बीजापुर में वर्ष 2024 में आश्रम-छात्रावास में अध्यनरत 10 बच्चों की हुई थी मौत

बीजापुर। जिले में वर्ष 2024 में अलग-अलग आश्रम- छात्रावास में अध्यनरत दस बच्चों की मौत हुई हैं। आठ बच्चों की मौत बीमारीसे हुई, वहीं एक बच्चे की मौत का कारण आत्महत्या तो एक बच्ची की मौत जलने से हुई थी। बच्चों की मौत के बाद आश्रम-छात्रावास की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सवालो के बाद कई दौर की जांच भी साल भर तक होती रही, लेकिन जांच बेनतीजा ही साबित हुई। दरअसल आश्रम छात्रावास में बच्चों को मिलने वाली सुविधा के साथ ही खाने-पाने की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे है। मौत के प्रमुख कारणों में बच्चों का बीमार होना है।
जिले के इन आश्रम- छात्रावास में वर्ष 2024 में 10 बच्चों की हुई मौत जिसमें 27 फरवरी जेवियर कुजूर उम्र 13 वर्ष कक्षा 7वीं का छात्र- प्री. मैट्रिक बालक छात्रावास चेरागंगी (जिसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी) 6 मार्च लिप्सा. उम्र 4 वर्ष आवासीय बालिका पोटाकेबिन तिम्गापुर पोटाकेबिन में आग लगने की वजह से जलकर मौत हो गई। 19 अप्रैल रजनी यालम उम्र 20 वर्ष छात्रा की ईलाज के दौरान मौत हुई तारलागुड़ा की रहने वाली थी। 12 जुलाई दीक्षिता रेगा उम्र 9 वर्ष कक्षा चौथी आवासीय बालिका पोटाकेबिन तारलागुड़ा (मलेरिया से हुई मौत) 14 जुलाई वेदिका जव्वा उम्र 4 वर्ष कभा तीसरी आवासीय बालिका पोटाकेबिन संगमपली (मलेरिया से हुई मौत) 8 अगस्त अनिता कुरसम उम्र 9 वर्ष कक्षा दूसरी कन्या आश्रम बेदरे (बुखार और उल्टी दस्त से हुई मौत) 27 सितंबर राकेश पुनम उम्र 8 वर्ष कक्षा पहली आवासीय विद्यालय दुगईगुडा (उल्टी दस्त सेहुई मौत)10 दिसंबर शिवानी उम्र माता रुकमणी कन्या आवासीय आश्रम धनोरा (फूड पाईजनिंग से हुई मौत) 11 दिसंबर विमला कवासी कक्षा 10वीं उम्र 15वर्ष आवासीय कन्या पोटाकेबिन नेमेड (सिकलिंन की बिमारी सक हुई मौत) 16 दिसंबर टंकेश्वर नाग कक्षा चौथी आवासीय बालक स्कूल भटवाड़ा (मलेरिया से हुई मौत)।
=उल्लेखनिय है कि जिले में आदिवासी आश्रम 137 तथा 51 छात्रावास, 34 आवासीय पोटाकेबिन विद्यालय संचालित है। जिसमें आदिवासी आश्रम एवं छात्रावास में 15 हजार बच्चे अध्यनरत है। वहीं पोटाकेबिन में 12 हजार से अधिक बच्चे अध्यनरत हैं। विपक्षी राजनैतिक दल हमेशा आरोप लगाती रही हैं कि पोटाकेबिन और आश्रम-छात्रावास का अधीक्षक बनने के लिए जिले में बोली लगती है। जिसके लिए एक मोटी रकम सालाना तक का तय है, इस संबंध में एक विडियो भी वायरल हुआ था। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है, कि आश्रम- छात्रावास में बच्चों का कितना ख्याल रखा जाता है।आवापल्ली स्थित पोटाकेबिन में 6 मार्च 2024 को आग लगने से एक बच्ची की मौत हो गई थी। इस मामले के बाद पोटाकेबिन की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए थे। दरअसल पोटाकेबिन में आग लगने की घटनाओं से निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं। उस वक्त इस संबंध में आदेश भी जारी किए गए,लेकिन आज भी पोटाकेबिन का संचालन उसी तरीके से हो रहा है।

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