जमीनी कार्यकर्ताओ को दरकिनार कर किसे साधने जुटी है भाजपा , कार्यकर्ताओ की नाराजगी कही भारी न पड़ जाए साय सरकार को –

जमीनी कार्यकर्ताओ को दरकिनार कर किसे साधने जुटी है भाजपा , कार्यकर्ताओ की नाराजगी कही भारी न पड़ जाए साय सरकार को –

रायपुर – आखिरकार संभावित नामो की सूची पर मुहर लगाते हुए भाजपा ने निगम मंडलो की सूची जारी कर दी है । इस सूची के जारी होने से जमीनी कार्यकर्ताओ में खासा नाराजगी देखी जा रही है और सवाल यह उठाया जा रहा है कि इन कार्यकताओं को दरकिनार कर आखिर किन लोगों को साधने जुटी है सरकार ? एक साल की सत्ता में जो कुछ भी प्रदेश में चल रहा है वह किसी से छुपा हुआ नही है हालात यह है कि सत्ता को अब विपक्ष की जरूरत ही नही है भाजपा अपनी खाई खुद खोदने में लगी है शायद इसी की बानगी विधानसभा सत्र में भी दिखलाई पड़ी थी । भाजपा के कर्तव्यनिष्ट जमीनी कार्यकर्ता तो अब यह कहने लगे है कि इससे अच्छा तो विपक्ष में थे कम से उनका काम तो हो जाता था आज सत्ता है शासन है फिर भी कार्यकताओं की सुध लेने वाला कोई नही है ।

जैसा जिनका चढ़ावा वैसा पद 
निगम मंडलो में पद के लिए शुद्ध बोली लगी यह बोली दिल्ली में बैठें एक नेता ने लगाई । बताते है पद के हिसाब से चढ़ोत्तरी चढ़ाई गई जिसने जितना ज्यादा चढ़ाया उसे उतना बड़ा पद मिला । दरअसल यह आरोप हम नही लगा रहे यह आरोप भाजपा के ही कार्यकर्ता कुछ दबी जबान में कुछ खुलकर बोल रहे है । बताया गया कि एक एक पद के लिए करोड़ो का चढ़ावा आया और चढ़ावे की रकम दिल्ली तक पहुँचाई गई । जबकि निगम मंडलो का गठन यह विरुद्ध रूप से सूबे के मुखिया को तय करना था । मगर दिल्ली वाले एटीएम का आरोप लगाते लगाते यह मान चुके है कि प्रदेश पूरा एटीएम है जहाँ से जितना खाली करा सको करो । अब यह करोड़ो का चढ़ावा वाले कितना नैतिकता का पालन करेंगे यह तो वही जाने मगर ऐसी भीड़ से भाजपा की नैया डूबती नजर आती है ।

नियमो की अनदेखी
नियुक्ति को लेकर नियमो की भी अनदेखी का आरोप भी भाजपा के कार्यकर्ता लगा रहे है । भाजपा की आंतरिक राष्ट्रीय नीति के अंतर्गत जिन्हें एक बार निगम मंडल या किसी पद में रहे व्यक्ति को दुबारा लाभान्वित नही किये जाने का प्रावधान है वही नियम यह भी कहता है कि कोई व्यक्ति चुनाव हारा हो या किसी आपराधिक मामलो में संलिप्त पाया गया हो उन्हें निगम मंडल में जगह नही दिए जाने की बात है मगर नियमो की अनदेखी कर उन्हें पद दिया गया जो चुनाव हारे हुए है , पहले पद में रह चुके है या किसी न किसी आपराधिक मामलो में शामिल है । सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा सिर्फ सेठ महाजनों की पार्टी है जो चढ़ावा चढ़ाएगा उसे स्वीकार नही तो दरकिनार कर दिया जाएगा ।

कहा है सबका साथ सबका विकास
दिल्ली में बैठे आला नेता कहते है सबका साथ सबका विकास मगर इन दिनों कार्यकर्ता ही कह रहे है कि पूंजीपतियों के साथ यही है भाजपा का विकास कार्यकर्ताओ की बातों में कही अतिश्योक्ति भी नही है । इसकी बानगी ही है आज जो पूंजीपति है उसी की पूछ परख ज्यादा है जमीनी कार्यकर्ता न काम पा रहा है न पद वह सिर्फ पार्टी का झण्डा उठाये दरी बिछाने के लिए रखा गया है । यह अंदरूनी विद्रोह की आग जो कार्यकर्ताओ में दबी है अगर इसी तरह चलता रहा तो यह चिंगार का रूप ले लेगी और यह भाजपा के लिए अच्छा संदेश नही है ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *