नौकरी लगाने के नाम पर एक परिवार से 9 लाख 50 हजार रुपए की हुई ठगी, एफआईआर दर्ज

दंतेवाड़ा। जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के दंतेवाड़ा निवासी युवक इंद्रजीत सिंह ठाकुर ने पुलिस को बताया कि हॉस्टल वार्डन और महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक के पद पर नौकरी लगाने के नाम पर एक परिवार से 9 लाख 50 हजार रुपए की ठगी हुई है। ठग ने अलग-अलग खाते में किस्तों में पैसे डलवाए, जब नौकरी नहीं लगी तो 9 साल बाद ठगी के शिकार युवक ने दंतेवाड़ा सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दंतेवाड़ा के रहने वाले युवक इंद्रजीत सिंह ठाकुर ने पुलिस को बताया कि उसकी मां दंतेवाड़ा के महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक के पद पर पदस्थ है। उन्हें वर्ष 2016 में बताया गया कि पर्यवेक्षक के पद पर भर्ती निकली है, जिसका फॉर्म भी भरा जा चुका है। लेकिन रायपुर में एक जिला अधिकारी अशोक पांडेय हैं, जो सीधे नौकरी लगा देंगे। पहले डेढ़ लाख रुपए डलवाए फिर बताया गया कि नौकरी लगाने के लिए वसीम खान के खाते में पैसे डलवाने होंगे। जिसके बाद मां ने बहन की भर्ती के लिए वसीम खान के खाते में 1 लाख 50 हजार रुपए डलवा दिए। वसीम ने उसे बताया कि इन पैसों को अशोक पांडेय के बताए खाते में ट्रांसफर किया गया है। जिसके बाद इंद्रजीत ने जब अशोक पांडेय से बातचीत की तो उसने गुमहार कर दिया। उससे कहने लगा तुम तो मेरे अपने लोग फिर उसने बताया कि हॉस्टल वार्डन के पद पर भर्ती निकली है। तुम्हारी और तुम्हारे छोटे भाई की भी नौकरी लगवा दूंगा। उसने फिर से 8 लाख रुपए मांगे। वहीं उसने क्रांति कुमार, नीलबती, कुंदन सिंह और एक अन्य का खाता नंबर दिया। जिसमें साल 2016 से 2019 तक कुल 8 लाख रुपए एटीएम ट्रांजेक्शन के माध्यम से डाले। जब पूछा गया कि नौकरी कब तक लगेगी तो बताया गया कि जल्द जी लिस्ट जारी होगी। वहीं जब लिस्ट जारी हुई तो उसके बाद उसमें नाम नहीं था। युवक और उसके भाई का नाम नहीं मिला तो उसने फिर से पूछा कि आखिर नाम क्यों नहीं है? तब अशोक पांडेय ने दोबारा गुमराह किया और कहा कि अभी वेटिंग लिस्ट आनी बाकी है। यदि नाम नहीं आया तो पैसे लौटा दूंगा। जिसके बाद नौकरी नहीं लगी, और उसने पैसे भी नहीं लौटाए, इसके बाद एफआईआर दर्ज करवाया गया।

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