छोटे बेठिया नाबालिग छात्रा के गर्भवती होने के मामला में प्रशासन व राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग उलझा

कांकेर। जिले के छोटे बेठिया आश्रम में अध्यनरत नाबालिग छात्रा के गर्भवती होने का मामला सुलझने की जगह पूरी तरह से उलझ गया है। छात्रा के परिजन छात्रा के साथ किसी भी तरह की घटना से इनकार कर रहे है, वहीं पहले जिस सरपंच ने स्वयं पूरे मामले की शिकायत करती है, फिर शिकायत से पल्ला झाड़ लेती है, प्रशासन की 5 सदस्यीय टीम भी अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची सकी है, अब दिल्ली से मामले की जांच के लिए पहुंची राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की 3 सदस्यीय टीम को भी छात्रा के परिजनों और स्थानिय ग्रामीणों ने छात्रा से मिलने नहीं दिया, जिसके बाद मामला और उलझ गया है। अब स्थानिय ग्रामीण एवं परिजन छात्रा को जांच दल से नही मिलने देे रहे है और ना ही छात्रा के मेडिकल के लिए राजी हो रहे है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की सदस्य प्रीति भरद्वाज ने बताया कि पीडि़ता से मिलने से उनके परिजनों और गांव के लोगो ने रोक दिया, वही सरपंच जिन्होंने पहले शिकायत खुद की थी अब वो ये कह रही है कि उनसे धोखे से शिकायत पत्र में हस्ताक्षर करवाया गया। प्रीति भरद्वाज ने कहा कि जो कुछ उन्होंने जांच में पाया है उसकी रिपोर्ट वो राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को सौंपेगी।
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की सदस्य प्रीति भरद्वाज ने छोटे बेठिया आश्रम के निरीक्षण के बाद जिला प्रशासन को ही आड़े हाथों लिया है, और जमकर खरी खोटी सुनाई है। प्रीति भरद्वाज ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि आश्रम की स्तिथि बेहद बद्तर है छात्राएं बेहद गंभीर स्तिथि में यहां रह रही है, आश्रम में बाउंड्रीवाल नहीं है, आश्रम का भवन जर्जर हो चुका है, गंदगी का आलम पसरा हुआ है। छात्राओं को आश्रम में नए-नए गद्दे रखे होने के बाद भी जमीन पर सोना बैठना पड़ रहा है। यही नहीं आश्रम के छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी कोई प्रबन्ध नहीं है। प्रीति भारद्वाज ने कहा कि जिला प्रशासन की लापरवाही है कि इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आश्रम की निलंबित अधीक्षिका ने भी इस बात को राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की टीम के सामने स्वीकार किया है कि वह रात में आश्रम में नहीं रूकती थी। वर्तमान में पूरे मामले को लेकर जांच उलझ गई है। ना ही प्रशासन द्वारा गठित टीम किसी निष्कर्ष पर पहुंची है ना ही राष्ट्रीय बाल संरक्षण की टीम को इस मामले में कोई हल मिल रहा है।

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