पत्थरों में तीर्थकरों की गाथा, जंगलों में छिपा पर्यटन का खजाना, धनपुर से चमका जीपीएम, मिला सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड

 

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही – पत्थरों पर उकेरी गईं तीर्थंकरों की प्रतिमाएं, जंगल के बीच करीब 25 फीट ऊंची बेनीबाई की रहस्यमयी शिल्पाकृति, 12वीं सदी का शिव मंदिर, झरनों की कलकल और मैकल की पहाड़ियों का प्राकृतिक वैभव… गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही की पहचान सिर्फ हरियाली और खूबसूरत वादियों तक सीमित नहीं है। यहां इतिहास, आस्था, पुरातत्व और प्रकृति एक साथ सांस लेते हैं। इसी विरासत को पर्यटन की नई पहचान दिलाने की कोशिशों के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने जिले को ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया है। खास बात यह है कि इस उपलब्धि के केंद्र में धनपुर की वह प्राचीन धरोहर है, जिसके पत्थरों में सदियों पुरानी जैन परंपरा और शिल्पकला की कहानी दर्ज है। धनपुर पर केंद्रित विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन कर इस विरासत को देश-दुनिया के सामने लाने की पहल भी की गई है।

जहां पत्थर बोलते हैं इतिहास की भाषा –
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के धनपुर को कभी जैन धर्म का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता था। प्राचीन काल में यह क्षेत्र जैन धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण नगर और व्यापारिक मार्ग का हिस्सा था। यहां जैन धर्म के साथ शैव परंपरा से जुड़े पुरातात्विक अवशेष भी मिले हैं। ऋषभनाथ तालाब के समीप जैन तीर्थंकर की प्रतिमा और मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन मूर्तियां इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को सामने लाती हैं।

धनपुर की सबसे विशिष्ट पहचान गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर घने जंगल में स्थित बेनीबाई की विशाल शिल्पाकृति है। प्राकृतिक चट्टान पर उकेरी गई करीब 25 फीट ऊंची आकृति कायोत्सर्ग मुद्रा में जैन तीर्थंकर की प्रतिमा के रूप में पहचानी जाती है। स्थानीय मान्यताओं में इसे वनदेवी के रूप में भी पूजा जाता है। एक ही स्थल पर आस्था, प्राकृतिक शिल्प और पुरातात्विक विरासत का यह मेल धनपुर को विशिष्ट बनाता है।

धनपुर से जुड़ी जैन परंपरा में 16 तीर्थंकरों की गाथा और पत्थरों पर उकेरी गई प्रतिमाओं का उल्लेख इस धरोहर को और भी आकर्षक बनाता है। अब कॉफी टेबल बुक के जरिए इसी ऐतिहासिक और पुरासांस्कृतिक पहचान को तस्वीरों और विवरणों के साथ सामने लाने का प्रयास किया गया है।

धनपुर अकेला नहीं, पूरा जीपीएम है पर्यटन का खजाना –
जीपीएम की खूबी यह है कि यहां कुछ किलोमीटर के अंतराल पर पर्यटन का रंग बदल जाता है। कहीं प्राचीन मंदिर हैं, कहीं पहाड़ों से उतरते झरने, कहीं आदिवासी संस्कृति और कहीं जलाशयों के बीच सुकून तलाशते पर्यटक। जिला प्रशासन और जीपीएम इकोटूरिज्म की पर्यटन सूची में कई ऐसे स्थल शामिल हैं, जो जिले को धार्मिक, प्राकृतिक, ऐतिहासिक और इको-टूरिज्म के व्यापक सर्किट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं दिखाते हैं।

जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों की झलक –
जलेश्वर धाम – 12वीं सदी का कलचुरी कालीन शिव मंदिर, जो धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र है। माई का मड़वा – धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा स्थल। लक्ष्मण धारा और झोझा जलप्रपात प्राकृतिक सुंदरता और पिकनिक के लिए आकर्षण का केंद्र है। तो वही राजमेरगढ़ लगभग 1100 मीटर ऊंची पहाड़ी, जिसे जिले की छत भी कहा जाता है। गगनाई नेचर कैंप जलाशय, बोटिंग और सूर्यास्त के नजारों के साथ इको-टूरिज्म की संभावनाओं वाला स्थल बन चुका है साथ ही कबीर चबूतरा संत कबीर और गुरु नानक देव से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं के कारण धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखता है। शिवघाट मनौरा और सोनकुंड सोन नदी के तट और धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्राकृतिक पर्यटन स्थल।ठाड़पथरा और लमना में बैगा जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक परिवेश के लिए पहचाने जाने वाले क्षेत्र।

इन स्थलों की मौजूदगी बताती है कि जीपीएम के पास केवल एक पर्यटन स्थल को लोकप्रिय बनाने का अवसर नहीं, बल्कि धनपुर की ऐतिहासिक विरासत, जलेश्वर धाम की धार्मिक पहचान, राजमेरगढ़ की पहाड़ियों और झरनों को जोड़कर एक समग्र पर्यटन सर्किट विकसित करने की क्षमता भी है।

विश्व पर्यटन दिवस पर राजधानी में मिला सम्मान –
27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केटप्लेस’ कार्यक्रम में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले को ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड और छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन (सीजीटीटीए) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।

इस अवसर पर धनपुर की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत पर आधारित विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही कलेक्टर विजय दयाराम के. ने किया।

कॉफी टेबल बुक में धनपुर की पुरातात्विक विशेषताओं, ऐतिहासिक महत्व और पर्यटन संभावनाओं को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस पहल का उद्देश्य धनपुर को प्रदेश के साथ राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाना और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाना है।

सम्मान से आगे अब संरक्षण और सुविधाओं की बारी –
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में पर्यटन विकास के लिए प्रशासन द्वारा स्थानीय पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार, संरक्षण और पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जीपीएम इकोटूरिज्म के माध्यम से गगनाई नेचर कैंप में बोटिंग, स्थानीय युवाओं के लिए पर्यटन समितियों का गठन, ट्रेकिंग और आतिथ्य सत्कार का प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।

जिले को मिला यह सम्मान इन प्रयासों को नई पहचान देने वाला है। हालांकि, पर्यटन की वास्तविक सफलता तभी होगी, जब धनपुर जैसे पुरातात्विक स्थलों का वैज्ञानिक संरक्षण हो, पहुंच मार्ग और पर्यटक सुविधाएं बेहतर हों तथा स्थानीय लोगों को पर्यटन से रोजगार के अवसर मिलें। प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना ही जिले के दीर्घकालीन विकास का आधार बन सकता है।

धनपुर के पत्थरों में इतिहास सदियों से दर्ज है, अब उस इतिहास को दुनिया तक पहुंचाने की बारी है। सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड ने जीपीएम की विरासत को एक नया मंच दिया है। अब उम्मीद है कि धनपुर की प्राचीन प्रतिमाओं से लेकर राजमेरगढ़ की पहाड़ियों और झरनों तक, जीपीएम की पहचान पर्यटन के नक्शे पर और व्यापक होगी।

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