विकल्पहीन ग्रामीणों की मजबूरी बनी माल-वाहक पिकअप की सवारी

जगदलपुर। बस्तर संभाग में एक वर्ष में माल-वाहक पिकअप से ग्रामीण सवारियों के ढोने के लिए उपयोग करने के दौरान 50 से ज्यादा यात्रियों से भरी पिकअप दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं, जिसमें कई लोगों की जान चली गई, वहीं 100 से अधिक ग्रामीण दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। वहीं पिछले 20 दिन में कुआकोंडा, कटेकल्याण क्षेत्र में 3 पिकअप दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं, जिसमें 52 घायल और 2 की मौत हो गई है। बावजूद इसके माल-वाहक पिकअप से ग्रामीण सवारियों के परिवहन का सिलसिला बदस्तूर जारी है, विकल्पहीन ग्रामीणों को सस्ते एवं सुलभ परिवहन की मजबूरी कई बार अपनी जान गवांकर या अपंगता का शिकार होकर चुकाना पड़ता है।
मिली जानकारी के अनुसार पूरे बस्तर संभाग में लगभग 10-12 हजार से अधिक मालवाहक पिकअप वाहन मौजूद है, जिसका उपयोग समय-समय पर सवारी ढोने का कार्य किया जाता है। विदित हो कि पिकअप में ड्राइवर और 1 अन्य के बैठने की अनुमति होती है, वाहन दुर्घटना ग्रस्त होने पर 2 लोगों को ही इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देती है, जिसके कारण पिकअप वाहन में सवार ग्रामीणों के घायलों एवं मृतक के परिजनों को कोई राहत भी नही मिलता है। यह भी विदित हो कि बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों में यात्री वाहनों की कमी एवं अपने लाभ के लिए माल-वाहक पिकअप वाहन से सवारियों को ले जाने का खामियाजा ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। पिकअप वाहन में आसानी से 30 से 35 लोग सवार हो जाते हैं, पर हाट-बाजार एवं नेताओं के आगमन पर पिकअप में 50 से 60 लोगों को बिठाया जाता है।

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