सरहद के जवानों के लिए छत्तीसगढ़ से भेजी जाएंगी 21 लाख राखियां, आंगन की मिट्टी भी पहुंचेगी सीमा तक

सरहद के जवानों के लिए छत्तीसगढ़ से भेजी जाएंगी 21 लाख राखियां, आंगन की मिट्टी भी पहुंचेगी सीमा तक

अंबिकापुर – सरहद पर तैनात जवानों की कलाई इस बार छत्तीसगढ़ की 21 लाख बहनों के स्नेह से सजेगी। देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और अपनत्व जताने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र 0.4’ ने इस वर्ष नया रिकॉर्ड बनाया है। प्रदेशभर से 21 लाख राखियां एकत्र की गई हैं। राखियों के साथ शुभकामना पत्र और छत्तीसगढ़ के घर-आंगन की पवित्र मिट्टी भी सैनिकों तक भेजी जाएगी।

अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सरगुजा संभाग से एकत्र किए गए रक्षा-सूत्रों का संग्रह पूर्व सैनिक महासभा के पदाधिकारियों को सौंपा। इसके साथ ही रक्षा-सूत्र यात्रा का अगला पड़ाव जशपुर होगा। वहां से यह यात्रा प्रदेश के अन्य निर्धारित पड़ावों से होते हुए नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय पहुंचेगी, जहां से राखियां देश की अलग-अलग सीमाओं पर तैनात जवानों तक पहुंचाई जाएंगी।

गांव-गांव पहुंचा अभियान, आंगनबाड़ी अमला बना कड़ी

अभियान को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने में महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की अपील के बाद विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों, परियोजना अधिकारियों, सुपरवाइजरों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने गांव-गांव और वार्ड स्तर तक पहुंचकर लोगों से राखियां एकत्र कीं। कई स्थानों पर विभागीय अमले ने स्वयं राखियां तैयार कर अभियान में योगदान दिया।

मंत्री ने अभियान की शुरुआत में वीडियो संदेश जारी कर प्रदेश की माताओं, बहनों और बच्चों से सैनिकों के लिए हस्तनिर्मित राखियां, शुभकामना संदेश और अपने घर-आंगन की मिट्टी भेजने की अपील की थी। इस अपील का असर प्रदेशभर में देखने को मिला और अभियान में बड़ी संख्या में आम नागरिक जुड़ते चले गए।

सामाजिक संगठनों और संस्थानों ने भी बढ़ाया हाथ

रक्षा-सूत्र अभियान में केवल सरकारी अमला ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक संगठन, शिक्षण संस्थान, महिला स्व-सहायता समूह और आम नागरिक भी सहभागी बने। अलग-अलग जिलों में लोगों ने अपने स्तर पर राखियां तैयार कीं और उन्हें अभियान के माध्यम से सैनिकों तक भेजने के लिए जमा कराया।

इसी सामूहिक भागीदारी ने इस वर्ष अभियान को अब तक के सबसे बड़े मुकाम तक पहुंचाया है। वर्ष 2023 में 6 लाख 71 हजार राखियां एकत्र हुई थीं। 2024 में यह संख्या बढ़कर 9 लाख हुई, जबकि 2025 में 12 लाख 21 हजार राखियां एकत्र की गईं। इस वर्ष संख्या सीधे 21 लाख तक पहुंच गई है।

वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो—

– 2023 — 6,71,000 राखियां
– 2024 — 9,00,000 राखियां
– 2025 — 12,21,000 राखियां
– 2026 — 21,00,000 राखियां

राखी के साथ पहुंचेगी छत्तीसगढ़ के आंगन की मिट्टी

इस अभियान की खास बात सिर्फ राखियां नहीं हैं। प्रत्येक रक्षा-सूत्र के साथ शुभकामना संदेश और घर-आंगन की मिट्टी भी सैनिकों तक भेजी जा रही है। इसके पीछे भाव यह है कि सीमा पर तैनात जवानों को हजारों किलोमीटर दूर अपने घर और मातृभूमि का अहसास भी हो।

अंबिकापुर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि शून्य से नीचे तापमान और दुर्गम परिस्थितियों में सीमा पर तैनात जवानों की वजह से ही देश के लोग अपने घरों में सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण में त्योहार मना पाते हैं। छत्तीसगढ़ की बहनों द्वारा भेजी जा रही 21 लाख राखियां केवल रेशम के धागे नहीं हैं, बल्कि जवानों के प्रति प्रदेश के सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता का प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि राखियों के साथ भेजी जा रही आंगन की मिट्टी जवानों को यह एहसास कराएगी कि जिस मातृभूमि की रक्षा के लिए वे सीमा पर खड़े हैं, उस मातृभूमि का कण-कण उनके साथ है।

मंत्री ने अभियान में सहयोग करने वाले पूर्व सैनिक महासभा, महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले, सामाजिक संगठनों, महिला समूहों, शिक्षण संस्थानों और प्रदेशवासियों के प्रति आभार जताया। 21 लाख राखियों का यह आंकड़ा अब सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि सरहद और छत्तीसगढ़ के बीच स्नेह की उस डोर का प्रतीक बन गया है, जो दूरी के बावजूद जवानों को अपनेपन का अहसास कराएगी।

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