आठ दिन से खाली है CGPSC चेयरमैन की कुर्सी, सरकार के फैसले का इंतजार… संवैधानिक संस्था के मुखिया पर इतना विलंब क्यों –

रायपुर – छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में अध्यक्ष रीता शांडिल्य के 8 सितंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक नए पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। 9 सितंबर को उनकी सेवामुक्ति की औपचारिक अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब उनकी सेवानिवृत्ति पहले से तय थी, तो उत्तराधिकारी के नाम पर फैसला समय रहते क्यों नहीं हो सका। CGPSC प्रदेश की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में शामिल है और हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं का संचालन करता है। ऐसे में अध्यक्ष जैसे संवेदनशील पद पर नियुक्ति में हो रही देरी ने प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।
सिर्फ अध्यक्ष ही नहीं, सदस्य पद भी खाली –
अध्यक्ष पद के साथ आयोग में एक सदस्य का पद भी रिक्त बताया जा रहा है। ऐसे में सरकार के सामने सिर्फ चेयरमैन नियुक्त करने की चुनौती नहीं, बल्कि आयोग की पूरी संरचना को मजबूत करने का सवाल भी है।
नामों की चर्चा, फैसला अब भी बाकी –
नए अध्यक्ष को लेकर वरिष्ठ सेवानिवृत्त IAS और IFS अधिकारियों के नामों की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नियुक्ति में राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका के चलते यह मामला सामान्य प्रशासनिक नियुक्ति से अलग महत्व रखता है।
आखिर फैसला अटका क्यों?
जब अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति तय थी, तो नया नाम पहले से तय क्यों नहीं किया गया? क्या सरकार किसी खास नाम पर सहमति बनाने में जुटी है? क्या अध्यक्ष और रिक्त सदस्य पद पर एक साथ नियुक्तियां होंगी? या फिर किसी प्रशासनिक और राजनीतिक समीकरण के कारण फैसला टल रहा है?
फिलहाल इन सवालों के जवाब सरकार की ओर से सामने नहीं आए हैं। लेकिन भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं से सीधे जुड़े आयोग में नेतृत्व का पद आठ दिन तक खाली रहना निश्चित रूप से सवाल खड़े करता है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार CGPSC को नया मुखिया कब देती है।
युवाओं के भविष्य का फैसला करने वाली संस्था में चेयरमैन की कुर्सी खाली है सवाल नाम का नहीं, फैसले में हो रही देरी का है।










