संत ज्ञानेश्वर स्कूल के बच्चों ने जाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का महत्व

00 विद्यार्थियों ने अपनी शंकाओं का समाधान किया, साथ ही प्रशिक्षकों के सवालों का दिया जवाब
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बेसिक जानकारी देने व उसका महत्व बताने के लिए कॉस्मिक क्रिएशन समिति ने एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला सोमवार, 2 जून को लगाई। कार्यशाला में 9वीं से 12वीं तक के अनेक बच्चों ने भाग लिया।
कॉस्मिक क्रिएशन समिति के गोपाल कृष्ण वैष्णव ने सुबह 8.30 से 10.30 तक बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बेसिक जानकारी दी।उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का परिचय दिया व बच्चों को मशीन व कंप्यूटर में अंतर बताया। बच्चों को इसके उपयोग और महत्व के बारे में समझाया। कार्यशाला में 12वीं की छात्रा इफत बानो पटेल से प्रशिक्षक वैष्णव ने प्रश्न पूछा जिस पर इफत ने मशीन और कंप्यूटर के अंतर को समझाया। इसी तरह से 12वीं कॉमर्स की विद्यार्थी श्रद्धा और ऋतिक जायसवाल ने अकाउंटिंग से रिलेटेड प्रश्नों का उत्तर दिया।
10वीं के विद्यार्थी आयुषी व सीमर, 9वीं की गार्गी व मुस्कान ने बताया कि किस तरीके से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उन्हें नोटिस बनाने में और सिलेबस को अच्छे से समझने में मदद करता है। प्रशिक्षक वैष्णव ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कंप्यूटर के माध्यम से समझाया। बच्चों के प्रश्नों का सहजता से उत्तर दिया व उनकी शंकाओं को दूर किया। प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के लोकसभा क्षेत्र में कुछ चयनित विद्यालयों में हुआ। इसके तहत संत ज्ञानेश्वर विद्यालय को भी चुना गया। उन्होंने कहा कि एआई का मतलब है डिवाइस की मानव बुद्धि की तरह काम करने की क्षमता और मानव की ओर से किए जाने वाले कार्यों को पूरा करना जैसे कि डेटा में पैटर्न को पहचानना और जानकारी के आधार पर निर्णय लेना। यह जटिल एल्गोरिदम (उर्फ फैंसी गणित नियम) और डेटा प्रोसेसिंग तकनीकों के उपयोग के माध्यम से ऐसा करता है। कार्यशाला में स्कूल के शिक्षक रोशन सिंह राजपूत का विशेष योगदान रहा।

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