हरदीडीह एनीकट जांच पर नए सवाल, जांच दल को बिना सूचना परियोजना स्थल पहुंचे मुख्य अभियंता ग्राहम! क्या जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश?

हरदीडीह एनीकट जांच पर नए सवाल, जांच दल को बिना सूचना परियोजना स्थल पहुंचे मुख्य अभियंता ग्राहम! क्या जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश?

रायपुर – 38.13 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हरदीडीह एनीकट में तकनीकी अनियमितताओं और निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवालों के बीच अब जांच प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार, 6 जुलाई 2026 को शासन द्वारा मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। इसी बीच 17 जुलाई 2026 को जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता अलेक्जेंडर ग्राहम कथित रूप से हरदीडीह एनीकट का निरीक्षण करने पहुंचे।

आरोप है कि इस दौरान जांच समिति के अन्य सदस्यों को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस परियोजना की जांच चल रही है, वहां समिति के सभी सदस्यों की अनुपस्थिति में निरीक्षण का निर्णय किस आधार पर लिया गया?

बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान उस समय के कार्यपालन अभियंता सुरेश पांडेय भी मौजूद थे, जिनके कार्यकाल में इस परियोजना का निर्माण हुआ था और जिनकी भूमिका को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न भी उठ रहा है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल की जांच होनी है, उनके साथ स्थल निरीक्षण क्या जांच की निष्पक्षता की दृष्टि से उचित माना जा सकता है?

अन्य सदस्यों को सूचना क्यों नहीं?
सूत्रों के अनुसार, जांच समिति के अन्य सदस्यों को निरीक्षण की जानकारी नहीं दी गई। यदि यह तथ्य सही है तो सवाल उठता है कि क्या यह निरीक्षण समिति की सामूहिक प्रक्रिया का हिस्सा था या फिर व्यक्तिगत स्तर पर किया गया दौरा? यदि समिति गठित है तो क्या सभी सदस्यों की उपस्थिति और सहभागिता आवश्यक नहीं थी?

शाम पांच बजे ही निरीक्षण क्यों?
एक और महत्वपूर्ण सवाल निरीक्षण के समय को लेकर भी उठ रहा है। बताया जाता है कि टीम शाम लगभग 5 बजे परियोजना स्थल पहुंची, जबकि मौसम विभाग द्वारा अगले 48 घंटे तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया था। ऐसे समय में सीमित रोशनी और खराब मौसम की संभावना के बीच निरीक्षण करने के पीछे क्या तकनीकी या प्रशासनिक कारण थे? क्या विस्तृत तकनीकी परीक्षण के लिए यह उपयुक्त समय था?

क्या जांच की पारदर्शिता प्रभावित होगी?
हरदीडीह एनीकट पहले ही ड्राइंग-डिजाइन, डायफ्राम वॉल, फाउंडेशन, एप्रन, गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव को लेकर गंभीर सवालों के केंद्र में है। ऐसे में यदि जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े होने लगें तो पूरी जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। अब आवश्यकता इस बात की है कि जल संसाधन विभाग स्पष्ट करे कि क्या 17 जुलाई का निरीक्षण जांच समिति की आधिकारिक कार्रवाई का हिस्सा था? यदि हां, तो सभी सदस्यों को सूचना क्यों नहीं दी गई?

तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति किस उद्देश्य से सुनिश्चित की गई? शाम के समय और खराब मौसम की चेतावनी के बीच निरीक्षण करने का औचित्य क्या था? क्या निरीक्षण की कार्यवाही का पंचनामा, वीडियो रिकॉर्डिंग और तकनीकी प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाएगा?

हरदीडीह एनीकट अब केवल 38 करोड़ रुपये की एक क्षतिग्रस्त परियोजना का मामला नहीं रह गया है। अब सवाल यह भी है कि क्या इसकी जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से होगी, या फिर जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते रहेंगे?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *