इंदिरा वार्ड में कांग्रेस की शानदार जीत, 436 वोटों से भाजपा को हराया, प्रदेश अध्यक्ष के गढ़ में भाजपा को झटका, किरण देव का जलवा कायम या गायब?

इंदिरा वार्ड में कांग्रेस की शानदार जीत, 436 वोटों से भाजपा को हराया, प्रदेश अध्यक्ष के गढ़ में भाजपा को झटका, किरण देव का जलवा कायम या गायब?

जगदलपुर – जगदलपुर नगर निगम के इंदिरा वार्ड पार्षद उपचुनाव में कांग्रेस ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए भाजपा को 436 मतों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया। कांग्रेस प्रत्याशी रामकृष्ण तिवारी को कुल 814 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी मनोहर दत्त तिवारी 378 वोटों पर सिमट गए। आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी रुबीना कुरैशी को 22 वोट मिले, जबकि 9 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना।

1 जून को हुए मतदान में कुल 1,542 मतदाताओं में से 1,223 मतदाताओं ने दो मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। मतगणना के बाद कांग्रेस ने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर वार्ड पर अपना कब्जा बरकरार रखा। इस परिणाम के राजनीतिक मायने इसलिए भी निकाले जा रहे हैं क्योंकि भाजपा ने जिस मनोहर दत्त तिवारी को मैदान में उतारा था, उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव का करीबी माना जाता है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या प्रदेश अध्यक्ष का प्रभाव उनके अपने विधानसभा क्षेत्र और स्थानीय राजनीतिक क्षेत्र में पहले जैसा कायम है या फिर संगठन को जमीनी स्तर पर नए सिरे से मंथन की जरूरत है।

इंदिरा वार्ड को कांग्रेस का परंपरागत गढ़ माना जाता है। पिछले लगभग 30 वर्षों से इस वार्ड में कांग्रेस का कब्जा रहा है। इस बार भी कांग्रेस ने जीत दर्ज कर अपना इतिहास दोहरा दिया। दरअसल यह सीट कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद अब्दुल रशीद के निधन के बाद रिक्त हुई थी। अब्दुल रशीद लगातार चार बार पार्षद चुने गए थे। उनसे पहले उनकी माता भी दो बार इस वार्ड का प्रतिनिधित्व कर चुकी थीं। यही वजह है कि इस उपचुनाव में सहानुभूति, स्थानीय नेटवर्क और संगठनात्मक पकड़ कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दी।

चुनाव परिणाम के बाद जगदलपुर महापौर संजय पांडेय ने कहा कि जनता का जनादेश स्वीकार है। भाजपा को जीत की उम्मीद थी, लेकिन कांग्रेस वार्ड के चुनाव को स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी की बहस में बदलने में सफल रही। उन्होंने कहा कि पार्टी इस हार की समीक्षा करेगी और कारणों का विश्लेषण किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों और विकास कार्यों को लेकर भाजपा लगातार आक्रामक रही है, लेकिन इंदिरा वार्ड के नतीजों ने यह संकेत दिया है कि स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता अभी भी वार्ड स्तर के नेतृत्व, व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय समीकरणों को अधिक महत्व दे रहे हैं।

इंदिरा वार्ड का यह परिणाम भले एक पार्षद सीट का चुनाव हो, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश दूर तक सुनाई देंगे। कांग्रेस इसे अपने संगठन की मजबूती और परंपरागत जनाधार की जीत बता रही है, जबकि भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है।

परिणाम एक नजर में

– कांग्रेस – 814 वोट
– भाजपा – 378 वोट
– आम आदमी पार्टी – 22 वोट
– नोटा – 9 वोट

जीत का अंतर – 436 वोट

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