राजकाज – शेख चिल्ली का फोन, देवेंद्र की घेराबंदी और सुशासन में दाऊ का दबदबा!

राजधानी – सुशासन के ढाई साल हो चुके हैं।सरकार भले विष्णु भैया की है, मगर सत्ता के गलियारों में आज भी दाऊ जी की पुरानी हुकूमत के किस्से खत्म होने का नाम नहीं ले रहे। बताते हैं, सुशासन बाबू के राज में भी एक खास बैच की ऐसी पैठ है कि फैसलों की मेज पर आज भी शेख चिल्ली की कहानी सुनाई जाती है। पुराने साहब भी खुश, बैच विशेष भी खुश और सुशासन बाबू को इसकी भनक कितनी है, यह तो वही जानें! अब इसे प्रशासनिक अनुभव कहें या पुरानी सल्तनत का बचा हुआ असर, मगर चर्चा खूब है।
अब शेख चिल्ली का ताजा किस्सा सुनिए!
कांग्रेस में देवेंद्र यादव का सियासी कद बढ़ रहा है। भूपेश बघेल की अपनी राजनीतिक विरासत है और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर नए चेहरे की चर्चा। सुखदेव भगत प्रभारी बनकर रायपुर पहुंच चुके हैं। उधर, बघेल को पंजाब से हटाकर असम की जिम्मेदारी मिली है। देवेंद्र, टीएस सिंहदेव और चरणदास महंत की एक साथ मौजूदगी ने भी नए सियासी समीकरणों की चर्चा को हवा दी है।
इसी बीच कोल-लेवी की पुरानी फाइल ने फिर हलचल मचा दी। जांच वाले साहब ने शनिवार को विधायक देवेंद्र यादव को करीब दो घंटे पूछताछ के लिए बैठाया। कोल-लेवी मामले में सूर्यकांत तिवारी से जब्त डायरी में देवेंद्र का नाम सामने आने और विधायक तक रकम पहुंचने के उल्लेख है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कोल परिवहन में अवैध वसूली का बड़ा तंत्र खड़ा किया गया था। अब डायरी में नाम आने से लेकर रकम के कथित लेनदेन तक, जांच का अपना हिसाब है और देवेंद्र का अपना पक्ष। लेकिन साहब, पूछताछ का वक्त भी ऐसा है कि सियासी गलियारों में फाइल से ज्यादा उसकी टाइमिंग पढ़ी जा रही है!
अब असली चटकारा यहीं से शुरू होता है!
चर्चा है कि जांच एजेंसी वाले साहब तक शेख चिल्ली का फोन पहुंचा! वही शेख चिल्ली, जो पिछली सरकार में दाऊ के नाक का बाल हुआ करते थे। अब सुशासन बाबू के राज में भी अपना पुराना रुतबा और दबदबा कायम किए हुए हैं। खुद भी जांच के केंद्र में हैं और इन दिनों पढ़ाई के लिए छुट्टी पर हैं। मगर छुट्टी पढ़ाई से है या सियासत से, यह तो वही जानें! बताते हैं, फोन के बाद जांच वाले साहब का रुख बदला और देवेंद्र को पूछताछ के लिए बुला लिया। चिल्ली भले छुट्टी पर बैठा हुआ है मगर वजनदारी आज भी कायम है।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती! सुशासन के ढाई साल बाद भी अगर पुराने दौर के ताकतवर किरदारों की पैठ और बैच विशेष की धमक के किस्से चल रहे हैं, तो फिर सुशासन की असली चाबी किसके हाथ में है? विष्णु भैया की सरकार में फैसले नए हो रहे हैं या पुराने साहबों की कहानी पर ही मुहर लग रही है? पुराने साहब खुश, बैच विशेष खुश और सुशासन बाबू को भनक है भी या नहीं यह अपने आप में सबसे बड़ा सवाल है!
उधर, कांग्रेस में देवेंद्र की उड़ान और भूपेश की विरासत के बीच प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी का गणित उलझा है। सिंहदेव-महंत के अपने समीकरण हैं, सुखदेव भगत के सामने संगठन की चुनौती है। ऐसे में कोल-लेवी की जांच, डायरी में नाम और देवेंद्र को बुलाने के वक्त ने सियासी गलियारों को नया मसाला दे दिया है। क्या यह महज जांच का सिलसिला है या नेतृत्व की लड़ाई में युवा चेहरे की घेराबंदी का कोई पैतरा? जांच के आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन राजनीति में टाइमिंग के भी अपने मायने निकाले जाते हैं!
कानून अपना काम करे, सियासत अपना। मगर साहब, सरकार विष्णु भैया की, सुशासन का दावा नया और फैसलों के किस्सों में किरदार अब भी पुराने! शेख चिल्ली का फोन वाकई इतना असरदार है, तो फिर देवेंद्र की घेराबंदी का खेल कौन खेल रहा है और यक्ष प्रश्न यही है सुशासन की चाबी आखिर किसकी जेब में है?










