दिव्यांग और महिला शिक्षक की काउंसलिंग में 18 स्कूलों के नाम गायब , कलेक्टर ने दिया जांच का आदेश ,

दिव्यांग और महिला शिक्षक की काउंसलिंग में 18 स्कूलों के नाम छिपाए गए, कलेक्टर ने एडिशनल कलेक्टर को दिया जांच का आदेश

15 तारीख और 16 तारीख को चस्पा किए गए सूची की संख्या से मिलान करने से हुआ खुलासा

सेमरपारा बंधी, बांधामुड़ा गौरेला, चौबेपारा पेण्ड्रा स्कूलों के नाम सूची में नहीं फिर भी हो गई एचएम की पोस्टिंग

गौरेला – पेण्ड्रा – मरवाही : – प्राइमरी स्कूलों में एचएम पद पर काउंसलिंग से पोस्टिंग के मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा अनियमितता बरती जा रही है . अपने चहेतों को उपकृत करने के लिए 15 नवम्बर की काउंसलिंग में 18 स्कूलों के नाम सार्वजनिक नहीं करके किए गए थे , जिसका खुलासा 16 नवम्बर को चस्पा किए गए सूची की संख्या से मिलान करने से हुआ . शासन के नियमानुसार काउंसलिंग नहीं होने से पूरी प्रक्रिया दूषित हो गई है , जिससे दिव्यांग और महिला शिक्षक काउंसलिंग में उन स्थानों का चयन करने से वंचित रह गए . इस मामले को जिला कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने गंभीरता से लेते हुए एडिशनल कलेक्टर को जांच करने का आदेश दिया है . इस जांच में 15 तारीख को जारी किए गए रिक्त स्कूलों की सूची के साथ पोस्टिंग पाने वाले शिक्षकों के स्कूलों के नाम का मिलान किया जायेगा तो काउंसलिंग में की गई गड़बड़ी तत्काल पकड़ में आ जाएगी .

शासन के निर्देशों की अवहेलना करते हुए जिला शिक्षा विभाग ने एचएम पद की पोस्टिंग के लिए 15 नवम्बर को आयोजित काउंसलिंग में गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है। इस दिन 160 दिव्यांग और महिला शिक्षकों को काउंसलिंग में सुबह 11 बजे बुलाया गया और 450 रिक्त स्कूलों की सूची को चस्पा किया गया था।

इसमें सबसे गंभीर बात यह है कि इन 450 स्कूलों की सूची में प्राइमरी स्कूल सेमरपारा बंधी, बांधामुड़ा गौरेला, चौबेपारा पेण्ड्रा इत्यादि स्कूलों के नाम नहीं थे लेकिन फिर भी इन स्कूलों में एचएम की पोस्टिंग उसी दिन कर दी गई। इसी तरह उस सूची में बंशीताल सहित 18 स्कूलों के नाम भी गायब थे। 15 नवम्बर को 157 शिक्षकों द्वारा स्कूल चयन करने के बाद 293 स्कूल 16 तारीख के काउंसलिंग में होने चाहिए थे लेकिन 311 रिक्त स्कूलों के नाम चस्पा किए गए जिससे खुलासा हुआ कि 15 तारीख की काउंसलिंग में 18 स्कूलों के नाम छिपाए गए थे जिससे कि पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया दूषित हो गई है।

वहीं जब यह मामला संज्ञान में आने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया की जांच करने के आदेश एडिशनल कलेक्टर को दिए हैं। इस जांच में 15 तारीख को सार्वजनिक किए गए रिक्त स्कूलों की सूची के साथ पोस्टिंग पाने वाले शिक्षकों के स्कूलों के नाम का मिलान किया जायेगा तो दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जाएगा।

वहीं इस मामले में डीईओ एनके चंद्रा का कहना है कि 13 पद परिभ्रमण सूची में रखा गया है। डीईओ के बयान पर सवाल यह उठता है कि यदि 13 पद परिभ्रमण सूची में रखा था तो 15 तारीख की काउंसलिंग में स्कूलों का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया ? 16 तारीख की काउंसलिंग में सार्वजनिक क्यों किया गया और वो 13 स्कूलों की संख्या 18 कैसे हो गई। शिक्षा विभाग की इस मनमानी से दिव्यांग और महिला शिक्षक काउंसलिंग में उन स्थानों का चयन करने से वंचित रह गए।

वहीं इस मामले में बिलासपुर संभाग के संयुक्त संचालक आरएन हीराधर ने कहा कि स्थानीय शिकायतों को कलेक्टर के संज्ञान में लाना चाहिए, वो ही इसका निराकरण करेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें भी लिखित में शिकायत दिया जा सकता है।

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