HoFF नियुक्ति में केवल वरिष्ठता नहीं, योग्यता और अनुभव भी अहम , 2009 के केंद्र सरकार के नियमों की रोशनी में समझिए पूरी प्रक्रिया

HoFF नियुक्ति में केवल वरिष्ठता नहीं, योग्यता और अनुभव भी अहम , 2009 के केंद्र सरकार के नियमों की रोशनी में समझिए पूरी प्रक्रिया

रायपुर – छत्तीसगढ़ में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (Head of Forest Force-HoFF) के पद पर 1994 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी अरुण कुमार पांडेय की नियुक्ति के बाद वन विभाग के शीर्ष पदों पर चयन की प्रक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2009 में जारी दिशा-निर्देश स्पष्ट करते हैं कि HoFF जैसे सर्वोच्च पद पर नियुक्ति केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता, क्षमता, सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और पद के लिए उपयुक्तता के समग्र मूल्यांकन के आधार पर की जाती है।

क्या है HoFF पद?
Head of Forest Force (HoFF) किसी भी राज्य के वन विभाग का सर्वोच्च पद होता है। यह अधिकारी राज्य की वन नीति, वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन, विभागीय प्रशासन, बजट, दीर्घकालिक वन योजनाओं और रणनीतिक निर्णयों की कमान संभालता है। Apex Scale (Level-17) का यह पद भारतीय वन सेवा के सबसे महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी पदों में गिना जाता है।

क्या कहते हैं 2009 के दिशा-निर्देश?
भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 16 अप्रैल 2009 को जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि HoFF चयन के दौरान निम्न बिंदुओं का परीक्षण किया जाता है जिसमे Outstanding Merit (उत्कृष्ट योग्यता), Competence (कार्यकुशलता), Absolute Integrity (निष्कलंक सेवा रिकॉर्ड) , Specific Suitability for the Post (पद के लिए विशेष उपयुक्तता) अर्थात केवल वरिष्ठतम अधिकारी होना चयन की गारंटी नहीं है। चयन समिति यह भी देखती है कि विभाग के नेतृत्व के लिए कौन अधिकारी सबसे उपयुक्त है।

चयन समिति में कौन-कौन होते हैं?
HoFF चयन के लिए गठित विशेष चयन समिति में मुख्य सचिव अध्यक्ष , वन विभाग के प्रमुख सचिव/सचिव सदस्य , राज्य के Apex Scale स्तर के PCCF सदस्य एवं केंद्र सरकार द्वारा नामित Apex Scale स्तर के PCCF सदस्य शामिल होते हैं। समिति सेवा रिकॉर्ड, उपलब्धियों, गोपनीय प्रतिवेदन, प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व कौशल का मूल्यांकन कर अपनी अनुशंसा देती है।

वर्तमान नियुक्ति –
27 मई 2026 को जारी राज्य शासन के आदेश के अनुसार 1990 बैच के वरिष्ठ IFS अधिकारी एवं तत्कालीन HoFF श्रीनिवास राव के सेवानिवृत्त होने के बाद 1994 बैच के IFS अधिकारी अरुण कुमार पांडेय को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख नियुक्त किया गया है।

कौन हैं अरुण कुमार पांडेय?
करीब तीन दशक लंबे सेवाकाल में अरुण कुमार पांडेय ने वन प्रशासन, वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन और विभागीय योजना निर्माण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व संभाले हैं। वे विभिन्न समय में PCCF (Development & Planning) , PCCF (Wildlife & Biodiversity Conservation) , Chief Wildlife Warden , APCCF (Wildlife) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। इसके साथ ही रायपुर, बिलासपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनकी प्रशासनिक और फील्ड स्तर की जिम्मेदारियां रही हैं। वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और दीर्घकालिक वन योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

वन्यजीव और जैव विविधता क्षेत्र में विशेष पहचान –
वन्यजीव क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले अरुण कुमार पांडेय के नाम कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज हैं। राज्य जैव विविधता बोर्ड से जुड़े उनके कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ में पहली बार रामसर साइट की दिशा में व्यवस्थित पहल शुरू हुई। बाद में कोपरा जलाशय को प्रदेश की पहली रामसर साइट के रूप में मान्यता मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। राज्य के टाइगर रिजर्व, वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों, पक्षी संरक्षण गतिविधियों और जैव विविधता आधारित परियोजनाओं में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। गिधवा-परसदा क्षेत्र सहित कई संरक्षण आधारित पहलों से उनका नाम जुड़ा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के बीच उन्हें संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने वाले अधिकारी के रूप में भी देखा जाता है।

जंगली भैंसा संरक्षण से लेकर क्लाइमेट चेंज तक –
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में असम से छत्तीसगढ़ तक जंगली भैंसों के ट्रांसलोकेशन कार्यक्रम में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है। इसके अलावा वे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़े कार्यक्रमों और राज्य स्तरीय रणनीतियों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वन विभाग की विकास एवं योजना शाखा में रहते हुए उन्होंने दीर्घकालिक वन प्रबंधन, संरक्षण आधारित विकास मॉडल और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर कार्य किया।

कार्यशैली की पहचान –
वन विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार उनकी कार्यशैली की विशेषता फील्ड आधारित निर्णय और संवाद आधारित प्रशासन रही है। आदिवासी क्षेत्रों में वन्यजीव-मानव संघर्ष, हाथी कॉरिडोर, संरक्षण योजनाओं और सामुदायिक भागीदारी वाले कार्यक्रमों में उन्होंने स्थानीय समुदायों से संवाद को प्राथमिकता दी। वन संरक्षण को केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामाजिक भागीदारी का विषय मानने की उनकी सोच कई कार्यक्रमों में दिखाई देती रही है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
HoFF पद केवल प्रशासनिक पद नहीं बल्कि राज्य की वन नीति और संरक्षण व्यवस्था का नेतृत्वकारी पद है। ऐसे में शीर्ष पद पर नियुक्ति के दौरान सरकार और चयन समिति द्वारा अधिकारी के अनुभव, नेतृत्व क्षमता, सेवा रिकॉर्ड, संरक्षण कार्यों में योगदान और विभागीय दृष्टि का भी मूल्यांकन किया जाता है।

केंद्र सरकार के 2009 के दिशा-निर्देश स्पष्ट करते हैं कि HoFF चयन केवल वरिष्ठता पर आधारित प्रक्रिया नहीं है। पात्रता, Apex Scale की स्थिति, सेवा रिकॉर्ड, योग्यता, प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, निष्कलंक सेवा रिकॉर्ड और चयन समिति की अनुशंसा ये सभी तत्व अंतिम निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी व्यापक प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ में अरुण कुमार पांडेय को राज्य के वन विभाग की सर्वोच्च जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसका परिणाम आने वाले वर्षों में राज्य के वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी रणनीतियों और सामुदायिक वन प्रबंधन की दिशा में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

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