एनआईटी रायपुर में एआई सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय मंथन शुरू, जी.पी. सिंह बोले सुरक्षित और विश्वसनीय एआई सिस्टम समय की सबसे बड़ी जरूरत

एनआईटी रायपुर में एआई सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय मंथन शुरू, जी.पी. सिंह बोले सुरक्षित और विश्वसनीय एआई सिस्टम समय की सबसे बड़ी जरूरत
रायपुर – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी नई चुनौतियों के बीच राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में सोमवार से ब्रेकिंग एंड सिक्योरिंग एआई एडवर्सेरियल अटैक्स, डीपफेक्स एंड हेल्थकेयर सिस्टम्स विषय पर केंद्रित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की स्पार्क (Scheme for Promotion of Academic and Research Collaboration) योजना के तहत आयोजित यह कार्यशाला 22 से 26 जून 2026 तक चलेगी, जिसमें एआई सुरक्षा, डीपफेक तकनीकों, एडवर्सेरियल अटैक्स और स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ पुलिस के स्पेशल डीजीपी गुरजिंदर पाल (जी.पी.) सिंह ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के इस दौर में केवल तकनीकी प्रगति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित, विश्वसनीय और भरोसेमंद एआई प्रणालियों का विकास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि डीपफेक, एडवर्सेरियल अटैक्स और साइबर अपराधों का बदलता स्वरूप नई चुनौतियां पैदा कर रहा है, ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोग होने वाली एआई तकनीकों का परीक्षण और सत्यापन भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बुद्धिमत्ता के साथ विश्वसनीयता का समावेश भी अनिवार्य है।
उद्घाटन समारोह में नेशनल स्पार्क कोऑर्डिनेटर एवं आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर डॉ. रबीब्रत मुखर्जी, एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव, सुनी पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट (अमेरिका) के प्रोफेसर डॉ. जाहिद अख्तर तथा नेशनल सन यात-सेन यूनिवर्सिटी (ताइवान) के प्रोफेसर डॉ. अरिजीत कराती विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप सिंह सिसोदिया ने की, जबकि कार्यशाला का समन्वयन प्रो. डॉ. नरेश कुमार नागवानी और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रीति चंद्राकर कर रहे हैं।
दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और पौधारोपण के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन देते हुए डॉ. प्रीति चंद्राकर ने बताया कि कार्यशाला में देश-विदेश से पंजीकृत करीब 100 प्रतिभागी विशेषज्ञों के व्याख्यान और तकनीकी सत्रों से लाभान्वित होंगे।
डॉ. दिलीप सिंह सिसोदिया ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है और वर्तमान समय की जटिल चुनौतियों का समाधान एआई आधारित नवाचार एवं अनुसंधान से ही संभव है। उन्होंने इस कार्यशाला को शोध और नवाचार को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया।
डॉ. रबीब्रत मुखर्जी ने स्पार्क योजना के तहत एनआईटी रायपुर द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्थानों को वैश्विक स्तर पर अकादमिक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान का मजबूत मंच भी उपलब्ध कराता है।
एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव ने कहा कि स्पार्क कार्यक्रम ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को नई गति दी है। उन्होंने आगाह किया कि एडवर्सेरियल अटैक्स और डीपफेक तकनीकें विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में गंभीर चुनौती बनकर उभर रही हैं, जहां डेटा में मामूली बदलाव भी बड़े दुष्परिणाम पैदा कर सकता है। उन्होंने सुरक्षित एआई प्रणालियों और प्रभावी डिटेक्शन तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. जाहिद अख्तर ने कहा कि आज एआई हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और अब केवल अधिक सक्षम मॉडल विकसित करने पर नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वहीं डॉ. अरिजीत कराती ने कहा कि एआई आधारित प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता के साथ उनकी मजबूती और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक हो गया है। उन्होंने मॉडल प्रशिक्षण, वास्तविक परिस्थितियों में उनके उपयोग और संभावित छेड़छाड़ (टैम्परिंग) जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सुरक्षित एवं मजबूत एआई प्रणालियों के विकास पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. नरेश कुमार नागवानी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, संकाय सदस्यों, आयोजन समिति और स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।










