दूरस्थ डांगरा में उतरी नीति ज़मीन पर – मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े की मौजूदगी में बाल चौपाल बना पोषण और अधिकारों का केंद्र –

दूरस्थ डांगरा में उतरी नीति ज़मीन पर – मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े की मौजूदगी में बाल चौपाल बना पोषण और अधिकारों का केंद्र –
कांकेर : – जिले के दुर्गुकोंदल परियोजना अंतर्गत दूरस्थ ग्राम डांगरा में आयोजित बाल चौपाल कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि योजनाएं जब जमीनी स्तर पर उतरती हैं, तो उनका प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक व्यवहार में भी बदलाव लाता है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व दिया, जहां विभागीय योजनाओं की समीक्षा केवल मंच तक नहीं, बल्कि सीधे हितग्राहियों के बीच जाकर हुई। कार्यक्रम की शुरुआत पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत अन्नप्राशन संस्कार से हुई। यह केवल एक परंपरागत प्रक्रिया नहीं, बल्कि कुपोषण के खिलाफ प्रारंभिक हस्तक्षेप का प्रतीक रहा। इसके बाद चिन्हित कुपोषित बच्चों को सुपोषण किट वितरित किए गए, जिससे स्पष्ट हुआ कि सरकार अब समस्या की पहचान के साथ-साथ समाधान की दिशा में भी सक्रिय है।

मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने अपने संबोधन और सहभागिता के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि आंगनबाड़ी केवल पोषण वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कार का आधार बन सकता है। इसी सोच के तहत आंगनबाड़ी बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जो शिक्षा की औपचारिक शुरुआत का संकेत है।

कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं का ई-केवाईसी कराना यह दर्शाता है कि सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी पारदर्शिता और पात्र हितग्राहियों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करना चाहती है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

इस अवसर पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देते हुए संवादात्मक माहौल तैयार किया। खेल गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में सहभागिता और आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया गया, जो बाल विकास के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है। कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू वह दृश्य रहा, जब मंत्री, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण एक साथ पंगत में बैठे। यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक दूरी को कम करने और विश्वास कायम करने का संकेत था। एक ऐसा संदेश, जो अक्सर योजनाओं की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाता है।
डांगरा जैसे दूरस्थ क्षेत्र में इस तरह का आयोजन यह बताता है कि यदि नीति निर्माण के साथ निगरानी और सहभागिता भी जुड़ जाए, तो कुपोषण, शिक्षा और बाल अधिकार जैसे जटिल विषयों पर भी ठोस बदलाव संभव है। यह बाल चौपाल एक कार्यक्रम से आगे बढ़कर उस मॉडल की झलक देता है, जहां सरकार, समाज और बच्चों का भविष्य एक ही मंच पर संवाद करते नजर आते हैं।










