पढ़ाई के दौरान बच्चों से आसान भाषा में हो संवाद: कालेले

00 महाराष्ट्र मंडल संत ज्ञानेश्वर स्कूल में कम्युनिकेशन स्किल पर हुई कार्यशाला
रायपुर। शिक्षक, राजनेता, अभिनेता, टीम लीडर की पहचान उनकी कम्युनिकेशन स्किल यानी संचार कौशल से होती है। आपके पास अच्छी कम्युनिकेशन स्किल नहीं है, तो आप अन्य लोगों से पीछे रह जाएंगे। आपकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी है, तो आप अपनी बातें बहुत ही सरलता से सामने वाले को बता सकते है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप सामने वाले से उसी स्किल से बात करें, जो उसे आसानी से समझ आए। शिक्षकों को बच्चों के साथ उस भाषा का अधिक प्रयोग करना चाहिए जो बच्चों को आसानी से समझ में आ सके। महाराष्ट्र मंडल के वरिष्ठ सभासद व रंगसाधक अनिल श्रीराम कालेले ने संत ज्ञानेश्वर स्कूल में कम्युनिकेशन स्किल्स पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
प्रा. अनिल कालेले ने स्कूल के नए शिक्षण सत्र के प्रारंभ से पहले शिक्षकों के लिए आयोजित कम्युनिकेशन स्किल्स प्रोग्राम में कहा कि विचार, भावना और ज्ञान का प्रदर्शन ही कम्युनिकेशन कहलाता है। आप किसी बात को कितने प्रभावी ढंग से कहते हैं, यह बेहद जरूरी होता है। आप जरूर इंग्लिम मीडियम स्कूल में पढ़ा रहे हैं, लेकिन बच्चों को समझाने के लिए आपको हिंदी के साथ लोकल बोली छत्तीसगढ़ी, या अन्य किसी छात्र को समझाने के लिए मराठी, बंगाली में भी संवाद करना पड़े, तो यह कहीं भी गलत नहीं है।
प्रा. कालेले ने कहा कि कम्युनिकेशन को हिंदी में संचार या सम्प्रेक्षण कहते हैं। कम्युनिकेशन का अर्थ होता है विचार, भावना और ज्ञान की सूचनाओं का आदान-प्रदान। कम्युनिकेशन स्किल्स इंसान के व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन को प्रभावी बनाने के लिए हमें पांच चीजों का ध्यान रखना चाहिए कब, कहां, कैसे, किससे और क्यों। कम्युनिकेशन स्किल के अन्य भाग भी है जैसे शब्द, वाक्य, भाषा, उच्चारण, व्यक्तित्व या पर्सनालिटी। उन्होंने पर्सनालिटी डेवलपमेंट में एनवायरमेंट एक्सपीरियंस व एजुकेशन के योगदान पर भी प्रकाश डाला।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *