छत्तीसगढ़ शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय में फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला उठा सदन में

रायपुर। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के प्रकरण की जांच का मामला उठाया। लोक स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन को बताया कि छत्तीसगढ़ शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के संबंध में कुल 4 शिकायते श्रीमती वर्षा गुर्देकर- सहायक प्राध्यापक, शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय रायपुर, श्रीमती वीणा डेविड-प्रदर्शक, शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय रायपुर, श्रीमती नीलम पॉल-सह प्राध्यापक शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय रायपुर एवं श्रीमती ममता नायक-सह प्राध्यापक, शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय राजनांदगाव) के विरूद्ध प्राप्त हुई। प्राप्त शिकायतों के आधार उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति एवं शासन द्वारा जाँच की कार्यवाही की गई। उनके खिलाफ जाँच समिति बनाई गई थी। छ.ग. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियम) अधिनियम व नियम 2013 के अंतर्गत श्रीमती नीलम पॉल- सह प्राध्यापक एवं श्रीमती ममता नायक-सह प्राध्यापक की जांच उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा की गई।
मंत्री जायसवाल ने बताया कि श्रीमती वर्षा गुर्देकर सहायक प्राध्यापक, एवं श्रीमती वीणा डेविड-प्रदर्शक के संबंध में प्रकरण उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के समक्ष प्रक्रियाधीन है। शासन में प्राप्त शिकायत पर उक्त सभी अधिकारियों के विरूद्ध जाँच विशेष सचिव छग0 शासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा की गई। उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा श्रीमती ममता नायक के संबंध में पारित निर्णय 25.11.2022 द्वारा महार, अनुसूचित जाति के जाति प्रमाण पत्र की वैधानिकता प्रमाणिक पायी गई एवं श्रीमती नीलम पाल के संबंध में पारित निर्णय 25.11.2022 द्वारा सतनामी (धर्म ईसाई), अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाण पत्र की वैधानिकता प्रमाणिक पायी गई। श्रीमती वर्षा गुर्देकर एवं श्रीमती वीणा डेविड के संबंध में जांच प्रक्रियाधीन है। शासन द्वारा नियुका जांच अधिकारी विशेष सचिव छ0ग0 शासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट 07.02.2022 में श्रीमती नीलम पॉल अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित हो कर अनुसूचित जनजाति, वर्ग से पदोत्रति का लाभ लिये जाने के संबंध में रिव्यू डीपीसी की अनुश्सा की गई। रिव्यू डीपीसी हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि श्रीमती मयता नायक के स्टॉफ नर्स के पद पर नियुक्ति के समय प्रस्तुत अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र असिस्टेंट सर्जन मेडिकल कॉलेज रायपुर द्वारा सत्यापित किया गया था। श्रीमती नीलम पाल के स्टाफ नर्स के पद पर नियुक्ति के समय प्रस्तुत अन्य पिछडा वर्ग जाति का प्रमाण डॉ एमजी कृष्णन एमबीबीएस, एमडी, मेडिकल कॉलेज जबलपुर द्वारा सत्यापित किया गया था। श्रीमती वर्षा गुर्देकर के स्टाफ नर्स के पद पर नियुक्ति के समय प्रस्तुत अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र न्यायालय नायब तहसीलदार दल्लीराजहरा द्वारा प्रमाणित कर जारी किया गया है। श्रीमती वीणा डेविड के स्टाफ नर्स के पद पर नियुक्ति के समय प्रस्तुत अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र नायब तहसीलदार दुर्ग द्वारा प्रमाणित कर जारी किया गया है। जाँच के दौरान प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र की प्रति संचालनालय में उपलब्ध नहीं है। पदोन्नति एवं शिक्षा के समय जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवृश्यकता नहीं होती, उक्त कार्यवाही नियुक्ति के समय दर्ज की गई जाति वर्ग के आधार पर की जाती है।
शिकायत के परिपेक्ष्य में श्रीमती वर्षा गुर्देकर व श्रीमती नीलम पॉल को वर्ष 2008 में स्टाफ नर्स से प्रदर्शक, वर्ष 2015 में प्रदर्शक से सहायक प्राध्यापक के पद पर पदोन्नति दी गई ई एवं श्रीमती नीलम पॉल को वर्ष 2023 में सहायक प्राध्यापक से सह प्राध्यापक के पद पर पदोन्नति दी गई। श्रीमती वीणा डेविड को वर्ष 2009 में स्टाफ नर्स से प्रदर्शक तथा वर्ष 2015 में प्रदर्शक से सहायक प्राध्यापक पद पर पदोन्नति दी गई। किन्तु वीणा डेविड द्वारा सहायक प्राध्यापक के पद पर पदोन्नति नहीं ली गई। श्रीमती ममता नायक को वर्ष 2009 में स्टाफ नर्स से प्रदर्शक, वर्ष 2015 में प्रदर्शक से सहायक प्राध्यापक एवं वर्ष 2023 में सहायक प्राध्यापक से सह प्राध्यापक के पद पर पदोन्नति दी गई। जाँच के दौरान पदोन्नति दिये जाने के संबंध में लेख है कि जी हां, जांच के दौरान पदोन्नति दी जा सकती है। इस हेतु सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक एफ सी 6- 2/94/3/एक, दिनांक 30 जून 1994 के कंडिका 02 (1) का 2 (1) अनुसार पदोन्नति दी जा सकती है।। (जिसके अनुसा 01-निलम्बित शासकीय सेवक 2-शासकीय सेवक जिन्हें आरोप पत्र जारी कर दिये गये है और जिनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित है, 3-शासकीय सेवक जिन्हें किसी आपाराधिक आरोप के आधार पर अभियोजन के लिये चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई हो तथा कार्यवाही लंबित हो. पदोन्नति हेतु पात्र नहीं होते) उक्त अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध सामान्य प्रशासन की उपरोक्त कंडिका लागू नहीं होने के कारण पदोत्रति दी गई।










