अब बैठकें बंद कमरों में नहीं, बादलों के ऊपर! पांचवीं मंजिल से बादलों तक… सत्ता के गलियारों में ‘एयर मीटिंग’ की नई परंपरा?

अब बैठकें बंद कमरों में नहीं, बादलों के ऊपर!
पांचवीं मंजिल से बादलों तक… सत्ता के गलियारों में ‘एयर मीटिंग’ की नई परंपरा?
रायपुर : – कभी सत्ता की सबसे चर्चित बैठकों का पता पांचवीं मंजिल से चलता था। कौन आया, कौन गया, किसने कितनी देर मुलाकात की और बाहर निकलते वक्त चेहरे पर मुस्कान थी या मायूसी यही नौकरशाही और राजनीति के गलियारों की सबसे बड़ी चर्चा हुआ करती थी। उन बैठकों की खबरें कई बार बाहर भी निकल जाती थीं और फिर पूरे मंत्रालय में कानाफूसी का दौर शुरू हो जाता था।
बताया जाता है कि शायद इसी वजह से अब बैठकों का तरीका भी बदल गया है। बंद कमरों की जगह अब आसमान को चुना जा रहा है। सत्ता के गलियारों में इन दिनों यही चर्चा है कि अब महत्वपूर्ण मुलाकातें जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में होने लगी हैं।
आज सुबह भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सुबह 8 बजकर 55 मिनट की दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में मंजिल वाले साहब और दाऊ जी एक साथ रवाना हुए। दोनों का एक ही फ्लाइट में होना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया। एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों ने जैसे ही दोनों को साथ देखा, अटकलों का बाजार गर्म हो गया।
अब सवाल यह नहीं कि दोनों दिल्ली गए। सवाल यह है कि दिल्ली क्यों गए? क्या यह महज संयोग था? क्या पहले से तय कार्यक्रम था? या फिर राजधानी की इस उड़ान में कोई ऐसी चर्चा होने वाली है, जो जमीन पर करना मुनासिब नहीं समझा गया?
सत्ता के गलियारों में तो अब मजाक भी शुरू हो गया है। लोग कह रहे हैं कि पहले बैठकों का पता पांचवीं मंजिल से चलता था, अब फ्लाइट नंबर देखकर अंदाजा लगाना पड़ेगा कि आज किस मुद्दे पर मंथन होने वाला है।
वैसे दिल्ली जाना कोई असामान्य बात नहीं है। अधिकारी और नेता रोज आते-जाते रहते हैं। लेकिन जब दो ऐसे चेहरे एक साथ एक ही उड़ान में दिख जाएं, जिनकी राजनीतिक और प्रशासनिक सक्रियता पर हमेशा नजर रहती है, तो चर्चा होना भी स्वाभाविक है।
दिलचस्प यह भी है कि इस यात्रा को लेकर किसी तरह का आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है। ऐसे में सत्ता के जानकार अपने-अपने हिसाब से समीकरण जोड़ रहे हैं। कोई इसे सामान्य दौरा बता रहा है, तो कोई कह रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े फैसलों की भूमिका तैयार हो रही है।
राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि तस्वीरें और यात्राएं कभी बेवजह नहीं होतीं। कई बार एक साथ दिख जाना भी बड़ा संदेश छोड़ जाता है। इसलिए इस उड़ान ने भी कई सवाल छोड़ दिए हैं।
फिलहाल इतना तय है कि पहले बैठकों की सुर्खियां मंजिलों से बनती थीं, अब उड़ानों से बन रही हैं। दिल्ली पहुंचने के बाद क्या खिचड़ी पकेगी, क्या कोई नया राजनीतिक या प्रशासनिक समीकरण निकलेगा, या यह सिर्फ एक सामान्य यात्रा साबित होगी इसका जवाब आने वाले दिनों में मिल जाएगा।
बहरहाल रायपुर से लेकर दिल्ली तक सिर्फ एक ही चर्चा है बैठक अब कमरे में नहीं, बादलों के ऊपर हो रही है।









