साड़ी खरीदी का ठेका मॉडल खत्म, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगी सीधे राशि

साड़ी खरीदी का ठेका मॉडल खत्म, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगी सीधे राशि
रायपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी खरीदी को लेकर चल रही बहस के बीच महिला एवं बाल विकास विभाग ने व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब यूनिफॉर्म साड़ी की खरीदी संचालनालय स्तर से नहीं होगी। इसके बजाय निर्धारित राशि सीधे कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
विभाग के इस फैसले के बाद वर्षों से चली आ रही केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। नई व्यवस्था में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं स्वयं अपनी साड़ी खरीद सकेंगी। विभाग केवल निर्धारित डिजाइन उपलब्ध कराएगा, जबकि कपड़े और खरीदी का चयन स्थानीय स्तर पर होगा।
दरअसल हाल के दिनों में साड़ी खरीदी को लेकर सवाल उठे थे। खरीदी प्रक्रिया, गुणवत्ता और पसंद को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा थी। इसके बाद विभाग ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि खरीदी का अधिकार सीधे हितग्राहियों को दिया जाना चाहिए।
नई व्यवस्था को विभाग के भीतर विकेंद्रीकरण की दिशा में बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है। इससे एक ओर केंद्रीकृत खरीदी की प्रक्रिया समाप्त होगी तो दूसरी ओर कार्यकर्ताओं को अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार साड़ी चुनने का अधिकार मिलेगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक विवादों की गुंजाइश भी कम होगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए प्रति यूनिफॉर्म 500 रुपये तक की राशि निर्धारित है। अब यही राशि सीधे उनके खातों में अंतरित की जाएगी। इसके बाद वे स्थानीय बाजार से निर्धारित डिजाइन के अनुरूप साड़ी खरीद सकेंगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग में इस फैसले को केवल साड़ी खरीदी से जुड़ा बदलाव नहीं माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसे ऐसी पहल के रूप में देखा जा रहा है जिसमें निर्णय प्रक्रिया का केंद्र विभाग से हटकर सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। इससे उन हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है जो अब तक केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था पर निर्भर थीं।










