कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को गति देने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की बड़ी पहल, 8 जिलों की समीक्षा के साथ स्व-सहायता समूहों से किया सीधा संवाद –

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को गति देने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की बड़ी पहल, 8 जिलों की समीक्षा के साथ स्व-सहायता समूहों से किया सीधा संवाद –

रायपुर : – महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित विशेष अभियान की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही रेडी टू ईट संचालन से जुड़े स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, सूरजपुर, जशपुर, बलरामपुर और सरगुजा जिलों में संचालित कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में गंभीर कुपोषित (SAM) एवं मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों की स्थिति, पोषण पुनर्वास और विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए पोषण सेवाओं के विस्तार, सामुदायिक सहभागिता और सतत निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो, वहां केला, पपीता, मुनगा सहित अन्य पोषणयुक्त पौधों का रोपण किया जाए तथा प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में पोषण वाटिका विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्री बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

बैठक में अतिरिक्त पोषण आहार की उपलब्धता, गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी संचालन, नियमित निरीक्षण तथा सुपोषण पाठशालाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को समय पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाए तथा SAM और MAM बच्चों के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण कर समयबद्ध सुधार सुनिश्चित किया जाए।

समीक्षा बैठक के बाद मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने रेडी टू ईट निर्माण एवं वितरण कार्य से जुड़े स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से वर्चुअल माध्यम से संवाद किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों की महिलाओं ने भुगतान प्रक्रिया, कच्ची सामग्री की उपलब्धता, परिवहन व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक विषयों से जुड़ी समस्याओं से मंत्री को अवगत कराया।

मंत्री ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई कर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रेडी टू ईट व्यवस्था प्रदेश के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस व्यवस्था के सफल संचालन में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि समूहों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आने पाए तथा नियमित मॉनिटरिंग और बेहतर समन्वय के माध्यम से उनकी समस्याओं का समय पर निराकरण किया जाए। मंत्री ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाकर न केवल आजीविका के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं, बल्कि प्रदेश में पोषण सुरक्षा के लक्ष्य को भी मजबूती मिल रही है।

श्रीमती राजवाड़े ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रभावी निगरानी, नवाचार, जनभागीदारी और सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकेगा।

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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