बस्तर के जंगल से गुजरो, तो किसी बेर के पेड़ को देखकर वट वृक्ष की तरह नमन करो, इसी ने श्रीराम को तृप्त किया – डॉ. कुमार विश्वास

00 मां दंतेश्वरी मुझे इतना कौशल, सामर्थ्य, इतनी शक्ति दें कि वामपंथ पर जाने वाली पीढ़ी को मैं रामपथ पर ला सकूं
दंतेवाड़ा। जिला मुख्यालय में बस्तर पंडुम 2025 महोत्सव के आयोजन में प्रख्यात कवि एवं श्रीराम कथा वाचक डॉ. कुमार विश्वास के द्वारा बस्तर के राम पर आधारित कार्यक्रम गुरूवार की रात्री 8 बजे शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने अंदाज में श्रीराम कथा सुनाते हुए विभिन्न प्रसंग बताए और उनके महत्व के साथ ही वर्तमान परिदृश्य में उन्हें किस तरह अमल में लाया जा सकता है, इस पर भी अपनी बात रखी।
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि दंतेवाड़ा आने के बाद मैं मां दंतेश्वरी के मंदिर जाकर मां के चरणों में लेटा। लेकिन मैंने अपने लिए उनसे कुछ नहीं मांगा। मेरे मुख से कुछ निकला ही नहीं। लेकिन अब इस परिसर से मैं यही मुराद मांगता हूं कि मुझे इतना कौशल, सामर्थ्य, इतनी शक्ति दें कि वामपंथ पर जाने वाली पीढ़ी को मैं रामपथ पर ला सकूं। उन्होने कहा कि श्रीराम के नाम पर इस देश में राजनीति हो गई है, 30 साल मुकदमा चला। जिन्होंने श्रीराम को काल्पनिक माना, वही काल्पनिक हो गए। डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि हमें कैकई माता का भी आभारी होना चाहिए कि उनके कारण भगवान राम के चरण इस दंडकारण्य में पड़े। कई बार शाप वरदान बन जाता है, कैकई का हठ दंडकारण्य और जन सामान्य के लिए वरदान बन गया। श्रीराम ने दंडकारण्य बस्तर आकर एक काम और किया। वनवासी और नगरीय सभ्यता का भेद खत्म कर दिया। यहां बस्तर आकर उन्होंने भील, कोल, किरात को गले लगाया। अगर चित्रकूट से राम लौट जाते तो हमें मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं मिलते। श्रीराम को जगतपति और मर्यादा पुरुषोत्तम इसी बस्तर दंडकारण्य की मिट्टी ने बनाया। उन्होने कहा कि जिस राम ने माता कौशल्या के बाद अपनी मां के रूप में देखा, वह इसी बस्तर से शबरी मां थी। बस्तर के किसी जंगल से गुजरो, तो किसी भी बेर के पेड़ को देखकर वट वृक्ष की तरह नमन करो, इसी ने श्रीराम को तृप्त किया।
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि दंडकारण्य यानी बस्तर के कण-कण में राम विराजे हैं। इंजरम यानी इंजे राम वत्तोर यानि राम यहां आए। रामेश्वरम के साथ ही इंजरम में भी भगवान राम ने शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की है। उन्होने कहा कि बस्तर आना मेरा सौभाग्य है, भगवान राम के कदम इस क्षेत्र में पड़े थे, इसीलिए यहां नंगे पांव चलने पर भी कांटे नहीं चुभते। दंतेवाड़ा जिले के ढोलकल में विराजे गणेश जी की कथा भी अद्भुत है। गीदम नाम गिद्धराज जटायु के आधार पर हुआ, पुराने समय मे यहां गिद्ध बड़ी संख्या में पाए जाते थे। वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर तंज कसते हुए डॉ कुमार विश्वास ने कहा कि आजकल नेता पदयात्रा करते हैं। जिसका पद छिनता है, वह पदयात्रा करता है। लेकिन श्रीरामचन्द्र जी ने पद देने पदयात्रा की। सुग्रीव हो या विभीषण, दोनों को राम ने पद दिलाया। आजकल गठबंधन ज्यादा क्षमता वाले से होता है, लेकिन राम वंचित और कमजोर पक्ष से गठबंधन करते थे। उन्हें संबल देकर न्याय दिलाते थे। राम लोक नेता हैं। राम को निष्कासित राजनीति ने किया। लेकिन रामजी को स्थापित लोकनीति ने किया। आजकल बजट सत्ता पक्ष के लिए बढिय़ा और विपक्ष के लिए घटिया होता है। संवैधानिक व्यवस्था राम की बनाई हुई है। वे चाहते तो वनवास के लिए 2 किमी दूर कुटिया बना लेते। लेकिन राम जी ने लोक नीति पर चलकर लोगों के संकट हरने का संकल्प लिया। पक्ष-विपक्ष को साथ लेकर चलने की नीति के कारण भगवान राम ही संसदीय प्रणाली के जनक माने जा सकते हैं।
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि आगरा का ताज महल प्रेम का प्रतीक नहीं है, विदेशों से आने वाले लोगों को कब्र दिखाने न ले जाएं। शाहजहां की न जाने कितनी बेगम थी, कौन से नंबर की बेगम में लिए उन्होंने ताज महल बनवाया? उन्होंने जिस बेगम के लिए ताज महल बनवाया था शाहजहां उसके दूसरे पति थे। पहले पति को युद्ध में मरवा दिया गया या मारा गया। प्रेम का प्रतीक तो दशरथ मांझी का हथौड़ा है। यदि प्रेम की कहानी सुनानी है तो दशरथ मांझी की सुनाएं। जिन्होंने अपनी पत्नी की याद में पहाड़ को चीर कर मार्ग बना दिया। दस दौरान कुमार विश्वास पाश्चात्य संस्कृति पर उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता ने हमारे दिमाग में एक गंदगी भर दी है वो है सिविलाइजेशन। यानी तुम जो करते हो वो सिविल और दूसरा कोई करता है तो वो अन-सिविल है। उन्होंने कहा कि जीन्स-टीशर्ट नहीं धोती-कुर्ता हमारी संस्कृति है। माथे में बिंदी का श्रृंगार करती महिला अपनी बस्तर की संस्कृति को दर्शाती है।

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