बेदाग निर्मल को दफ्तर, विवादित हरिओम को सितारा होटल…रिटायर कुर्सी होती है, रसूख नहीं

बेदाग निर्मल को दफ्तर, विवादित हरिओम को सितारा होटल…रिटायर कुर्सी होती है, रसूख नहीं

रायपुर – पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 30 जून 2026 को एक साथ दो मुख्य अभियंता सेवा-निवृत्त हुए। दोनों ने एक ही दिन सरकारी सेवा छोड़ी, लेकिन उनकी विदाई के दो अलग-अलग दृश्य अब पूरे विभाग में चर्चा का विषय बने हुए हैं। सवाल केवल विदाई का नहीं, बल्कि उस संदेश का है जो विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया।

एक ओर मुख्य अभियंता निर्मल शर्मा, जिनकी पहचान पूरी सेवा अवधि में बेदाग और अनुशासित अधिकारी की रही। सेवानिवृत्ति से पहले उन्हें प्रशिक्षण केंद्र, नया रायपुर में पदस्थ किया गया था। उनकी विदाई विभागीय कार्यालय में सादगी के साथ हुई। कुछ अधिकारी, कुछ कर्मचारी, फूलों का गुलदस्ता और औपचारिक शुभकामनाएं।

दूसरी ओर मुख्य अभियंता हरिओम शर्मा, जिनकी विदाई राजधानी के एक सितारा होटल में भव्य आयोजन के साथ हुई। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी, शानदार समारोह और शाही इंतजामों ने पूरे महकमे का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

यही तुलना अब कई सवाल खड़े कर रही है। विभागीय रिकॉर्ड और सार्वजनिक रूप से चर्चा में रहे हरिओम शर्मा का नाम वर्षों से तदर्थ नियुक्ति से नियमितीकरण, एसीबी एवं ईओडब्ल्यू में दर्ज प्रकरण, एफआईआर लंबित रहने के दौरान पदोन्नति तथा जन्मतिथि संबंधी विवाद जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। बाउजूद इसके वे लंबे समय तक विभाग के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में शामिल रहे और मुख्य अभियंता पीएमजीएसवाई, मुख्य अभियंता क्वालिटी, मुख्य अभियंता सेतु तथा मुख्य अभियंता स्थापना जैसे चार महत्वपूर्ण प्रभार एक साथ संभालते रहे।

सबसे बड़ा सवाल अब उनकी सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन शिकायतों और प्रकरणों को लेकर वर्षों से सवाल उठते रहे, उनके अंतिम निराकरण से पहले ही उन्हें शासन की ओर से आवश्यक अनापत्ति (एनओसी) जारी कर दी गई। इसके बाद वे सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए और अब पेंशन सहित अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने के पात्र हो गए हैं।

विभागीय गलियारों में यह चर्चा भी है कि हरिओम शर्मा ने संविदा नियुक्ति के लिए आवेदन भी दिया है और उन्हें दोबारा संविदा पर नियुक्त किए जाने की तैयारी चल रही है। यदि ऐसा होता है, तो सवाल और गंभीर हो जाएगा कि जिन मामलों को लेकर शिकायतें और जांच की बातें वर्षों से होती रही हैं, उनके अंतिम निष्कर्ष से पहले ही क्या दोबारा सरकारी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?

एक तरफ पूरी सेवा अवधि में बेदाग छवि वाले अधिकारी की सादगीपूर्ण विदाई, दूसरी तरफ विवादों से जुड़े रहे अधिकारी के लिए सितारा होटल में भव्य सम्मान समारोह और अब संभावित संविदा नियुक्ति की चर्चाएं इन सबने विभाग के भीतर सम्मान और जवाबदेही के पैमाने पर नई बहस छेड़ दी है।

अब निगाहें शासन पर हैं। क्या संविदा नियुक्ति से पहले उनका निराकरण किया जाएगा? क्या सेवानिवृत्ति से पहले जारी की गई एनओसी की प्रक्रिया की भी समीक्षा होगी? और सबसे बड़ा सवाल क्या सरकारी सेवा में सम्मान का आधार बेदाग सेवा रिकॉर्ड होगा, या फिर रसूख?

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