बिजली के बदलते गणित में स्मार्ट मीटर से सोलर तक की कहानी, बदल रही बिजली की तस्वीर, 43 लाख परिसरों तक पहुंचा मीटर

रायपुर – छत्तीसगढ़ में बिजली की खपत का गणित पिछले एक साल में बदला हुआ नजर आ रहा है। 400 यूनिट से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या घटी है, जबकि 200 यूनिट से कम और 200 से 400 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ता बढ़े हैं। इसी दौरान स्मार्ट मीटरिंग का दायरा तेजी से बढ़ा और रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने वाले उपभोक्ताओं की संख्या भी एक लाख के पार पहुंच गई।
जुलाई 2025-26 और जुलाई 2026-27 के आंकड़ों की तुलना करें तो 200 यूनिट से कम मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ता 41.40 लाख से बढ़कर 42.40 लाख हो गए। 200 से 400 यूनिट वाले उपभोक्ता 6.85 लाख से बढ़कर 7.34 लाख पहुंचे। दूसरी ओर 400 यूनिट से ज्यादा खपत वाले उपभोक्ता 2.71 लाख से घटकर 2.56 लाख रह गए। यानी निचले दोनों स्लैब में संख्या बढ़ी, जबकि सबसे ऊपरी स्लैब में कमी आई।
स्मार्ट मीटर की नींव पहले, बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन अब –
स्मार्ट मीटर को लेकर आज भले ही चर्चा इसके असर और बिल की रीडिंग को लेकर हो रही हो, लेकिन इसकी शुरुआत आज से नहीं हुई। प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना की आधारभूमि वर्ष 2022 में तैयार हुई थी। 13 जुलाई 2022 को डीपीआर स्वीकृत हुई, 11 अप्रैल 2023 को टेंडर प्रकाशित किया गया और मई 2023 में 55 लाख स्मार्ट मीटर लगाने के लिए कंपनियों को एलओए जारी हुआ। फरवरी 2024 से मीटर लगाने का काम शुरू हुआ।
यानी योजना, टेंडर और कार्यादेश की प्रक्रिया पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में पूरी हो चुकी थी। सरकार बदलने के बाद परियोजना का मैदानी क्रियान्वयन आगे बढ़ा और अब करीब 43 लाख उपभोक्ता परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
इनमें 7,780 परिसरों में स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर भी लगाया गया है। पॉवर कंपनी के अनुसार दोनों मीटरों से दर्ज खपत का अंतर निर्धारित मानक सीमा के भीतर पाया गया है। स्मार्ट मीटर को लेकर ज्यादा बिल की शिकायत होने पर चेक मीटर से जांच का प्रावधान भी है। मई 2025 से जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर कंपनी ने स्मार्ट और गैर-स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं की खपत वृद्धि को लगभग समान अनुपात में बताया है।
सुबोध सिंह के लिए बिजली का मैदान नया नहीं –
बिजली के बदलते गणित के बीच ऊर्जा विभाग की कमान आईएएस सुबोध कुमार सिंह के हाथ में है। 1997 बैच के सुबोध सिंह की प्रशासनिक पारी करीब तीन दशक लंबी है और इसमें मैदानी प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय और केंद्र सरकार तक की जिम्मेदारियां शामिल रही हैं।
Electrical Engineering की पृष्ठभूमि होने के साथ वे पहले CSPDCL के प्रबंध संचालक (एमडी) और पावर कंपनीज से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं। अब प्रमुख सचिव, ऊर्जा विभाग के साथ पावर कंपनीज के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार उनके पास है। यानी बिजली का यह मैदान उनके लिए नया नहीं, लेकिन इस बार चुनौती बड़ी है स्मार्ट मीटरिंग, रूफटॉप सोलर, ट्रांसमिशन-वितरण, लाइन लॉस और बढ़ती बिजली मांग के बीच उनके पुराने बिजली अनुभव की नई परीक्षा होनी है।
सोलर की ओर बढ़ता घरेलू बिजली का गणित –
बिजली व्यवस्था में दूसरा बड़ा बदलाव रूफटॉप सोलर के स्तर पर दिखाई दे रहा है। पीएम सूर्यघर योजना के तहत प्रदेश में अब तक 1 लाख 11 हजार 713 सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। इनमें 35 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के बिजली बिल शून्य आने की जानकारी पॉवर कंपनी ने दी है। कंपनी के मुताबिक रोजाना 500 से ज्यादा नए सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं।
पॉवर कंपनी का कहना है कि 400 यूनिट से ज्यादा खपत करने वाले कुछ उपभोक्ताओं ने सोलर प्लांट लगाए। इसके बाद ग्रिड से उनकी बिजली खपत कम हुई और वे 400 यूनिट से नीचे वाले स्लैब में आ गए। इसी तरह 200 से 400 यूनिट वाले कुछ उपभोक्ताओं की खपत 200 यूनिट से नीचे आने की बात भी कंपनी ने कही है।
एक लाख से ज्यादा रूफटॉप प्लांट और रोजाना 500 से अधिक नए इंस्टॉलेशन का आंकड़ा घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल की तस्वीर पेश करता है। आने वाले समय में घरों की छत पर पैदा होने वाली बिजली का हिस्सा बढ़ता है तो इसका असर ग्रिड से ली जाने वाली बिजली और घरेलू खपत के आंकड़ों पर भी पड़ सकता है।
पीएम सूर्यघर योजना के तहत 3 किलोवाट क्षमता के प्लांट पर केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। पॉवर कंपनी के मुताबिक अब तक केंद्र से 661 करोड़ और राज्य से 225 करोड़ रुपये की राशि लाभार्थियों को दी जा चुकी है। सोलर प्लांट की लागत के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों से 6 प्रतिशत से कम ब्याज पर 2 लाख रुपये तक के ऋण की सुविधा भी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
52.28 लाख घरेलू उपभोक्ता, 47 लाख से ज्यादा को राहत योजना –
प्रदेश में कुल 52 लाख 28 हजार घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें 47 लाख से अधिक मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना का लाभ ले रहे हैं। योजना के तहत 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट की खपत पर 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
करीब 15 लाख बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं को 30 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली का प्रावधान है। 31 से 100 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त छूट और सहायता भी दी जा रही है। पॉवर कंपनी के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में 60 हजार से अधिक की वृद्धि हुई है।
बिजली के इस बदलते गणित में एक तरफ 43 लाख परिसरों तक स्मार्ट मीटर पहुंच चुका है, तो दूसरी तरफ रूफटॉप सोलर की संख्या 1.11 लाख के पार है। इसी दौरान 400 यूनिट से अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं की संख्या कम हुई और 200 यूनिट से कम वाले बढ़े। स्मार्ट मीटर की शुरुआत से लेकर सोलर के बढ़ते इस्तेमाल तक, बिजली व्यवस्था में बदलाव की यह तस्वीर अब आने वाले आंकड़ों में और साफ होगी।










