नक्सल इलाके में लंबे समय से पदस्थ पुलिस कर्मियों को तबादले के लिए अब सिफारिश की नहीं देना होगा ऑनलाइन आवेदन

रायपुर। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से पदस्थ पुलिस कर्मियों को तबादले के लिए अब किसी सिफारिश की जरूरत नहीं होगी, उन्हें ऑनलाईन आवेदन देना होगा और तबादला आदेश घर तक पहुंच जाएगा। यह जानकारी उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा में दिए।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सदस्य श्रीमती सावित्री मंडावी ने लंबे समय से नक्सल इलाकों में पदस्थ पुलिस कर्मियों का तबादला नहीं होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि एक ही जगह में पुलिसकर्मी दस-दस साल से पदस्थ हैं। उनका मैदानी इलाकों में तबादला नहीं हो पा रहा है। इस वजह से मानसिक अवसाद से ग्रसित हो रहे हैं और आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। कांग्रेस सदस्य ने तबादले के नियमों की जानकारी चाही। इसके जवाब में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बताया कि एसओपी में साफ है कि उपनिरीक्षक के तबादले प्रथम नियुक्ति तीन वर्ष, अथवा 54 वर्ष में जो भी पहले हो की जा सकती है। इसी तरह निरीक्षक के तीन साल अथवा 54 वर्ष की आयु होने पर मैदानी इलाकों में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय से पदस्थ 694 पुलिस कर्मियों के तबादले के लिए आवेदन आए थे, इनमें से 305 पात्र पाए गए। इनका तबादला किया जाएगा।
चर्चा के दौरान कांग्रेस सदस्य श्रीमती सावित्री मंडावी ने पुलिस कर्मियों के आवास का मुद्दा भी उठाया। इसके जवाब में गृहमंत्री ने माना कि आवास की समस्या गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 66 हजार बल हैं, और 18 हजार ही आवास उपलब्ध है। इसमें और गति देने की जरूरत है। गृहमंत्री ने बताया कि पिछले पांच साल में दो हजार ही नए मकान बन पाए। एक पूरक प्रश्न के जवाब में गृहमंत्री ने बताया कि तबादले के लिए सीएम विष्णु देव साय के नेतृत्व में एक अच्छी कार्ययोजना बनाई जा रही है जिसमें तबादले के लिए ऑनलाईन आवेदन देना होगा। किसी भी नेता के घर जाने की जरूरत नहीं है, और पात्र होने पर घर में तबादला आदेश मिल जाएगा।
कांग्रेस सदस्य विक्रम मंडावी ने कहा कि बीजापुर इलाके में 20-22 साल से आरक्षक स्तर के पुलिसकर्मी पदस्थ हैं। उनका तबादला नहीं हो पा रहा है। इसके जवाब में गृहमंत्री ने बताया कि आरक्षक जिला कैडर का पद है, और न्यूनतम 10 साल उन्हें वहां रहना होगा। हालांकि उन्हें अतिरिक्त भत्ता भी मिलता है, इस वजह से कई पुलिसकर्मी वहां रहना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों के 305 पुलिसकर्मियों का जल्द ही तबादला किया जाएगा।

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