पाँचवीं मंज़िल से NTA तक अब खुलकर उठने लगे वही सवाल, जहाँ जहाँ सुबोध वहाँ वहाँ कुबोध अब ऊर्जा विभाग की बारी –

पाँचवीं मंज़िल से NTA तक अब खुलकर उठने लगे वही सवाल, जहाँ जहाँ सुबोध वहाँ वहाँ कुबोध अब ऊर्जा विभाग की बारी –
रायपुर : – कल तक जिन सवालों को राजनीतिक आरोप कहकर टाल दिया जाता था, अब वही मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में दिखाई देने लगे हैं। NEET-2024 पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष ने खुलकर पूर्व NTA महानिदेशक और वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार में प्रमुख सचिव के पद पर पदस्थ IAS सुबोध कुमार सिंह पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक अब यह चर्चा तेज हो गई है कि जब देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठे, लाखों छात्रों का भविष्य विवादों में घिरा, उस समय NTA की कमान किसके हाथ में थी और बाद में उन्हें किस भूमिका में स्थापित किया गया। विपक्ष के प्रमुख नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि वर्तमान में वही अधिकारी विष्णुदेव साय सरकार में प्रभावशाली जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
सत्ता के गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि पाँचवीं मंज़िल की कार्यशैली सिर्फ प्रशासनिक फैसलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई बड़े विभागों में केंद्रीकृत नियंत्रण और विवादित निर्णयों की छाया भी लगातार बनी रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NEET विवाद के बाद जिस तरह केंद्र सरकार ने तत्कालीन परिस्थितियों को संभालने की कोशिश की, उसने कई नए सवालों को जन्म दिया। अब जब विपक्ष इस मुद्दे को सीधे जोड़कर पेश कर रहा है, तब राज्य की नौकरशाही और ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी निगाहें टिकने लगी हैं।
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक हलकों में यह तंज भी सुनाई देने लगा है कि जहाँ-जहाँ सुबोध, वहाँ-वहाँ कुबोध। यह कटाक्ष केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उन विवादों और निर्णयों की ओर इशारा माना जा रहा है, जिन पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
ऊर्जा विभाग में उनकी वर्तमान भूमिका को लेकर भी भीतरखाने में कई तरह की चर्चाएँ हैं। विपक्षी दल और कुछ प्रशासनिक जानकार मानते हैं कि अगर विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत नहीं हुई, तो आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र भी बड़े विवादों का केंद्र बन सकता है।
हालांकि सरकार की ओर से अब तक इस पूरे राजनीतिक हमले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह राष्ट्रीय स्तर पर NEET और NTA को लेकर बहस दोबारा तेज हुई है, उससे इतना तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पाँचवीं मंज़िल से जुड़े कई पुराने फैसले और चेहरे फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकते हैं।










