40 साल के लोहा साम्राज्य पर CBI का शिकंजा! रिकेश सेन की मुहिम, साय सरकार का चक्रव्यूह, छोटू के दरबार से ब्यूरोक्रेसी तक हड़कंप! तत्कालीन से वर्तमान IPS- IAS, पुलिस और नेताओं तक जांच की आंच!

 

रायपुर/भिलाई – भिलाई में चार दशक से चल रहे लोहा चोरी के साम्राज्य में अब CBI की एंट्री हो गई है। जिस नेटवर्क को लेकर वर्षों से पुलिस, प्रशासन, संयंत्र प्रबंधन और रसूखदार कारोबारियों की भूमिका शामिल थी, उसकी परतें खोलने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो का रास्ता साफ हो गया है। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की लगातार मुहिम और सोशल मीडिया पर उठाए गए सवालों के बीच विष्णुदेव साय सरकार ने 25 सितंबर को राजपत्र अधिसूचना जारी कर बड़ा कदम उठाया है।

CBI की एंट्री से छोटू के साम्राज्य से लेकर सत्ता-विपक्ष के गलियारों और ब्यूरोक्रेसी तक हलचल तेज हो गई है। अब जांच की आंच सिर्फ लोहा चोरी के नेटवर्क तक सीमित रहेगी या फिर इस खेल को संरक्षण देने वालों के चेहरे भी बेनकाब होंगे? कहीं ऐसा न हो कि 40 साल के इस साम्राज्य की परतें खुलने के साथ उन ताकतवर IAS-IPS के चेहरे भी सामने आ जाएं, जिनकी वर्दी और कुर्सी की आड़ में इस खेल को पनाह देने का खेल खेला गया।

विधायक की मुहिम, सरकार का फैसला –
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन लंबे समय से भिलाई स्टील प्लांट में लोहा चोरी का मुद्दा उठाते रहे हैं। विधानसभा में नियम 117 के तहत अशासकीय संकल्प की सूचना देकर उन्होंने केंद्र से CBI जांच की मांग की थी। सोशल मीडिया पर भी उन्होंने ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण को लेकर सवाल खड़े किए। 25 सितंबर 2026 को गृह विभाग ने असाधारण राजपत्र क्रमांक 558 जारी कर पुरानी भिलाई थाने के अपराध क्रमांक 277/2026 की जांच के लिए CBI को इस प्रकरण में पूरे छत्तीसगढ़ में क्षेत्राधिकार देने की सहमति प्रदान कर दी। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत जारी अधिसूचना से अब CBI जांच का रास्ता खुल गया है। इस मामले में संगठित अपराध, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित BNS की गंभीर धाराएं दर्ज हैं।

कौन है छोटू, जिसके 1500 ट्रकों के नेटवर्क पर उठ रहे सवाल –
भिलाई में लोहा चोरी का यह साम्राज्य आज का खड़ा किया हुआ कारोबार नहीं है। करीब 40 साल पहले इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू के पिता के दौर से शुरू हुआ यह खेल अब 1500 से अधिक ट्रकों और ट्रेलरों के नेटवर्क तक पहुंच चुका है। संयंत्र से लोहा चोरी कर उसे बाजार में खपाने के इसी धंधे से यह साम्राज्य खड़ा हुआ। आज HTC के निदेशक इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू का नाम इसी पूरे नेटवर्क के केंद्र में है। यह कोई छोटा मोटा खेल नही 10 हजार करोड़ से ज्यादा लोहा चोरी का मामला है। जहाँ प्लांट से चोरी का लोहा निकलता रहा, यार्ड तक पहुँचा, फर्जी बिलिंग से लेकर ट्रांसपोर्ट और खरीद-बिक्री की कड़ियां खुलीं तो 1500 ट्रकों के नेटवर्क के साथ उन लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है, जिनके संरक्षण में यह कारोबार दशकों तक चलता रहा।

तत्कालीन से वर्तमान IPS तक, IAS और नेताओं की भूमिका भी जांच के घेरे में –
भिलाई के लोहा चोरी साम्राज्य की कहानी अब केवल ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं, वर्षों से इस नेटवर्क को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिलता रहा। यही वजह है कि कोई इतने बड़े साम्राज्य का मालिक बन गया, कोई नेता बन गया और कई ब्यूरोक्रेट्स लाल-पीले हो गए। अब इन सभी की कुंडली खंगालने की जरूरत है। वर्षों तक राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी होती रही, तो उस दौरान पदस्थ रहे पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी क्या थी? सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के बावजूद करोड़ों का माल बाहर कैसे निकलता रहा? किसके संरक्षण में यह नेटवर्क फलता-फूलता रहा और आर्थिक लेन-देन की परतें किन-किन लोगों तक पहुंचती रहीं?

कप्तानों को जांच की आड़ में छह महीने की मोहलत? महकमे में ‘सब्र’ का भी अपना खेल –
महकमे का एक और किस्सा सुनिए यहाँ पदस्थ कप्तान साहब इसी मामले की जांच का आड़ लेकर कहते है। “सर, अभी तो जांच चल रही है, 6 महीने की मोहलत और दे दीजिए 6 महीने आखिर ऐसा क्या गुल खिलेगा यह तो वक्त बताएगा। यही नही विधायक रिकेश सेन ने एक IPS अधिकारी पर 25 करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप भी लगाया है। जब एक विधायक सार्वजनिक रूप से ऐसे गंभीर आरोप लगाए तो महकमे की इंटेलिजेंस आखिर क्या कर रही थी? क्या संबंधित सूचनाएं जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचीं या पहुंचने के बाद भी कार्रवाई की फाइल दबकर रह गई? अगर सूचनाएं थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कहते हैं कि इस स्रोत का असर महकमे के इंटेलिजेंट लोगों तक भी जाता है। इसलिए यह सवाल है कि जब चोरी का नेटवर्क दशकों तक फलता-फूलता रहा, तो निगरानी करने वाले तंत्र की भूमिका की पड़ताल क्यों न हो?

साहब, कप्तान की कुर्सी पर बैठकर छह महीने की मोहलत मांगना आसान है, लेकिन राष्ट्रीय संपत्ति की रखवाली का हिसाब कौन देगा? CBI की जांच में अगर पुराने रिकॉर्ड, शिकायतें, खुफिया इनपुट और कार्रवाई की फाइलें खुलीं, तो पता चलेगा कि किसने समय रहते कदम उठाया और किसने आंखें मूंदे रखीं।

250 टन लोहा, 21 गिरफ्तारियां… अब बड़े नामों की बारी! –
दुर्ग पुलिस की कार्रवाई में करीब 250 टन लौह सामग्री बरामद हुई और करोड़ों रुपये के वाहन व मशीनरी जब्त किए गए। अब तक 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। रायपुर इस्पात कंपनी के मालिक और निदेशक तक पुलिस की कार्रवाई पहुंची तथा BSP के तीन कर्मचारियों को निलंबित भी किया गया है।

यानी चोरी का माल बाहर निकालने से लेकर उसे खरीदने और खपाने तक की कड़ियां सामने आई हैं। अब CBI की एंट्री के बाद क्या जांच सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रहेगी या पूरे नेटवर्क की आर्थिक और प्रशासनिक कुंडली खंगाली जाएगी? असली सवाल यही है कि माल उठाने वालों से लेकर पूरे खेल को चलाने वालों तक जांच पहुंचेगी या नहीं।

GST की दबिश से CBI तक, आर्थिक साम्राज्य की भी होगी पड़ताल –
इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू से जुड़ी हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी (HTC) के ठिकानों पर स्टेट GST विभाग पहले ही दबिश दे चुका है। दुर्ग GST टीम ने हथखोज स्थित कार्यालय और गोदाम के साथ बलौदाबाजार स्थित कंपनी के यार्ड में कारोबारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की थी। अब CBI की एंट्री के बाद 1500 ट्रकों के नेटवर्क, बिलिंग, भुगतान और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े कारोबार की परतें भी खुलेंगी। आखिर माल की खरीद-बिक्री का पैसा कहां गया, किन खातों में भुगतान हुआ और इस आर्थिक साम्राज्य के पीछे कौन-कौन शामिल था? GST रिकॉर्ड से लेकर बैंकिंग लेन-देन तक की पड़ताल में अब कई बड़े खुलासों पर निगाहें टिकी हैं।

40 साल का साम्राज्य ढहेगा या सिर्फ छोटे मोहरे पकड़े जाएंगे –
भिलाई स्टील प्लांट से पिछले चार दशकों में करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लोहा चोरी कर राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की लगातार मुहिम के बाद अब राज्य सरकार ने CBI जांच के लिए सहमति दे दी है। 250 टन लोहा बरामदगी, 21 गिरफ्तारियां और औद्योगिक इकाइयों तक पहुंची पुलिस कार्रवाई के बाद अब सबकी निगाहें जांच के अगले कदम पर हैं। सवाल यही है कि CBI लोहा चोरी के पूरे नेटवर्क और उसके संरक्षणकर्ताओं तक पहुंचेगी या सिर्फ छोटे मोहरे पकड़े जाएंगे? जिन अधिकारियों, कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं, उनके चेहरे और असलियत सामने आना बेहद जरूरी है।

भिलाई में 40 साल से चल रहे लोहा चोरी के साम्राज्य की कहानी अब नए मोड़ पर है। छोटू के दरबार से सत्ता के गलियारों तक उठ रहे सवालों का जवाब अब CBI की जांच से मिलने की उम्मीद है। और साहब, अगर जांच की फाइलें सचमुच खुल गईं, तो सिर्फ ट्रकों की कुंडली ही नहीं, कई कुर्सियों का हिसाब भी सामने आ सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *