वक्ताओं ने कहा-डा. अम्बेडकर चाहते थे सम्राट अशोक के बौद्धमय राज्य जैसा स्वतंत्र भारत

00 बुद्ध भूमि कोसा नगर में मनाई गई सम्राट अशोक जयंती,दानदाताओं का हुआ सम्मान
भिलाई। बुद्ध भूमि परिसर में महान सम्राट अशोक की प्रतिमा के पास चक्रवर्ती देवानांप्रिय सम्राट अशोक महान की जयंती शनिवार की शाम को मनाई गई। बौद्ध कल्याण समिति के संस्थापक सदस्य नेकराम रामटेके ने कार्यक्रम का संचालन किया। सर्वप्रथम सम्राट अशोक सहित अन्य महामानवों की प्रतिमा पर पुष्प माला अर्पित कर मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाकर सामूहिक त्रिशरण पंचशील ग्रहण किया गया।बौद्ध कल्याण समिति को दान करने वाले परिवार वर्तिका वासेकर ,विनोद वासेकर, शीतल वासेकर, कुंदा धवले, शारदा धवले, स्नेह लता रंगारी,मधु मेश्राम ,शीला वासेकर ,दिनेश मेश्राम तथा नासिक से आई उपासिका का सम्मान पुष्प गुच्छ भेंट कर किया। बौद्ध कल्याण समिति के पदाधिकारी ज्ञानचंद टेम्भुरनीकर, रंजू खोबरागड़े और प्रितेश पाटील तथा भिमाई महिला मंडल की अध्यक्षा दानशीला रामटेके तथा सदस्य गीतेश्वरी रामटेके ,मंजूषा मेश्राम ,रानू कोल्हटकर ,मीनाक्षी मून ,पूर्णिमा मेश्राम और नीलम कोलहटकर ने दानदाता परिवार को साधुवाद दिया और उनके सुखमय जीवन के लिए मंगल कामनाएं की।
इस अवसर पर सुगत मेश्राम, डॉ अरविंद चौधरी अनिल जोग,विजय बोरकर, डॉ उदय धाबर्डे और अशोक धवले ने संबोधित किया। सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धम्म के प्रचार प्रसार के योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि सम्राट अशोक के बनाये अशोक चक्र को तथा चार सिंह के अशोक स्तंभ को बाबासाहेब ने राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय ध्वज तथा राष्ट्रीय मुद्रा में प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाया था। डॉ बाबासाहेब आंबेडकर भी भारत को सम्राट अशोक के राज्य जैसा बौद्धमय बनाना चाहते थे। इस अवसर पर सुशील रामटेके नितेश सोनटके,शैलेंद्र मेश्राम, कमल मेश्राम सहित युवा समिति के पदाधिकारी तथा अन्य सम्मानित अतिथिगण वीके डोंगरे, इंद्र कुमार रामटेके ,कुलदीप बाम्बोलकर तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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