AAP में बड़ी टूट – राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा , संदीप पाठक BJP में शामिल, मुंगेली कनेक्शन से सियासत गरम –

AAP में बड़ी टूट – राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा , संदीप पाठक BJP में शामिल, मुंगेली कनेक्शन से सियासत गरम –
मुंगेली/नई दिल्ली – देश की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने जहां दिल्ली से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हलचल मचा दी है, वहीं छत्तीसगढ़ का मुंगेली जिला भी अचानक इस सियासी बदलाव के केंद्र में आ गया है।
दरअसल संदीप पाठक का मूल जुड़ाव मुंगेली जिले से है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम को एक अलग ही क्षेत्रीय आयाम मिल गया है। वहीं सियासी हलकों में यह चर्चाएं भी हैं कि मुंगेली से संबंध रखने वाले, पूर्व भाजपा कार्यालय मंत्री और पेशे से अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता का नाम भी इस संदर्भ में लिया जा रहा है। नरेश चंद्र गुप्ता को राजनीतिक जानकार के तौर पर देखा जाता है और उनके स्थानीय व संगठनात्मक संपर्कों को इस घटनाक्रम से जोड़कर चर्चाओं में रखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम से आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ा झटका लगा है। राघव चड्ढा जहां पार्टी की संसद में मुखर आवाज थे, वहीं संदीप पाठक संगठन की रीढ़ माने जाते थे। दोनों के राज्यसभा सांसद होने के कारण इस बदलाव का असर सीधे संसद की राजनीति पर भी देखने को मिलेगा। इनके साथ ही कई अन्य सांसदों के जाने की खबरों ने पार्टी के भीतर बड़ी टूट के संकेत दे दिए हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इससे AAP की संगठनात्मक पकड़ कमजोर पड़ेगी और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर सीधा असर दिखेगा।
वहीं भाजपा के लिए यह सियासी चाल कई मायनों में फायदेमंद मानी जा रही है। पार्टी को ऐसे चेहरे मिले हैं जो मीडिया, संसद और संगठन तीनों स्तर पर प्रभाव रखते हैं। इससे भाजपा को विपक्ष की रणनीति को समझने में भी बढ़त मिलेगी और राज्यसभा सहित राष्ट्रीय स्तर पर उसकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल “आम आदमी” पर पड़ने वाले असर का है। जिस पार्टी ने खुद को आम लोगों की आवाज के रूप में स्थापित किया, अगर उसी के बड़े चेहरे लगातार दूसरी ओर जाते हैं, तो इससे जनता के बीच भरोसे का संकट खड़ा होना तय माना जा रहा है। आम आदमी की राजनीति का जो नैरेटिव खड़ा किया गया था, वह अब कमजोर पड़ता दिख रहा है।
मुंगेली से लेकर दिल्ली तक गूंज रहे इस सियासी बदलाव ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाली बड़ी चाल है। जिसके असर अब धीरे-धीरे पूरे देश में दिखाई देंगे।










