्रवाई से जुड़ी रही हो, उसकी वापसी पर ऐसा आयोजन स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया। सवाल यह भी है कि क्या यह सामान्य स्वागत था या विभागीय व्यवस्था को कोई संदेश देने की कोशिश?

संतोष देवांगन का तबादला भी इसी दौर में चर्चा में –
इस पूरे मामले के साथ पूर्व GPM कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन का मामला भी चर्चा में है। उनके कार्यकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कार्रवाई हुई और निजी अस्पतालों पर भी प्रशासनिक कार्रवाई की गई। बाद में उनके तबादले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में स्वास्थ्य मंत्री के साथ मतभेदों की चर्चा सामने आई। मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कलेक्टर का तबादला नियमित प्रशासनिक निर्णय बताया था। लेकिन अब अरविंद सोनी के मामले ने पुराने मामले को फिर से नया तूल दे दिया है। आखिर कोई कलेक्टर कार्रवाही करे तो उसका तबादला और विवादित रिश्वतखोर लोगो की वापसी क्या संदेश देती है।

₹40 हजार लेते हुए सामने आए वीडियो पर क्या विभागीय जांच हुई?
यदि जांच हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा? 2023 में जारी अंतिम चेतावनी का क्या हुआ? पुराने पदस्थापना आदेश को निरस्त करने का आधार क्या था? पेंड्रा में पुनः पदस्थापना का प्रस्ताव किस स्तर से आया? क्या मंत्री कार्यालय से कोई निर्देश मिला था? यदि मिला था तो उसका प्रशासनिक आधार क्या था? क्योंकि सरकारी आदेश में वापसी तो दिखाई दे रही है, लेकिन वापसी का कारण स्पष्ट नहीं है। और यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। एक अधिकारी, जिस पर ₹40 हजार लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई हुई; जिसके खिलाफ विभागीय दस्तावेजों में शिकायत और चेतावनी दर्ज है वही अधिकारी तीन साल बाद उसी जगह वापस कैसे पहुंच गया?

स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ अस्पताल चलाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना भी है जिसमें कार्रवाई और पदस्थापना दोनों पर समान नियम लागू होते दिखाई दें। वर्तमान मामला इसी कसौटी पर विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करता है।

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