राज्य संसाधन केंद्र के संचालक पर आरोपो की लंबी फेहरिश्त , न जांच न कार्रवाही आखिर किसकी शह में चल रहा बचाने का खेल

राज्य संसाधन केंद्र के संचालक पर आरोपो की लंबी फेहरिश्त , न जांच न कार्रवाही आखिर किसकी शह में चल रहा बचाने का खेल
रायपुर : – महिला बाल विकास विभाग के राज्य संसाधन केंद्र के संचालक सुरेंद्र चौबे जिनपर तरह तरह के आरोपो की लंबी फेहरिश्त है इनपर पहले भी आँगन बॉडी कार्यकर्ताओ को बंटने वाले 18536 मोबाइल खरीदी बड़े गफलत में शामिल होने का आरोप लग चुका है
जिस मामले में उच्च स्तरीय जांच में सभी मोबाइल सही पाए गए थे जिसमें तत्कालीन संयुक्त संचालक सुरेंद्र चौबे पर अनाधिकृत लैब से जांच कराए जाने का दोष सिद्ध पाया गया था . मगर आज पर्यन्त तक कार्रवाही न होने से इस अधिकारी के हौसले बुलंद है
बता दे कि चौबे पर ऐसे कई आरोप है जिनपर न जांच की गई न ही कार्रवाही की गई इनके द्वारा स्वहित में शासकीय वाहन का दुरुपयोग कर लोकधन/शासकीय राजकोष की छति पहुँचाई गई है . मगर यह मामला भी फाइलों में धूल खा रही है .
चौबे के हितमित्र आरजे कुशवाहा की भूमिका संदिग्ध
सुरेन्द्र कुमार चौबे संचालक एस.आर सी. वर्ष 2006 से रायपुर में पदस्थ कार्यरत रहे हैं इनके द्वारा इस अवधि में रिसाली जिला दुर्ग (छ.ग) में स्थित स्वयं के आवास से नियमित रूप से आना जाना किया जा रहा है, तथा रायपुर में आवास बनाए बगैर गृह भाड़ा भत्ता भी नियमित रूप से लिया जा रहा है, जबकि शासकीय नियमों के आलोक में इस प्रकार का दूषित आचरण वर्जित है इस संबंध में शिकायतकर्ता द्वारा माह मई वर्ष 2023 में शिकायत आवेदन छत्तीसगढ़ शासन के सक्षम प्राधिकारियों को दिया किंतु बड़े खेद का विषय है कि विभाग में प्रचलित रूग्ण परंपरा के अनुसार शिकायत के संबंध में अभिमत प्राप्त करने हेतु शासन द्वारा दिनांक 21.06.2023 को पत्र लिखा गया , किंतु संचालनालय स्तर पर इनके हितमित्र अधिकारियों द्वारा आज दिनांक ‘तक लंबित रखा गया है जबकि संचालक के आदेश कमांक 6312 दिनांक 27.09.2023 द्वारा जांच समिति का गठन किया गया है, शासन द्वारा संचालक से मात्र अभिमत मांगा गया था किंतु शिकायत की कार्रवाही में अवरोध उत्पन्न करने के उद्देश्य से चौबे के हितमित्र आर.जे.कुशवाहा द्वारा यह कार्यवाही तात्कालीन संचालक से करवाई गई है, उल्लेखनीय है कि शासन स्तर से इस संबंध में कई स्मरण पत्र भेजे गये हैं, किंतु जांच / कार्यवाही अभी भी लंबित है क्योंकि शासन की मंशानुसार शुचिता व पारदर्शिता के अनुरूप किसी भी प्रकार की कोई सूचना आज दिनांक तक प्राप्त नहीं दी गई है .
नियमो की उड़ाई जा रही धज्जियां
सवाल यह है कि एस.आर.सी. रायपुर कार्यालय हेतु शासन द्वारा वाहन दिये जाने हेतु शासन द्वारा न तो इन्हें स्वीकृति दी गयी न ही शासकीय वाहन स्टॉफ कार के रूप में दिया गया था ,मिली जानकारी अनुसार संचालक को व्यक्तिगत रूप से दिया गया वाहन कम करने हेतु शासन द्वारा वित्तीय स्वीकृति तक नही दी गई , क्रय हेतु राशि का आबंटन शासन द्वारा स्वीकृति नहीं दी गई तो संचालनालय द्वारा एस. आर.सी. को वाहन किन नियम निर्देशों के तहत किस कार्यालय हेतु क्रय वाहन को आबंटित किया गया , वाहन का उपयोग किये जाने के संबंध में क्या निर्देश दिये गये। यदि चौबे को व्यक्तिगत रूप से वाहन आबंटित किया गया तो किसके एवज में चौबे द्वारा शासन और वित्त के निर्देशानुसार कब कब कितनी कितनी राशि माहवार वसूली गई यह जानना बेहद जरूरी है क्या श्री चौबे के लिए सारे नियम कानून शिथिल कर चौबे को व्यकिगत लाभ पहुँचाने की मंशा से नियमो की धज्जियां उड़ाई जा रही थी . यह सूक्ष्म जांच का विषय है .
चौबे के लिए अलग से नियम
17 अप्रेल 2001 के लेख और नियमो में स्पष्ट है कि स्वयं के विकल्प पर भिलाई में निवास करने वाले अधिकारियों को किसी प्रकार की सुविधाएं अथवा छूट उपलब्ध नहीं होंगी . आदेश में स्पष्ट निर्देश होने के बाद भी सुरेन्द्र कुमार चौबे, शासकीय वाहन सुविधा, मकान भाड़ा इत्यादि देय सुविधाएं किन नियम निर्देशो व अधिसूचनाओं के आधार पर प्राप्त कर रहे है अनुशंसा पत्र में इस तथ्य का उल्लेख किन कारणों से नहीं किया गया इससे यह सिद्ध होता है कि श्री चौबे के लिए अलग से नियम कानून बनाकर इन्हें शासकीय राशि का दुरुपयोग करने का सह प्राप्त था आखिर किसकी सह पर यह हो रहा था यह जांच का विषय है .
जांच हुआ तो होंगे कई चौकाने वाले खुलासे
चौबे की शिकायतों और विवादों की लंबी फेहरिश्त अगर खंखाली जाए तो जो खुलासे होंगे वह चौकाने वाले होंगे उक्त मामले और तथ्यों की जांच शासन स्तर पर सक्षम अधिकारी से करवाने के साथ ही इस बात की भी जाँच करवाई जावे कि संचालक द्वारा प्रेषित अनुशंसा पत्र तैयार करने वाले अधिकारी उप संचालक स्थापना आर.जे. कुशवाहा द्वारा शासन हित के तथ्यों का इरादतन लोप, अनुशंसा पत्र में क्यों किया गया अतः जांच के परिणामों के आधार पर सुरेन्द्र कुमार चौबे संचालक एस.आर.सी. एवं आर.जे.कुशवाहा पर कार्रवाही सुनिश्चित की जाए ताकि सरकार की नीतियों पर प्रश्न चिन्ह न लगे .
हालांकि प्रदेश में अब सुशासन की सरकार है ऐसे में सरकार भी नही चाहेगी की पूर्ववर्ती सरकार की तरह इस सरकार पर ऐसे अधिकारियो की वजह से उनपर दाग लगे तो यह जरूरी हो जाता है कि ऐसे अधिकारियों पर साय सरकार जांच करे और कार्रवाही सुनिश्चित करे .










