ओपी चौधरी के विभाग का एक और विवादित फैसला! एसीबी-ईओडब्ल्यू प्रकरण, जीएडी के निर्देश, विवादित सेवा रिकॉर्ड और रिटायरमेंट के महज 8 दिन बाद NRDA में हरिओम की नई तैनाती –

ओपी चौधरी के विभाग का एक और विवादित फैसला! एसीबी-ईओडब्ल्यू प्रकरण, जीएडी के निर्देश, विवादित सेवा रिकॉर्ड और रिटायरमेंट के महज 8 दिन बाद NRDA में हरिओम की नई तैनाती –

रायपुर – पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व प्रमुख अभियंता हरिओम शर्मा का सरकारी सफर सेवानिवृत्ति के बाद भी चर्चा में है। 30 जून 2026 को सेवा से सेवानिवृत्त होने के महज आठ दिन बाद, 8 जुलाई को आवास एवं पर्यावरण विभाग ने उन्हें नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) में मुख्य अभियंता के रिक्त पद पर एक वर्ष के लिए संविदा नियुक्ति दे दी। यह नियुक्ति इसलिए सवालों के घेरे में है क्योंकि हरिओम शर्मा का पूरा सेवाकाल तदर्थ भर्ती, सेवा वैधता, एसीबी-ईओडब्ल्यू प्रकरण और कई प्रशासनिक विवादों से जुड़ा रहा है। ऐसे में जिन मामलों को लेकर वर्षों से शिकायतें, जांच और कानूनी प्रक्रियाएं चलती रहीं, क्या उनके अंतिम निष्कर्ष से पहले ही इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दोबारा सौंपना प्रशासनिक दृष्टि से उचित है?
1984 की तदर्थ भर्ती… जो चार दशक तक चलती रही –
दस्तावेज बताते हैं कि हरिओम शर्मा की नियुक्ति वर्ष 1984 में आरक्षित पद के विरुद्ध तदर्थ आधार पर की गई थी। नियुक्ति की मूल शर्त यह थी कि पात्र आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार उपलब्ध होते ही उनकी सेवा स्वतः समाप्त हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विभाग में नियमित नियुक्तियां होती रहीं, अधिकारी पदोन्नत होते रहे और हरिओम शर्मा भी लगातार पदोन्नति पाते हुए प्रमुख अभियंता तक पहुंच गए। विभागीय हलकों में वर्षों से यह सवाल उठता रहा कि यदि तदर्थ नियुक्ति अस्थायी थी तो वह स्थायी सेवा में कैसे बदल गई।
एक नहीं, चार-चार महत्वपूर्ण प्रभार –
सेवा के अंतिम वर्षों में हरिओम शर्मा केवल एक प्रमुख अभियंता नहीं थे। उनके पास प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), गुणवत्ता (Quality), सेतु (Bridge) और स्थापना (Establishment) जैसे कई महत्वपूर्ण प्रभार एक साथ रहे। इतने महत्वपूर्ण दायित्वों का एक ही अधिकारी के पास लंबे समय तक बने रहना भी चर्चा का विषय रहा। इतने पद और सेवानिवृत्त के बाद संविदा नियुक्ति से सवाल और गहरा गया है कि आखिर इनपर किसका वरदहस्त है।
एसीबी-ईओडब्ल्यू प्रकरण और अभियोजन स्वीकृति –
हरिओम शर्मा के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार दिसंबर 2024 में ईओडब्ल्यू ने शासन को अभियोजन स्वीकृति के लिए पत्र भेजा था। यानी जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई के लिए शासन की अनुमति चाहती थी। यहीं से यह मामला और संवेदनशील हो जाता है। क्योंकि एक ओर जांच और अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही थी, दूसरी ओर अधिकारी सेवा में बने रहे और अब सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद उन्हें संविदा नियुक्ति भी मिल गई।
जीएडी का परिपत्र क्या कहता है?
20 जनवरी 2017 को सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध एसीबी/ईओडब्ल्यू में अपराध दर्ज हो तो परिस्थितियों के अनुसार उसे वर्तमान पद से हटाकर अन्यत्र पदस्थ करने तथा आगे की आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जाए। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठ रहा है कि क्या संविदा नियुक्ति से पहले इन दिशा-निर्देशों और लंबित प्रकरण का परीक्षण किया गया?
30 जून को सेवानिवृत्ति 8 जुलाई को नया आदेश –
महज आठ दिनों के भीतर हरिओम शर्मा को एनआरडीए में मुख्य अभियंता के रिक्त पद पर एक वर्ष अथवा नियमित नियुक्ति होने तक संविदा पर नियुक्त कर दिया गया। यही निर्णय अब प्रशासनिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। और सवाल भी उठ रहा है कि क्या संविदा नियुक्ति से पहले एसीबी-ईओडब्ल्यू के लंबित प्रकरण की समीक्षा की गई? क्या सामान्य प्रशासन विभाग के 2017 के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया? क्या विभाग में कोई अन्य पात्र अधिकारी उपलब्ध नहीं था? क्या विधि विभाग या सामान्य प्रशासन विभाग से राय ली गई?
एसीबी-ईओडब्ल्यू प्रकरण, तदर्थ भर्ती, वर्षों पुराने विवाद और अब संविदा नियुक्ति को लेकर विभागीय हलकों में कथित लेनदेन तक की चर्चाएं हैं। इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन्हीं चर्चाओं ने इस नियुक्ति को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में सरकार के लिए आवश्यक है कि वह पूरी चयन प्रक्रिया और निर्णय के आधार को सार्वजनिक करे, ताकि उठ रहे सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब मिल सके।









