सत्ता-संगठन की बैठक के बाद साय का अचानक दिल्ली दौरा, सुबह-सुबह वापसी ने बढ़ाया सियासी पारा… बड़े बदलाव की आहट!

रायपुर – छत्तीसगढ़ भाजपा में इन दिनों अंदरखाने बड़ी हलचल है। 25-26 अगस्त की दो दिवसीय सत्ता-संगठन समन्वय बैठक में मंत्रियों, जिलों और संगठन का फीडबैक लेने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अचानक दिल्ली जाना और अगले ही दिन सुबह रायपुर लौट आना सियासी गलियारों में कई सवाल छोड़ गया है। बैठक में कार्यकर्ताओं की नाराजगी, अधिकारियों की सुनवाई, प्रभारी मंत्रियों की सक्रियता और संगठन की स्थिति पर खुलकर फीडबैक लिया गया था।
दिल्ली में मुख्यमंत्री की भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात हुई। वापसी पर साय ने प्रदेश प्रभारी को लेकर कहा कि “यहां तो कोई न कोई संगठन प्रभारी रहेगा ही।” इसके बाद माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ भाजपा को जल्द नया प्रभारी मिल सकता है।
प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर भी नजर –
प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं। संगठन में बदलाव हुआ तो संभावित चेहरों में संतोष पांडेय, शिवरतन शर्मा और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू जैसे नामों की चर्चा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, इनमें से किसी नाम पर अभी आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। तोखन साहू का नाम इसलिए भी दिलचस्प है कि वे बिलासपुर से लोकसभा सांसद और केंद्र में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।
मंत्रियों पर गिर सकती है गाज!
सबसे बड़ा सवाल साय कैबिनेट को लेकर है। करीब ढाई साल के शासन के बाद अब सरकार और मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड संगठन के सामने है। बैठक में प्रभारी मंत्रियों से उनके जिलों में बैठक, योजनाओं की स्थिति, जनता की शिकायतें और कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल का हिसाब लिया गया। कई जिलों से कार्यकर्ताओं द्वारा मंत्रियों और अधिकारियों को लेकर नाराजगी की बात भी सामने आई है। यही वजह है कि सियासी चर्चा तेज है कि कमजोर परफॉर्मेंस वाले कुछ मंत्रियों पर गाज गिर सकती है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।
2028 की तैयारी अभी से –
भाजपा ने 2028 को लेकर भी कमर कसनी शुरू कर दी है। खासकर पिछली विधानसभा में हारी सीटों को मजबूत करने, संगठन को बूथ तक सक्रिय करने और सत्ता-संगठन के बीच तालमेल पर फोकस है। यानी ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड सिर्फ आज का हिसाब नहीं, बल्कि 2028 की चुनावी परीक्षा की तैयारी भी है।
दिल्ली दौरा छोटा था, लेकिन सवाल बड़े छोड़ गया है क्या छत्तीसगढ़ भाजपा में जल्द संगठन का चेहरा बदलेगा? क्या नए प्रदेश प्रभारी के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी बदलेगा? और क्या ढाई साल के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर साय मंत्रिमंडल में कुछ चेहरों की छुट्टी होगी?
फिलहाल फैसले दिल्ली में होने हैं, लेकिन रायपुर में बदलाव की आहट साफ सुनाई देने लगी है।










