स्मृति ईरानी की एंट्री से सत्ता के गलियारों में सन्नाटा! ढाई साल का हिसाब होगा या रसूख की दुकान चलेगी –

राजधानी – सियासत में कुछ नेताओं का स्वागत फूल-मालाओं से होता है, तो कुछ की आमद से बंद कमरों में रखी फाइलों की याद आने लगती है! छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी की एंट्री के साथ कुछ ऐसे ही सवाल तैरने लगे हैं। पांच हजार कार्यकर्ताओं की भीड़ और एक हजार बाइकों की रैली का प्लान था, लेकिन मैडम ने एक झटके में पूरा तामझाम रद्द कर दिया। संदेश साफ था संगठन में शक्ति प्रदर्शन से ज्यादा अनुशासन की अहमियत है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कभी डी. पुरंदेश्वरी को ‘हंटरवाली’ कहा था, तो स्मृति ईरानी के लिए ‘घायल शेरनी’ की उपमा दी। मगर स्मृति की पहचान किसी उपमा की मोहताज नहीं। उनका अंदाज ही ऐसा है कि सामने वाला अगला सवाल सुनने के लिए तैयार रहे या अगले निर्देश के लिए, यह तय करना मुश्किल हो जाता है।
कार्यालय में अतिरिक्त वीआईपी सुरक्षा हटाने और मंत्रियों की गाड़ियों को मुख्य गेट पर रोकने की चर्चा ने भी सियासी गलियारों में संदेश पहुंचा दिया। जिनके लिए पद के साथ प्रोटोकॉल भी प्रतिष्ठा का सवाल है, उन्हें यह बदलाव सहज नहीं लगा होगा।
अब असली कहानी स्वागत की नहीं, हिसाब की है
सरकार को ढाई साल से ज्यादा हो चुके हैं। किस मंत्री ने विभाग में क्या बदला, जनता को क्या मिला और किसकी ऊर्जा काम से ज्यादा अपनी छवि चमकाने में लगी रही इन सवालों का जवाब सोशल मीडिया की चमक से नहीं मिलेगा। कैमरे के सामने सक्रियता और पोस्ट में उपलब्धियां दिखाना आसान है, लेकिन असली रिपोर्ट कार्ड जमीन पर बनता है।
खासकर उन मंत्रियों के लिए यह दौर असहज हो सकता है, जिनकी पहचान विभागीय कामकाज से ज्यादा प्रचार और सोशल मीडिया की सक्रियता से बनी है। अगर नई प्रभारी ने संगठन और सरकार के कामकाज का नियमित आकलन शुरू किया, तो केवल रसूख के भरोसे राजनीति करने वालों को अपना हिसाब दुरुस्त करना पड़ सकता है।
संगठन तक फीडबैक पहुंचाने के अपने रास्ते होते हैं कार्यकर्ताओं की शिकायतें, बैठकों की बातें और जमीनी रिपोर्ट। लेकिन अनुशासन और जवाबदेही पर शुरुआती जोर ने समीक्षा की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं जरूर तेज कर दी हैं।
अब किसकी जवाबदेही तय होगी और किसके कामकाज पर सवाल उठेंगे, यह वक्त बताएगा। स्मृति ईरानी के सामने चुनौती भी यही है कार्यकर्ताओं की सुनवाई, सरकार और संगठन के बीच तालमेल और कामकाज की वास्तविक समीक्षा।
क्योंकि असली परीक्षा रद्द हुई रैली या गेट पर रुकी गाड़ियों से नहीं होगी। परीक्षा उस दिन होगी, जब मंत्रियों से पूछा जाएगा ढाई साल में किया क्या है? और जवाब में पोस्टर, प्रचार और सोशल मीडिया की पहुंच नहीं, जमीन पर हुआ काम गिनाना पड़ेगा।
तभी पता चलेगा कि स्मृति ईरानी की एंट्री महज नए प्रभारी का आगमन है या छत्तीसगढ़ भाजपा में कामकाज के तौर-तरीके बदलने की शुरुआत!










