विधानसभा की फाइलों में कितने राज़? भर्ती से शिलापट्ट तक, दिनेश शर्मा के कार्यकाल का हिसाब –

रायपुर – सरकार बदली, विधानसभा अध्यक्ष बदले, नया भवन बन गया, लेकिन विधानसभा सचिवालय के प्रशासनिक फैसलों से जुड़े विवाद अब भी सवालों के घेरे में हैं। सचिव दिनेश शर्मा के कार्यकाल में भर्ती, पदस्थापना, वेतन निर्धारण और सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर उठे सवाल जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। अब स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे के बीच इन मामलों पर भी ध्यान जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
47 पदों की भर्ती से पदस्थापना तक –
वर्ष 2019 में सहायक ग्रेड-3 के 47 पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ और दिसंबर 2021 में लिखित परीक्षा हुई। अभ्यर्थियों की नियुक्ति लंबित रहने तथा अन्य पदों पर नियुक्तियों और आरक्षण नियमों के पालन को लेकर शिकायतें सामने आईं। भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा मामला न्यायालय तक भी पहुंचा। इन शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, यह सवाल बना हुआ है। यही नही सहायक मार्शल भर्ती में आठ लोगों की सूची में से सात की सेवाएं समाप्त होने, जबकि सुशांत राय की सेवा जारी रहने को लेकर भी सवाल उठे। सुशांत राय वर्तमान में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के ओएसडी हैं। इसी तरह, 19 अक्टूबर 2020 के आदेश से संजय दुबे को भाषा, संस्कृति एवं साहित्य अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपने और 1 अप्रैल 2022 की वरिष्ठता सूची में उनका 17वां स्थान होने के आधार पर पदस्थापना के मानदंडों पर सवाल उठे हैं।
वेतनमान और सरकारी खजाने का हिसाब –
दिनेश कुमार शर्मा के वेतन निर्धारण में पे-मैट्रिक्स लेवल-14 और ₹1,44,200 से ₹2,18,200 के वेतनमान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मूल वेतन और महंगाई भत्ते सहित लगभग ₹75 हजार प्रतिमाह तक के अंतर का आकलन किया गया है। ऐसे में वेतन निर्धारण की पात्रता, स्वीकृति प्रक्रिया और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव की पड़ताल महत्वपूर्ण है।
127 टीवी, 400 एसी और शिलापट्ट का विवाद –
नए विधानसभा भवन के लगभग 127 टीवी सेट, पुराने भवन के 46 से 48 टीवी और करीब 400 एसी सहित फर्नीचर व अन्य सरकारी सामग्री के प्रबंधन को लेकर सवाल उठे हैं। स्टॉक रजिस्टर, गेट पास और हस्तांतरण संबंधी अभिलेख इस मामले में महत्वपूर्ण हैं।
नए विधानसभा भवन के उद्घाटन शिलापट्ट का मामला भी खासा विवादों में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2025 को भवन का उद्घाटन किया था। शिलापट्ट पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत का नाम बाद में जोड़े जाने को लेकर सवाल उठे। जनसंवाद Today ने भी इस मुद्दे पर खबर प्रकाशित की थी। मूल स्वीकृत शिलापट्ट, उसमें बदलाव की अनुमति न होने के बाउजूद नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत का नाम जोड़ा गया बताया जाता है कि दिनेश शर्मा ने सारे नियम कायदों को धता बताते हुए शिलालेख पट्टिका में महंत का नाम जोड़वाया। इसके पीछे का कारण भी स्पष्ट है आज दिनेश शर्मा जिस कुर्सी में काबिज है वह महंत के कार्यकाल और उनके वरदहस्त का ही नतीजा है जो उनकी कुर्सी को कोई हिला तक नही पाया और उन्हें सेवा वृद्धि दे दी गईं।
वायरल वीडियो और सरकारी वाहन –
भर्ती के नाम पर दिनेश शर्मा का लेन-देन से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल है। जिसमे दिनेश शर्मा स्पष्ट रूप से 25 हजार लेते हुए दिखाई दे रहे है विडंबना देखिये यह वीडियो खुद भाजपा के ही सोशल हैंडल से शेयर की गई थी लेकिन सुशासन की सरकार आने के बाद न ही इस पर गौर किया न ही कार्रवाही बल्कि इसके उलट उन्हें सेवा विस्तार दे दिया गया। प्रयागराज कुंभ यात्रा के दौरान सरकारी वाहन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठे थे। इन मामलों में क्या जांच हुई, क्या निष्कर्ष निकले और कोई कार्रवाई की गई या नहीं इसका जवाब अब तक अनुत्तरित है।
सेवा-विस्तार के बीच स्मृति ईरानी के दौरे पर निगाहें –
दिनेश शर्मा को नवंबर 2025 में सेवानिवृत्ति के बाद एक वर्ष का सेवा-विस्तार दिया गया था। उनकी मौजूदा अवधि 30 नवंबर 2026 को समाप्त हो रही है। ऐसे में उनके कार्यकाल से जुड़े पुराने विवाद फिर चर्चा में हैं। इसी बीच स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे को लेकर उम्मीद है कि विधानसभा सचिवालय की प्रशासनिक व्यवस्था और इन विवादों पर भी ध्यान जा सकता है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली संस्था के सामने भी इन सवालों का जवाब देने की चुनौती है। भर्ती, पदस्थापना, वेतन निर्धारण और सरकारी संपत्तियों से जुड़े मामलों की दस्तावेजों के आधार पर समीक्षा होनी चाहिए और जहां अनियमितता प्रमाणित हो, वहां नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
विधानसभा वह संस्था है जहां सरकार से जवाब मांगा जाता है। ऐसे में उसके अपने सचिवालय से जुड़े सवालों का जवाब भी पारदर्शिता और नियमों के पालन के जरिए मिलना चाहिए। भवन बदल गया, सरकार बदल गई, अध्यक्ष बदल गए अब जरूरत है कि फाइलों में उलझे सवालों का भी हिसाब हो।










