जंगल के शीर्ष अधिकारी ने भाषा की आड़ में कर दिया करोड़ों का वारा-न्यारा!
अकबर का वरदहस्त पाकर सुशासन की गोद मे खेलता तेंदुपत्ता घोटाले का सरगना , एक्स एमएलए ने लगाए वन प्रमुख पर गंभीर आरोप , जगदलपुर में घोटालें की पेशकश लेकर पहुँचे थे श्रीनिवासन राव ,

जंगल के शीर्ष अधिकारी ने भाषा की आड़ में कर दिया करोड़ों का वारा-न्यारा!
अकबर का वरदहस्त पाकर सुशासन की गोद मे खेलता तेंदुपत्ता घोटाले का सरगना , एक्स एमएलए ने लगाए वन प्रमुख पर गंभीर आरोप , जगदलपुर में घोटालें की पेशकश लेकर पहुँचे थे श्रीनिवासन राव ,
रायपुर – दो दिन पहले हमने जनसंवाद में खबर प्रसारित की थी जिसमें बताया था कि कैसे एक तेलगुभाषी अधिकारी ने तेंदुपत्ता घोटाले का पूरा षड्यंत्र रचा , और संग्राहकों को मिलने वाली करोड़ो की राशि डकार गया। फड़ प्रबंधकों में आधे से ज्यादा तेलगुभाषी है भाषा के ज्ञान की वजह से वन विभाग के शीर्ष अधिकारी इन प्रबंधको से सीधा संवाद करते थे। इस आरोप की पुष्टि कोंटा के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने एक पत्रकार वार्ता में की है।
पूर्व विधायक मनीष कुंजाम जिन्होंने जनवरी 2025 में तेंदुपत्ता बोनस में हुए घोटाले की लिखित शिकायत वन प्रमुख समेत तमाम आला अधिकारियों करते हुए मामले की जांच कराए जाने का मांग की थी। उक्त शिकायत के बाद ही इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ था। मामले की जब परत खुलने लगी तो शिकायतकर्ता एमएलए के ही कई ठिकानों पर ACB/EOW ने रेड की कार्यवाही की। मनीष कुंजाम ने प्रेस कांफ्रेंस में जंगल विभाग और इस विभाग के उच्चाधिकारियों गंभीर आरोप लगाएं हैं।
क्या कहा मनीष कुंजाम ने –
मनीष कुंजाम ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि इस पूरे घोटाले में छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया गया है और मास्टर माइंड उच्च अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है । उन्होंने कहा कि डीएफओ से पूछा जाना चाहिए कि आखिर वह किसके इशारे पर काम कर रहे थे,जो रकम निकाली गई वह डीएफओ किनके पास छोड़ रहे थे। मनीष कुंजाम ने अपने आरोप में राजधानी के एक बड़े अधिकारी के नाम का उल्लेख भी किया है। जो रकम की पेशकश लेकर उनसे मिलने जगदलपुर पहुँचे थे। वहीं उन्होंने सवाल भी उठाया कि शिकायतकर्ता पर ही रेड की कार्यवाही आखिर क्योंकि जा रही है।
कौन है सरगना –
बताया जाता है कि इस पूरे घोटाले का सरगना वन प्रमुख श्रीनिवासन राव है जो एक्स एमएलए की शिकायत के बाद उनसे मिलने बीते 9 तारिख को जगदलपुर गए थे। जहाँ उन्होंने पूर्व विधायक को जिला पंचायत चुनाव में भाजपा के पक्ष में वोट करने और मामले को दबाने के लिए एक बड़ी राशी की पेशकश की थी। बताते है कि पीसीसीएफ बार-बार पूर्व विधायक पर दबाव बना रहे थे और अपने इस घोटाले का हिस्सेदार बनाना चाहते थे। लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री के दौरे के दबाव में ACB/EOW की टीम ने आनन फानन में रेड की कार्यवाही की। ACB/EOW की धमक के बाद पीसीसीएफ का सारा खेल ही उलट गया। पूर्व विधायक ने इस पूरे घोटाले को लेकर बड़ा बयान देते हुए श्रीनिवासन राव पर सत्ता पक्ष के लिए माहौल और पैसे की पेशकश का आरोप लगाया है। हालांकि जिला पंचायत चुनाव में भाजपा को सुकमा से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
सवाल अनेक जवाबदेही किसकी –
उक्त आरोप के बाद अनेको सवाल उठ रहे है मगर जंगल विभाग के मंत्री समेत जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है। बताते चले कि तेलगुभाषी श्रीनिवासन राव पर पहले भी कई आरोप लगते रहे है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में वन मंत्री मोहम्मद अकबर का खासमखास यह अधिकारी सुशासन की सरकार में गोटी बिठाकर लाडले बन गए है।
यह वही अधिकारी है जिनको तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कई सीनियर आईएफएस अधिकारियों को सुपरसीट कर वन विभाग का प्रमुख बनाया था जिनके शासन में जंगल को चारागाह समझकर चरा गया। सत्ता बदली तो लगा इस अधिकारी पर जांच होगी और सबसे पहले इस अधिकारी को वन विभाग के उच्च पद से हटाया जाएगा। सुशासन की सरकार ने भी इस अधिकारी को अपनी गोद में बिठा लिया , तभी तो यह अधिकारी जो कल तक कांग्रेस का प्रचारक था आज वह दिखावे के नाम पर भाजपा के लिए वोट करने का अपील कर रहा है। इस अपील का क्या असर हुआ यह बात छुपी हुई नही है सुकमा के जिला पंचायत चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
संघ संगठन को मुँहबाए चिढ़ाता यह अधिकारी-
इस तेलगुभाषी अधिकारी की वजह से अब सत्ता और संगठन की भी जमकर किरकिरी हो रही है। जबकिं संघ और संगठन यह दावा करती है कि उनके मेहनत का परिणाम था कि आज भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में काबिज हो पाई है मगर यह अधिकारी संघ संगठन से ऊपर जाकर आज सबको मैनेज करने का काम कर रहा है और यह दावा कर रहा है कि इसके माथे ही सत्ता और सरकार चल रही है। इस गंभीर मामले में संघ और संगठन को भी संज्ञान लेना चाहिए कि आखिर इस अधिकारी के पास कौन सी मोहनी है जिनके कारण पूरा तंत्र इसके मोह जाल में फंस गया है।अब भी सुशासन की सरकार ऐसे विवादित अधिकारी के पक्ष में खड़ी हो जाएगी तो कांग्रेस और भाजपा में क्या फर्क रह जाएगा।
जांच हुई तो पैरों तले जमीन खिसक जाएगी-
हर सरकार को अपने इशारे चलाने वाला यह तेलगुभाषी अधिकारी जिसने पिछली सरकार में इतना कमाया की इस अधिकारी के कई बड़े बड़े मॉल साउथ भारत मे है। बताते है पिछली सरकार में भी इस पद के लिए इसने कई सौ करोड़ की चढ़ोत्तरी चढ़ाई थी और पूरे जंगल विभाग को जमकर लुटा सत्ता बदली तो फिर से इस अधिकारी ने जोड़-तोड़ शुरू किया और तत्कालीन सरकार में कमाए पैसों से भाजपा में भी लंबी चौड़ी चढ़ोत्तरी चढ़ाकर आज वन विभाग का प्रमुख बनकर बैठा है। जंगल विभाग में पूरे साउथ भारत के ही ठेकेदार भरे है जो इस अधिकारी के लिए जी जान से काम कर रहे है और छत्तीसगढ़ के जंगल और भोली भाली जनता की मेहनत की कमाई को लूटकर यह अधिकारी साउथ भारत में अपना साम्राज्य खड़ा कर रहा है।
सरकार की नीतियों और सुशासन पर प्रश्नचिन्ह –
एक तरफ सरकार प्रदेश भर में सुशासन का तिहार मना रही है और यह दावा कर रही है कि लोगो की समस्याएं संवाद करके दूर की जा रही है मगर इस तेलगुभाषी अधिकारी की वजह से सरकार की नीतियों और सुशासन पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यह सवाल और आरोप एक साल में ही सरकार की कलई खोलकर रख दिया है। सरकार भले ही सुशासन का ढोल पीटते रहे मगर जब तक ऐसे विवादित अधिकारी उच्च पदों पर आसीन रहेंगे तो सुशासन की कल्पना थोथी और बेबुनियाद साबित हो रही है। समय रहते सुशासन की सरकार को सचेत हो जाना चाहिए वरना यह भाजपा के लिए भी उसी तरह नुकसान पहुचायेगा जैसे 70 सीटों वाली कांग्रेस 34 सीट पर सिमटकर रह गई।










