खबर का असर पैरी के भुगतान पर बवाल, अब MIS में भूचाल! प्रणव पाल हटे, 10 साल से अंगद की तरह पैर जमाए बैठे संजय भागवत की भी छुट्टी –

डाटा सेंटर की दूसरी मंजिल से MIS का काम अब नवा रायपुर शिफ्ट, ₹53.02 करोड़ की मंजूरी के मुकाबले ₹67.76 करोड़ भुगतान की जांच के बीच जल संसाधन विभाग में बड़ा फेरबदल -

रायपुर – पैरी परियोजना में स्वीकृति से करीब ₹14.74 करोड़ अधिक भुगतान का मामला उठाने वाली खबर का असर अब जल संसाधन विभाग के भीतर साफ दिखाई देने लगा है। विधानसभा में मामला उठने, पांच सदस्यीय जांच समिति बनने और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने के बाद विभाग ने MIS शाखा में बड़ा फेरबदल किया है। डाटा सेंटर की दूसरी मंजिल में संचालित MIS का पूरा काम अब नवा रायपुर स्थानांतरित किया जा रहा है। साथ ही MIS का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अधीक्षण अभियंता प्रणव पाल को हटा दिया गया है।

लेकिन इस फेरबदल में सबसे बड़ा नाम संजय भागवत का है। करीब 10 साल तक संविदा पर मुख्य अभियंता के रूप में विभाग की महत्वपूर्ण व्यवस्था से जुड़े रहे भागवत को अब बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। लंबे समय तक एक ही व्यवस्था में उनकी मौजूदगी ने विभाग में जिम्मेदारियों के रोटेशन और संवेदनशील पदों पर स्थायी पकड़ को लेकर बहस छेड़ दी है।

एक खबर और विभाग में हलचल –
पैरी परियोजना में ₹53.02 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति के मुकाबले ₹67.76 करोड़ भुगतान का आंकड़ा सामने आने के बाद मामला विधानसभा तक पहुंचा। सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर भुगतान, प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कराई। इसी जांच के बीच उस MIS व्यवस्था में बदलाव हुआ, जिसके जरिए विभागीय भुगतान की डिजिटल प्रक्रिया संचालित होती है। इसलिए यह फेरबदल सामान्य प्रशासनिक कवायद से आगे निकल चुका है।

दूसरी मंजिल से नवा रायपुर तक –
डाटा सेंटर की दूसरी मंजिल से MIS शाखा को नवा रायपुर ले जाने का फैसला विभाग की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव का संकेत है। वर्षों से इसी व्यवस्था के जरिए करोड़ों-अरबों रुपये के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही है। अब स्थान के साथ-साथ जिम्मेदारियां और चेहरे दोनों बदले जा रहे हैं। पैरी प्रकरण के बीच यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि जांच में भुगतान की पूरी डिजिटल चेन की भूमिका सामने आना तय है।

संजय भागवत दस साल की संविदा, मुख्य अभियंता की कुर्सी और अंगद जैसे जमे पैर –
इस फेरबदल का सबसे बड़ा संदेश संजय भागवत की विदाई है। करीब एक दशक तक संविदा पर मुख्य अभियंता के रूप में विभाग की महत्वपूर्ण तकनीकी और MIS व्यवस्था से जुड़े रहना अपने आप में बड़ा सवाल है।सरकारी विभागों में अधिकारी आते-जाते रहे, जिम्मेदारियां बदलती रहीं, सरकारें बदलीं, लेकिन भागवत की कुर्सी पर पकड़ बनी रही। यही वजह है कि उनकी विदाई को महज एक कर्मचारी को हटाने की कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा। एक संविदाकर्मी का करीब दस वर्षों तक इतनी महत्वपूर्ण व्यवस्था में बने रहना विभाग की मानव संसाधन नीति, जिम्मेदारियों के रोटेशन और संस्थागत नियंत्रण पर भी सवाल खड़े करता है। संवेदनशील सिस्टम किसी एक व्यक्ति के अनुभव और प्रभाव पर निर्भर हो जाए तो धीरे-धीरे संस्थागत व्यवस्था कमजोर पड़ने लगती है। अंगद की तरह पैर जमाए बैठे भागवत की विदाई इसलिए महत्वपूर्ण है कि अब विभाग को यह भी देखना होगा कि इतने लंबे समय तक एक ही व्यक्ति को संविदा पर इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में बनाए रखने के पीछे आखिर व्यवस्था क्या थी।

प्रणव पाल हटे, अब पूरी भुगतान चेन की बारी –
MIS का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अधीक्षण अभियंता प्रणव पाल को हटाया जाना भी इस बदलाव का अहम हिस्सा है। अब जांच का केंद्र केवल अतिरिक्त भुगतान की रकम नहीं, बल्कि उसकी पूरी प्रक्रिया होनी चाहिए। फाइल से तकनीकी परीक्षण, बिल से डिजिटल एंट्री और स्वीकृति से भुगतान तक किस स्तर पर क्या हुआ, यही जांच की असली दिशा होगी। क्योंकि ₹53.02 करोड़ की मंजूरी से ₹67.76 करोड़ तक पहुंचा भुगतान किसी एक दस्तखत की कहानी नहीं हो सकता। इसकी पूरी प्रशासनिक और तकनीकी कड़ी सामने आनी चाहिए।

खबर से जांच, जांच से बदलाव तक –
पैरी प्रकरण में घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा है विधानसभा में सवाल उठा। ₹53.02 करोड़ बनाम ₹67.76 करोड़ का आंकड़ा सामने आया। पांच सदस्यीय जांच समिति बनी। MIS शाखा नवा रायपुर शिफ्ट हुई। प्रणव पाल हटे।
और अब करीब 10 साल से संविदा पर मुख्य अभियंता के रूप में जमे संजय भागवत की भी छुट्टी हो गई। यानी मामला अब केवल अतिरिक्त भुगतान तक सीमित नहीं रहा। जल संसाधन विभाग की उस कार्यसंस्कृति पर भी नजर गई है, जहां संवेदनशील जिम्मेदारियों पर लंबे समय तक एक ही चेहरे जमे रहे।

अब असली परीक्षा जांच समिति की है। अगर जांच निष्पक्ष हुई तो MIS से लेकर तकनीकी स्वीकृति, बिल पास होने और अंतिम भुगतान तक पूरी चेन की जिम्मेदारी तय करनी होगी। पैरी की खबर ने विभाग में हलचल पैदा की, जांच ने सिस्टम को आईना दिखाया और अब MIS में हुआ फेरबदल बता रहा है कि मामला फाइलों से निकलकर व्यवस्था के भीतर तक पहुंच चुका है।

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