अमित शाह के दौरे के बीच बड़ी वारदात: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष भाजपा नेता का मोबाइल दिनदहाड़े लूटा, राजधानी में कमिश्नरी सिस्टम बेबस रायपुर :

अमित शाह के दौरे के बीच बड़ी वारदात: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष भाजपा नेता का मोबाइल दिनदहाड़े लूटा, राजधानी में कमिश्नरी सिस्टम बेबस
रायपुर : – राजधानी रायपुर में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक सोमवार सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान मोबाइल लूट का शिकार हो गए। घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पॉश इलाके पीडब्ल्यूडी ब्रिज और भारत माता चौक के पास हुई, जहाँ बाइक सवार बदमाश झपट्टा मारकर उनका मोबाइल लेकर फरार हो गए।
घटना इतनी तेजी से हुई कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष संभल तक नहीं पाए। रायपुर पुलिस ने घटना की पुष्टि की है और आरोपियों की तलाश की बात कही है, लेकिन इस वारदात ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह घटना ऐसे समय हुई है जब प्रदेश को कल ही पूर्णकालिक डीजीपी मिला है, देश के गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं, और राजधानी में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद लगातार सुरक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी कह रही है।

जिस इलाके में यह वारदात हुई, उसे राजधानी का सबसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी जोन माना जाता है। वीआईपी मूवमेंट, पुलिस पेट्रोलिंग और निगरानी के दावों के बीच दिनदहाड़े पूर्व विधानसभा अध्यक्ष से मोबाइल लूट हो जाना सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल बनकर खड़ा हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि जब राजधानी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की स्थिति क्या होगी? कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद राजधानी में चाकूबाजी, झपटमारी, लूट, गैंग एक्टिविटी, और रात से लेकर सुबह तक बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विपक्ष पहले भी इसे कागजी कमिश्नरी बता चुका है। अब पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के साथ हुई घटना ने सरकार और पुलिस प्रशासन दोनों को असहज स्थिति में ला दिया है।
घटना का राजनीतिक असर इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि यह वारदात सत्ता पक्ष के वरिष्ठ चेहरे के साथ हुई, वह भी ऐसे समय जब पूरा प्रशासन हाई अलर्ट मोड में बताया जा रहा है, और देश के गृह मंत्री खुद छतीसगढ़ दौरे में मौजूद हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में अब सवाल उठ रहे हैं।क्या राजधानी में अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है? क्या कमिश्नरी सिस्टम सिर्फ चालान और प्रेस रिलीज तक सीमित रह गया है? और क्या नए डीजीपी के सामने सबसे पहली चुनौती राजधानी की बिगड़ती कानून व्यवस्था बनने जा रही है?
फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि राजधानी में अपराधियों का दुस्साहस अब उस स्तर तक पहुंच चुका है जहाँ वीआईपी पहचान भी सुरक्षा की गारंटी नहीं रही।










