किरंदुल में दूसरी बार लाखों लीटर पानी दर्जनों मकानों में घुसा, बचाव टीम ने लोगों को सुरक्षित स्थान में पहुंचाया

दंतेवाड़ा। जिले के किरंदुल में लगातार हो रही बारिश से बैलाडीला की पहाड़ी पर स्थित एनएमडीसी के प्लांट 11-सी की तरफ से लाखों लीटर पानी उतर रहा है, जिससे एक बार फिर एक सप्ताह में दूसरी बार यहां बाढ़ जैसे हालत बन रहे हैं। इससे कुछ वार्डों के कई घरों में पानी घुस गया है, प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है। लोगों को उनके घरों से निकला जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार आज शनिवार सुबह किरंदुल के रेलवे स्टेशन कॉलोनी और तालाब पारा के दर्जनों मकानों में पानी घुस गया है। प्रशासन की बचाव टीम एक-एक घर में जाकर लोगों को सुरक्षित स्थनों में पंचाने में लगी हुई है। बाढ़ बचाव टीम के द्वार बच्चों, महिला, बुजुर्गों को बाहर निकाला जा रहा है। प्रशासन की टीम मुनदी कर लोगों से अपील कर रही है कि जिस भी घर में पानी घुस रहा है, वे लोग घर से निकलकर किसी सुरक्षित जगह पर चले जाएं।
उल्लेखनिय है कि ठीक 6 दिन पहले 21 जुलाई को इसी इलाके से लाखों लीटर पानी किरंदुल शहर में उतरा था, जिसने लगभग 215 से ज्यादा घरों को अपनी चपेट में ले लिया, वहीं 15 से ज्यादा परिवार बेघर हो गए हैं। लोगों का आरोप है कि एनएमडीसी ने अस्थायी डैम खोल दिया था। इस मामले को लेकर दंतेवाड़ा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं। पहाड़ से लाखों लीटर पानी जब शहर की तरफ उतरा तो किरंदुल नगर पालिका के वार्ड नंबर 1, 3, 4 और 6 को अपनी चपेट में लिया। इसके साथ ही पास के ही एक पंचायत के कई इलाकों में भी पानी घुस गया था। विदित हे कि प्रशासन की टीम लगातार सर्वे कर रही है, जिसमें पहले 180 मकान प्रभावित होने का आंकड़ा आया था, लेकिन अब ये बढ़कर 215 हो गया है। बचेली एसडीएम विवेक चंद्रा ने कहा है कि हमने लगभग सर्वे का काम पूरा कर लिया है। पीडि़त निश्चिन्त रहें उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। उन्होने कहा कि आपदा कैसे आई इसकी जांच भी की जाएगी।
किरंदुल के बाढ़ पीडि़त मनोज विश्वकर्मा ने बताया कि हमें कोई सूचना नहीं दी गई थी कि तेज बहाव के साथ पानी आ सकता है। अचानक से पानी आया और सब कुछ तबाह कर दिया। यदि पहले से हमें जानकारी रहती तो हम कुछ व्यवस्था कर पाते। उन्होने कहा कि गनीमत रही की पानी शाम के वक्त छोड़ा गया इस लिए लोग बच गए तथा लोगों को भी बचा लिया गया। यदि रात में यही पानी छोड़ा जाता तो यहां लाशें बिछ जाती।










