क्या डीडी हॉस्पिटल पर कार्रवाई भारी पड़ गई? या सिर्फ मंत्री से बातचीत बनी वजह… जीपीएम से हटाए गए कलेक्टर पर उठे बड़े सवाल

क्या डीडी हॉस्पिटल पर कार्रवाई भारी पड़ गई? या सिर्फ मंत्री से बातचीत बनी वजह… जीपीएम से हटाए गए कलेक्टर पर उठे बड़े सवाल

रायपुर/जीपीएम : – सिर्फ दो महीने पहले बड़ी उम्मीदों के साथ जीपीएम भेजे गए आईएएस संतोष देवांगन अचानक हटा दिए गए। सरकार की ओर से कोई विस्तृत वजह नहीं बताई गई, लेकिन सत्ता के गलियारों में अलग-अलग चर्चाएं जरूर हैं।

एक चर्चा यह है कि स्वास्थ्य मंत्री से फोन पर हुई बातचीत का लहजा सरकार को पसंद नहीं आया। दूसरी तरफ जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक यह सवाल भी गूंज रहा है कि क्या निजी अस्पतालों के खिलाफ उनकी सख्ती किसी को भारी पड़ गई?

जीपीएम में डीडी हॉस्पिटल का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था। इलाज में कथित लापरवाही के बाद दो महिलाओं की मौत हुई। प्रशासन ने जांच कराई और कलेक्टर संतोष देवांगन ने अस्पताल को सील करने जैसी बड़ी कार्रवाई कर दी।

यहीं से चर्चा शुरू हुई कि जिले में पहली बार किसी निजी अस्पताल पर इतनी कड़ी कार्रवाई हुई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से विरोध भी हुआ और राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। इसी बीच स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर स्वास्थ्य मंत्री का कलेक्टर को फोन गया। खबरें सामने आईं कि बातचीत के दौरान दोनों के बीच तीखी चर्चा हुई। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि कलेक्टर ने कुछ बातों पर साफ शब्दों में असहमति जताई।

इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और कुछ ही दिनों में कलेक्टर का तबादला कर दिया गया। सरकार के कुछ अधिकारी इसे केवल प्रदर्शन और प्रशासनिक शैली से जोड़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जिले में यह सवाल लगातार पूछा जा रहा है कि अगर कोई अधिकारी निजी अस्पतालों पर कार्रवाई करेगा, तो क्या उसका यही अंजाम होगा?

यह भी याद रखना चाहिए कि किसी भी जिले में निजी अस्पतालों की जवाबदेही तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। यदि इलाज में लापरवाही के आरोप सामने आते हैं, तो जांच और कार्रवाई भी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तबादला केवल मंत्री से हुई बातचीत का परिणाम था? या फिर डीडी हॉस्पिटल पर हुई कार्रवाई और उससे पैदा हुए दबाव ने भी इस फैसले की पृष्ठभूमि तैयार की?

इन सवालों का जवाब फिलहाल सरकार ने सार्वजनिक रूप से नहीं दिया है। लेकिन इतना जरूर है कि जीपीएम में कलेक्टर के अचानक तबादले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब आने अभी बाकी हैं।

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