बिहान योजना से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

00 टेंट-साउंड संचालन, सिलाई सेंटर और स्थानीय उत्पादों से बदल रही जीवन की दिशा
सूरजपुर। शासन की बिहान योजना के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास हो रहे हैं। जिले की महिलाएं अब न केवल अपने परिवार का सहारा बन रही हैं, बल्कि समाज में प्रेरणा स्रोत के रूप में उभर रही हैं।
कुदरगढ़ की दीदियों की सशक्त पहल-टेंट-साउंड एवं बर्तन सेवा से आर्थिक आत्मनिर्भरता
सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत कुदरगढ़, जनपद पंचायत ओडग़ी की सरस्वती आजीविका महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने सामूहिक रूप से टेंट, बर्तन एवं साउंड सिस्टम सेवा की शुरुआत कर एक नई मिसाल कायम की है। समूह का गठन 27 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत किया गया था। शासन से उन्हें 15,000 रुपये की रिवॉल्विंग फंड और 60,000 (साठ हजार रुपये) की सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त, बैंक लिंकेज के माध्यम से 3,00,000 का ऋण भी प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहयोग से समूह की 6 सदस्यों ने व्यवसाय की शुरुआत की, जो अब गांव एवं आस-पास के क्षेत्रों में शादी-विवाह, मेले एवं सामाजिक आयोजनों में सेवा प्रदान कर रहा है। विगत एक वर्ष में इस समूह ने लगभग 3,00,000 की आय अर्जित की, जिससे ये महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। यह पहल अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी उद्यमिता की राह पर चलने के लिए प्रेरित कर रही है।

टेंट-साउंड संचालन, सिलाई सेंटर और स्थानीय उत्पादों से बदल रही जीवन की दिशाप्रीति गुर्जर- सिलाई सेंटर से बनीं लखपति दीदी
ग्राम पंचायत खर्रा, विकासखंड ओडग़ी की श्रीमती प्रीति गुर्जर ने बिहान योजना के माध्यम से अपने जीवन की दिशा ही बदल दी है। वे वर्ष 2014 से प्रीति महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2015 में उन्हें 15,000 की रिवॉल्विंग फंड राशि मिली, जिसमें से 5,000 लेकर उन्होंने पहली सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई का काम शुरू किया। इसके बाद सीआईएफ के अंतर्गत मिले 60,000 में से उन्होंने 10,000 लेकर दो और मशीनें खरीदीं। वर्ष 2016 में समूह को 1,20,000 का बैंक लोन प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने 70,000 की राशि निकालकर तीन और मशीनें जोड़ीं। वर्तमान में प्रीति का सिलाई सेंटर उन्हें प्रति माह 7,000 की आय दे रहा है। इसके अतिरिक्त, वे बांस से बनी सामग्रियों और झाड़ू की दुकान भी संचालित करती हैं, जिससे उन्हें प्रति माह 2,000 की आमदनी होती है। साथ ही, वे एफएलसी-आरपी के रूप में भी कार्यरत हैं और 6,360 प्रतिमाह का मानदेय अर्जित कर रही हैं। आज प्रीति गुर्जर की कुल मासिक आय 15,360 और वार्षिक आय 1,84,360 है, जिससे वे “लखपति दीदी” की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने परिवार को मजबूत आधार दिया है और बच्चों को बेहतर शिक्षा भी प्रदान कर रही हैं।

 कुदरगढ़ की दीदियों की सशक्त पहल-टेंट-साउंड एवं बर्तन सेवा से आर्थिक आत्मनिर्भरताबिहान योजना- ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की बयार
बिहान योजना के अंतर्गत स्वरोजगार और सामूहिक उद्यमिता के ज़रिए महिलाएं अब केवल समूह की सदस्य नहीं, बल्कि अपने गांव की आर्थिक विकास की वाहक बन रही हैं। सूरजपुर जिले में महिला सशक्तिकरण की यह कहानी न केवल बदलाव का प्रतीक है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है।

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