IAS जगदीश सोनकर पर PM-AJAY में करोड़ों के घोटाले के गंभीर आरोप! 5838 हितग्राहियों की ट्रेनिंग के नाम पर 12.48 करोड़ का खेल, एजेंसी ने आर्थिक लेनदेन से जुड़ी ‘अनैतिक मांग’ का लगाया आरोप –

रायपुर – छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति वर्ग के गरीब युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के नाम पर चल रही प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना यानी PM-AJAY में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इस पूरे मामले में तत्कालीन प्रबंध संचालक IAS जगदीश सोनकर की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 5838 हितग्राहियों को प्रशिक्षण देने के लिए करीब 12.48 करोड़ रुपये की योजना थी, लेकिन प्रशिक्षण की गुणवत्ता, हितग्रियों की वास्तविक उपस्थिति, एजेंसी को काम देने की प्रक्रिया और भुगतान तक पर सवाल खड़े हो गए।
मामला यहीं खत्म नहीं होता। जिस दौरान यह पूरा विवाद सामने आया, उसी दौरान प्रशिक्षण एजेंसी MPCON Limited ने वरिष्ठ अधिकारियों को ई-मेल भेजकर तत्कालीन एमडी जगदीश सोनकर पर आर्थिक लेनदेन से जुड़ी “अनैतिक मांग” किए जाने का आरोप लगा दिया। एजेंसी ने इस पूरे मामले में स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है।
12.48 करोड़ के काम की प्रक्रिया पर सवाल –
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक पांचों प्रशिक्षण केंद्रों के प्रबंधकों के माध्यम से MPCON Limited के साथ प्रशिक्षण संबंधी समझौते किए गए। वहीं रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि निगम कार्यालय की ओर से MPCON को सीधे कोई Authorization Letter या कार्यादेश जारी नहीं किया गया था।
इसी बीच मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में बिना EOI/टेंडर के MPCON को सीधे काम दिए जाने सहित प्रशिक्षण में अनियमितताओं की शिकायत हुई। शिकायत की जांच के लिए रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सक्ती और सारंगढ़ के कलेक्टरों से जांच कराई गई।
ट्रेनिंग की गुणवत्ता भी जांच के घेरे में –
16 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में WP260700100615 क्रमांक से प्रशिक्षण की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज हुई। इसके बाद प्रशिक्षणार्थियों की संख्या, उपस्थिति, प्रशिक्षण की अवधि, ट्रेड, असेसमेंट और परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड सहित प्रशिक्षण की वास्तविक स्थिति की जांच के निर्देश दिए गए। मामला आगे बढ़ा तो दुर्ग, रायपुर, रतनपुर और सारंगढ़ के प्रशिक्षण कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए। मालखरौदा केंद्र को भी प्रशिक्षण निरस्त करने के लिए सात दिन का नोटिस दिया गया।
यानी करोड़ों रुपये की योजना में सवाल सिर्फ प्रशिक्षण के भुगतान का नहीं रहा, बल्कि प्रशिक्षण वास्तव में किस स्तर पर और कितने हितग्राहियों को मिला, यह भी जांच का विषय बन गया।
सोनकर के हस्ताक्षर वाले पत्र में भी अनियमितताओं का जिक्र –
इस पूरे मामले में IAS जगदीश सोनकर की भूमिका इसलिए अहम है क्योंकि वे उस समय छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक थे। 21 अगस्त 2026 के सरकारी पत्र पर सोनकर के डिजिटल हस्ताक्षर हैं। इसमें प्रशिक्षण केंद्रों की शिकायतों, नोटिस, प्रशिक्षण निरस्त करने और भुगतान से जुड़े पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। पत्र में यह आशंका भी दर्ज है कि अनियमित प्रशिक्षण जारी रहने और भुगतान किए जाने से शासकीय राशि की क्षति हो सकती है।
एजेंसी ने सोनकर पर लगाया ‘अनैतिक मांग’ का आरोप –
इसी विवाद के बीच MPCON Limited ने 11 अगस्त 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों को ई-मेल भेजकर स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की। एजेंसी ने तत्कालीन एमडी IAS जगदीश सोनकर पर “अनैतिक मांग” किए जाने का आरोप लगाया और इसे आर्थिक लेनदेन से जुड़ा बताया। MPCON का कहना था कि वह निर्धारित नियमों के विपरीत ऐसी मांग पूरी नहीं कर सकती। एजेंसी ने आशंका जताई कि मांग पूरी नहीं करने की स्थिति में उसका प्रशिक्षण कार्य बंद या निरस्त किया जा सकता है।
MPCON ने अपने पत्र में यह भी कहा कि उसने 45 प्रशिक्षण बैच पूरे किए, प्रशिक्षण, असेसमेंट और सर्टिफिकेशन कराया तथा संबंधित रिकॉर्ड जमा किए, लेकिन इसके बावजूद भुगतान लंबित रहा।
एक तरफ 45 बैच पूरे करने का दावा, दूसरी तरफ ट्रेनिंग निरस्त –
यहीं पूरा मामला उलझता है। एजेंसी 45 बैच पूरे करने और भुगतान लंबित होने का दावा कर रही है, जबकि विभागीय रिकॉर्ड में प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रक्रिया पर शिकायतों के बाद नोटिस, जांच और कई केंद्रों के प्रशिक्षण कार्यक्रम निरस्त किए जाने की कार्रवाई दर्ज है। अब जांच में यह साफ होना बाकी है कि 5838 में वास्तव में कितने हितग्राहियों ने प्रशिक्षण लिया? 45 बैच में कितने प्रशिक्षणार्थी मौजूद थे? उपस्थिति और सर्टिफिकेशन के रिकॉर्ड कितने वास्तविक हैं? MPCON को काम देने की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक थी या नहीं?
12.48 करोड़ में कितना भुगतान हुआ और कितना लंबित है –
MPCON ने IAS जगदीश सोनकर पर आर्थिक लेनदेन से जुड़ी जिस ‘अनैतिक मांग’ का आरोप लगाया है, प्रशिक्षण की प्रक्रिया, गुणवत्ता, भुगतान और निरस्तीकरण को लेकर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज सवालों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब जरूरत 12.48 करोड़ रुपये की पूरी प्रक्रिया की जांच की है काम देने से लेकर प्रशिक्षण, उपस्थिति, असेसमेंट, सर्टिफिकेट और भुगतान तक।
क्योंकि सवाल सिर्फ करोड़ों रुपये का नहीं, बल्कि उन 5838 हितग्राहियों का भी है, जिनके नाम पर यह पूरी योजना बनाई गई थी।










