जेल के भीतर बिखरता सिस्टम, बाहर गूंजते सवाल, मौत, प्रताड़ना, फरारी, वीडियो और हाई कोर्ट की सख्ती के बीच घिरा पूरा तंत्र –

जेल के भीतर बिखरता सिस्टम, बाहर गूंजते सवाल, मौत, प्रताड़ना, फरारी, वीडियो और हाई कोर्ट की सख्ती के बीच घिरा पूरा तंत्र –

रायपुर : – छत्तीसगढ़ की जेलों से 2023 के बाद जो खबरें निकलकर सामने आई हैं, वे अब अलग-अलग घटनाएं नहीं रहीं। इन्हें जोड़कर देखें तो एक ऐसी पूरी तस्वीर बनती है, जिसमें कहीं मौत है, कहीं प्रताड़ना के आरोप, कहीं फरारी, कहीं मोबाइल और वीडियो का नेटवर्क और इन सबके बीच एक सवाल क्या जेल सिस्टम नियंत्रण में है?

सबसे ताजा मामला रायगढ़ जिला जेल का है, जहां आबकारी प्रकरण में बंद एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जेल प्रशासन इसे विदड्रॉल सिंप्टम और स्वास्थ्य कारण बता रहा है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि यह प्रताड़ना और दबाव का परिणाम है। अस्पताल में परिजनों का विरोध और न्यायिक जांच की मांग इस घटना को साधारण नहीं रहने देती।

इससे पहले रायपुर सेंट्रल जेल में एक महिला बंदी ने जेल के भीतर प्रताड़ना और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए और आत्महत्या की कोशिश की। यह घटना सिर्फ एक शिकायत नहीं थी, बल्कि इसने जेल के भीतर महिला सुरक्षा, व्यवहार और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया। इसी जेल से मोबाइल और वीडियो बाहर आने के मामले भी सामने आए, जिसने यह संकेत दिया कि बंद दीवारों के भीतर भी बाहरी संपर्क सक्रिय है।

बिलासपुर जेल में कैदियों के वीडियो वायरल हुए। सोशल मीडिया तक पहुंच और अंदर से गतिविधियों के सामने आने से यह सवाल और गहरा हुआ कि क्या जेल की निगरानी व्यवस्था वास्तव में प्रभावी है या सिर्फ कागजों में सख्त दिखाई देती है।

बस्तर (जगदलपुर क्षेत्र) में कैदी के फरार होने की घटना ने सुरक्षा तंत्र की असल स्थिति उजागर कर दी। हाई सिक्योरिटी मानी जाने वाली जेल से फरारी यह बताती है कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी चूक है। यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि व्यापक सुरक्षा कमजोरी का संकेत है।

इन सबके बीच अंबिकापुर जेल की स्थिति सबसे चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। यहां किसी एक बड़े कांड की बजाय लगातार मौतों का सिलसिला सामने आया। कम समय में कई कैदियों की मौत। इसी के साथ फरार कैदियों के मामलों का लिंक और सबसे अहम, इस पूरी स्थिति पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी। हाई कोर्ट ने कैदियों की मौत, मेडिकल सुविधा की कमी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में देरी और जेल प्रबंधन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि यह सामान्य स्थिति नहीं है।
यहीं पर आंकड़े पूरी कहानी को और गंभीर बना देते हैं।

हाई कोर्ट में रखी गई जानकारी के मुताबिक एक साल के भीतर ही राज्य की जेलों में 33 कैदियों की मौत हुई, जिनमें अंबिकापुर जेल अकेले 5 मौतों के साथ प्रमुख जेलों में शामिल रहा। वहीं मानवाधिकार आयोग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में छत्तीसगढ़ की जेलों में 285 कैदियों की मौत दर्ज की गई है। हाल के वर्ष में भी यह सिलसिला थमा नहीं है और दर्जनों मौतों के मामले सामने आए हैं।
कोर्ट की सख्ती इस बात का संकेत है कि मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि न्यायिक चिंता का विषय बन चुका है।

अगर इन सभी घटनाओं को एक साथ रखा जाए तो एक स्पष्ट पैटर्न सामने आता है कहीं मौत और प्रताड़ना के आरोप, कहीं मोबाइल और वीडियो का नेटवर्क, कहीं फरारी, और कहीं लगातार मौतों पर कोर्ट की सख्ती। इसके साथ ही एक और बड़ा एंगल जुड़ता है ओवरक्राउडिंग और मेडिकल सिस्टम की कमजोरी। जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी,समय पर इलाज की कमी, और अधिकतर कैदियों का विचाराधीन होना यह सब मिलकर एक ऐसा दबाव बनाता है, जो अक्सर घटनाओं में बदल जाता है।

इसी पैटर्न में हाई कोर्ट के सामने यह भी आया कि राज्य में दर्जनों कैदी फरार हैं, जिनमें से बहुत कम पकड़े जा सके हैं। यह आंकड़ा सीधे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। अब सवाल सिर्फ घटनाओं का नहीं रह जाता सवाल यह है कि यह सब हो क्यों रहा है? यहीं से बात सीधे जाकर रुकती है जेल विभाग के शीर्ष नेतृत्व पर। वर्तमान में जेल विभाग की कमान डीजी स्तर के अधिकारी हिमांशु गुप्ता संभाल रहे हैं। जिनपर पहले ही कई आरोप है अब अलग-अलग जिलों में अलग-अलग तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि समस्या स्थानीय नहीं, बल्कि तंत्र के भीतर कहीं गहराई में है। क्या मॉनिटरिंग सिस्टम जमीन पर उतना सख्त है जितना फाइलों में दिखता है? क्या जेलों में मानवाधिकार और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है? और सबसे अहम क्या इन घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए गए हैं?

सरकार के लिए भी यह सिर्फ जेल विभाग का मामला नहीं है। सुशासन का दावा तभी मजबूत माना जाता है जब कानून-व्यवस्था हर स्तर पर दिखाई दे। सड़क से लेकर जेल की चारदीवारी तक। लेकिन जब जेल के भीतर से मौत की खबर आती है, प्रताड़ना के आरोप सामने आते हैं, कैदी वीडियो बनाते हैं, और फरार हो जाते हैं तो सवाल सिर्फ सिस्टम पर नहीं, पूरे शासन के दावे पर उठते हैं।

रायगढ़ की मौत, रायपुर की महिला बंदी का आरोप, बिलासपुर के वीडियो, बस्तर की फरारी, अंबिकापुर में लगातार मौतें और हाई कोर्ट की सख्ती ये सभी घटनाएं मिलकर एक ही कहानी कहती हैं। जेल की दीवारें ऊंची जरूर हैं लेकिन उनके भीतर का सिस्टम अब आंकड़ों समेत सवालों के घेरे में खड़ा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *