यदि मैं मुरिया दरबार में शामिल नही हो पाता तो, इसके लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में नही जान पाता – अमित शाह

जगदलपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मां दंतेश्वरी की पूजा अर्चना के बाद बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार की रस्म में शामिल हुए। मुरिया दरबार, बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्म है, इस रस्म में रियासत काल में बस्तर के राजा दरबार लगाकर अपनी जनता की समस्याओं को सुनकर मौके पर ही उनका निपटारा किया जाता था। वर्ष 1874 से बस्तर शहरा में इस परंपरा का निवार्ह किया जा रहा है, जिसे आज भी प्रतिकात्मक तौर पर निभाया जाता है। जब बस्तर में राजशाही थी, तब मुरिया दरबार में राजा द्वारा निर्धारित 80 परगना के मांझी ही उन्हें अपने क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराते थे, लेकिन अब प्रजातांत्रित व्यवस्था मे जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को सुनते हैं। आज खास बात यह रही कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार की रस्म में शामिल होकर जनता की समस्याएं सुनीं।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह मेरे लिए गौरव की बात है कि मुरिया दरबार में उपस्थित होने का निमंत्रण मिला। उन्होने कहा कि आज यदि मैं बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार की रस्म में नही आया होता तो एतिहासिक मुरिया दरबार के लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में नही जान पाता। उन्होंने कहा कि विश्वास दिलाता हूं कि 2031 तक बस्तर के हर गांव में 24 घण्टे बिजली रहेगी, 2031 तक सभी गांव में स्कूल होंगे, 2031 तक पीएससी, सीएससी केंद्र खोलने का काम होगा, हर व्यक्ति को राशन कार्ड, आधार कार्ड, 5 किलो मुफ्त राशन, सभी के बैंक खाते खुलेंगे, जिसमें महतारी वंदन का पैसा डलेगा।

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