मंत्री के कार्यालय के सामने दलाल का ऑफिस , कृषि और ट्राइबल विभाग में दलाल का एकछत्र राज ,

मंत्री के कार्यालय के सामने दलाल का ऑफिस , कृषि और ट्राइबल विभाग में दलाल का एकछत्र राज
रायपुर। देश के इतिहास में ऐसा कभी नही हुआ कि किसी दलाल के हाथों पूरा विभाग सौप दिया गया हो लेकिन छत्तीसगढ़ में छह महीने पूर्व ही बनी भाजपा सरकार दलालो के हाथों की कठपुतली बन गई है . यह दलाल मंत्री को पहले ही एक बड़ी राशि देकर पूरे विभाग का ठेका ले लिया है अब जो भी काम हो वह दलाल के माध्यम से ही पूरा हो रहा है. इस दलाल ने मंत्री के कार्यालय के सामने ही अपना आलीशान दलाली का अड्डा बना लिया है और इस जगह से ही पूरे प्रदेश में परसेंट लेकर काम बांटा रहा है . दलाल खुलेआम कहता है कि कृषि और ट्राइबल विभाग इसकी जेब मे है .
कृषि और ट्राइबल : –
कृषि और ट्राइबल विभाग का मंत्रालय कहने को तो एक आदिवासी और सीनियर नेता के पास है मगर मंत्री जी की विभाग में सुनने वाला कोई नही है जो भी फैसला या काम है इसी दलाल ही टैकल करता है . आलम यह है कि मंत्री जी खुद दस्तखत करने या किसी काम के लिए इस दलाल के ठिकाने में जाते है .
कृषि और ट्राइबल विभाग एक ऐसा विभाग है जो सीधे किसान और आदिवासियों के हित से जुड़ा हुआ है ऐसे विभाग का ठेका एक मारवाड़ी दलाल के हाथों में सौपना सीधे सीधे किसानों और आदिवासियों के हितों से खिलवाड़ है . 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा अगर प्रचंड बहुमत से जीतकर आई तो इसमें सबसे बड़ा योगदान किसान और आदिवासियों का है सत्ता में आने के बाद भाजपा के मंत्री दलालों के हाथों खेल रहे हैं, इससे यह तो साफ है कि आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में इसका दुष परिणाम भाजपा को भुगतना पड़ेगा .
प्रशिक्षण के नाम पर करोड़ो का बजट : –
किसानों के उन्नत फसल और संरक्षण के लिए सरकार करोड़ो का बजट आबंटित करती है मगर यह करोड़ो का बजट प्रशिक्षण के नाम पर बंदरबांट किया जा रहा है आकड़ो की अगर बात करे तो वित्तीय वर्ष 2024-25 में संचालक कृषि विभाग द्वारा लगभग 40 करोड़ की स्वीकृति मिली है जिसको बंदरबाँट करने की नीयत से किसानों को प्रशिक्षण देने के नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है .
इसी तरह ट्राइबल आदिम जाति विभाग में गैर कार्यायलीन फर्नीचर और कपड़े बिस्तर के लिए 19 करोड़ की स्वीकृति मिली है जिसमे भी पहले दलाल और मंत्री ने अपना परसेंट फिक्स कर लिया है इस परसेंट के बाद अगर राशि बची तो काम होगा अन्यथा यह पूरी राशि डकारने की जुगत लगी है .
कहा कितनी राशि कितने का बंदरबांट आकड़ो में : –
वित्तीय वर्ष 2024-25 में संचालक कृषि विभाग द्वारा 1000 किसानों को प्रशिक्षण दिया जाना है जिसकी राशि 1 करोड़ 35 लाख है . जैविक प्रमाणीकरण हेतु सहायक अनुदान उनहत्तर लाख है . कृषिकों को आर्थिक सहायता फसल प्रदर्शन हेतु 15 करोड़ 50 लाख , जैविक खाद उत्पादन हेतु एक करोड़ की राशि , कृषक मेला आयोजन हेतु 70 लाख , विभिन्न व्यक्तियों के प्रशिक्षण हेतु एक करोड़ 35 लाख , फसलो के प्रदर्शन के लिए 15 करोड़ 50 लाख , साथ ही इन सबके प्रचार प्रसार के लिए एक करोड़ 64 लाख रुपये खर्च किया जाना है कुल मिलाकर कृषि और ट्राइबल विभाग में करोड़ो के बजट को वारा-न्यारा करने की सुनियोजित षड़यंत्र करते हुए योजना बनाई गई है जिसमे मंत्री के दलाल और मंत्री पर लक्ष्मी की कृपा तो भरपूर बरसेगी और किसान और आदिवासी ताकते रह जाएंगे .
उक्त मामले को लेकर हमने इसकी पहली सीरीज चलाई की कैसे मंत्री जी ने एक दलाल को विभाग ठेके पर दे दिया खबर के बाद विभाग में हड़कंप तो मचा मगर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई लोग दबी ज़बान में अपनी वेदनाएं बता रहे है मगर पीड़ा को सुनने वाला कोई नही है . अब सवाल यह है कि अगर जनता के सरोकार से जुड़ने वाला विभाग ही ठेकेदारी प्रथा से चलेगी तो आमजनता का हित कैसे होगा.










