रियासत कालीन पारंपरानुसार बस्तर दशहरा की दूसरी रस्म डेरी गड़ाई हुई संपन्न

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला मुख्यालय में 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की मुख्य रस्मों की शुरूआत 24 जुलाई को पाट जात्रा पूजा विधान के साथ हो गई है, इसके बाद दूसरी रस्म डेरीगड़ाई पूजा विधान के तहत परंपरानुसार बिरिंगपाल से लाई गई साल के पेड़ की लकड़ी को लाई, चना, मोंगरी मछली व अंडा अर्पित कर डेरी गड़ाई पूजा विधान परंपरानुसार दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी प्रेम पाढ़ी ने संपन्नकरवाया। इस अवसर पर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष बस्तर सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव, महापौर संजय पांडे, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर हरिस एस, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, बस्तर दशहरा पर्व के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, मेंबर-मेंबरिन और बड़ी संख्या में स्थानीय समुदाय उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
उल्लेखनिय है कि डेरी गड़ाई पूजा विधान के बाद रथ निर्माण के लिए लकड़ी सिरहासार चौक में लाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा, रथ निर्माण की लकड़ी पहुंचने के साथ ही विशालकाय दुमंजिला रथ निर्माण की प्रकिया शुरू हो जायेगी। बस्तर दशहरा का मुख्य आकर्षण विशालकाय दुमंजिला रथ निर्माण की प्रक्रिया जिसमें स्थानिय ग्रामीण परंपरानुसार पारंपरिक औजारों से रथ का निर्माण करते हैं। तत्पश्चात बस्तर दशहरा पर्व के कुल 21 रस्में-परंपराओं का दौर काछनगादी पूजा विधान 21 सितंबर को तीसरी रस्म में बस्तर दशहरा के निर्विघ्र संपन्नता के लिए काछन देवी के द्वारा आशिर्वाद देने के साथ देवी की भक्ति का पर्व बस्तर दशहरा की धूम रहेगी।
विदित हो कि प्रति वर्ष बस्तर दशहरा पर्व में संचालित होने वाले एक नये दुमंजिला रथ का निर्माण किया जाता है, जिसमें एक वर्ष 4 पहिये के रथ तथा दूसरे वर्ष 8 पहिये के रथ का निर्माण होता है। इस वर्ष 4 पहिये वाले रथ का निर्माण किया जायेगा। बस्तर दशहरा में दोनो ही रथों का परिचालन किया जाता है, 4 पहिये के रथ को फूल रथ कहा जाता है, जिसकी परिक्रमा नवरात्र के कलश स्थापना के बाद 24 सितंबर से प्रारंभ होकर 29 सितंबर तक जारी रहेगी, 8 पहिये के रथ को रैनी रथ कहा जाता है, जिसका परिचालन अंतिम 2 दिन 1 किया जायेगा। जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। साथ ही देश-विदेश के सैलानी भी ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के साक्षी बनते हैं।

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