खबर का असर संचालक चौबे की जांच शुरू , मंत्रालय ने लिखा संचालक को पत्र ,

खबर का असर संचालक चौबे की जांच शुरू , मंत्रालय ने लिखा संचालक को पत्र ,
रायपुर : – सुरेंद्र चौबे द्वारा किस तरह अपने पद और अपने अधिकारो का दुरूपयोग कर व्यक्तिगत हित साधने के लिए शासन को आर्थिक छति के साथ न्यायालय के आदेशों की भी अवमानना की है . श्री चौबे का पूरा कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है इस पूरे मुद्दे को जनसंवाद ने प्रमुखता से उठाया . बीते दिनों हमने श्री चौबे जो वर्तमान में महिला बाल विकास विभाग के राज्य संसाधन केंद्र के संचालक के पद पर है उनके दस्तावेजी प्रमाण और पुख्ता जानकारी के बाद ही हमने खबरों का प्रकाशन किया था जिससे श्री चौबे आग बबूला होकर पर्सनल नंबर पर अभद्रता और धमकी देने लगे थे . और खुद को पाक साफ बताने का दावा कर रहे थे
खबर के बाद मंत्रालय ने लिखा पत्र : –
खबर प्रकाशन के एक सप्ताह के भीतर ही खबर की गंभीरता और संवेदनशीलता देखकर तत्काल कार्रवाही के निर्देश जारी कर दिए है जिसमे संचालक सुरेंद्र चौबे अपने शासकीय वाहन से दुर्ग स्थित अपने घर से रायपुर कार्यालय प्रतिदिन आना जाना करते थे जबकि उनका मुख्यालय रायपुर है फिर भी चौबे ने अपने पद नियमो को ताक में रखते हुए रायपुर न रुककर दुर्ग जिले से आनाजाना किया और HR हाउसिंग रेंट भी लेते रहते थे . इस मामले को जनसंवाद ने प्रमुखता से उठाने के बाद मंत्रालय ने संचालक को पत्र लिखकर जांच प्रतिवेदन की मांग की है . उक्त मामले की जांच में पहले भी तथ्यों को छुपाकर पदोन्नत किये जाने से संबंधित फाईल मंत्रालय से गायब की गई थी जिसकी भी शिकायत भी अब तक लंबित है .
सेवानिर्वित उपसंचालक हेमलता मिश्रा को भी क्लीन चिट
सुरेंद्र चौबे की अपने कनिष्ठ अधिकारियों और विभागीय छवि बेहद खराब रही है यही कारण रहा है कि अपनी ही कनिष्ठ अधिकारी जो सेवानिर्वित हो चुकी है उन्हें परेशान करने की नीयत से सुरेंद्र चौबे व्यक्तिगत दुश्मनी और प्रताड़ित कर रहे है
जबकि माननीय न्यायालय के आदेश को भी दरकिनार किया गया है . शिकायत में हेमलता मिश्रा बताती है कि उनके सेवानिर्वित हुए लगभग 10 दिनों से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी नियमतः देय किसी भी स्वत्व का भुगतान नही किया है . जबकि माननीय हाई कोर्ट ने निर्देशानुसार सेवानिर्वित हित लाभ का भुगतान उनकी सेवानिर्वित तिथि को ही किया जाना चाहिए था . छतीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन ) नियम 1976 के प्रावधानों के प्रावधानो का कठोरता से पालन कराए जाने का निर्देश है . इसके बाद भी श्री चौबे जाने की दुर्भावना से पीड़ित थे उक्त मामले को भी हमने गंभीरता से उठाया था मामले में मंत्रालय हेमलता मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है .
मामले में अब शासन को चाहिए कि मामले की जांच के पहले ऐसे अधिकारी को अन्यंत्र स्थानांतरित कर इनके पूरे कार्यकाल की जांच कराई जाए जिससे ऐसे अधिकारियों की वजह से शासन की छवी धूमिल न हो .










