आय से अधिक संपत्ति मामले में रेखा नायर को हाईकोर्ट से झटका, अभियोजन स्वीकृति की फाइल खोलने की मांग खारिज, ट्रायल जारी, मुकेश गुप्ता की स्टेनो रहते फोन टैपिंग विवाद में भी आया था नाम –

आय से अधिक संपत्ति मामले में रेखा नायर को हाईकोर्ट से झटका, अभियोजन स्वीकृति की फाइल खोलने की मांग खारिज, ट्रायल जारी, मुकेश गुप्ता की स्टेनो रहते फोन टैपिंग विवाद में भी आया था नाम –
बिलासपुर, 14 अगस्त 2026 – आय से अधिक संपत्ति के मामले में पुलिस अधिकारी रेखा नायर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से झटका लगा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने उनकी याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसमें अभियोजन स्वीकृति की पूरी मूल फाइल, नोटशीट और विभागीय पत्राचार तलब करने तथा स्वीकृति देने वाले अधिकारी को अदालत में बुलाकर पूछताछ करने की मांग खारिज की गई थी।
मामला Crime No.08/2019 से जुड़ा है। अभियोजन के मुताबिक 1 मार्च 2011 से 20 फरवरी 2019 के बीच रेखा नायर के पास करीब 1.21 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति थी, जिसे उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में अनुपातहीन बताया गया। इसी आधार पर 27 फरवरी 2019 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
पहले लोक आयोग ने नहीं माना था आय से अधिक संपत्ति का मामला –
रेखा नायर के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति को लेकर 2017 में छत्तीसगढ़ लोक आयोग में भी जांच शुरू हुई थी। रिकॉर्ड के मुताबिक 9 जनवरी 2019 को लोक आयोग ने उपलब्ध आय-व्यय और संपत्तियों की जांच के बाद यह निष्कर्ष दर्ज किया कि उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति या कदाचार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके बाद दूसरी शिकायत के आधार पर एसीबी की जांच आगे बढ़ी और नया आपराधिक मामला दर्ज हुआ। खास बात यह रही कि अभियोजन स्वीकृति की फाइल भी कई बार आपत्तियों के साथ लौटी। 26 दिसंबर 2019, 3 जनवरी 2020 और 31 जनवरी 2020 को जांच की पूर्णता, आय-व्यय की गणना और एसीबी रिपोर्ट में कमियों को लेकर सवाल उठे। इसके बाद 6 मार्च 2020 को अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी गई।
रेखा नायर ने इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए पूरी मूल फाइल अदालत में बुलाने की मांग की थी, ताकि यह जांचा जा सके कि अंतिम स्वीकृति स्वतंत्र और पूर्ण विचार के बाद दी गई थी या नहीं।
हाईकोर्ट ने कहा अभी मिनी ट्रायल नहीं –
हाईकोर्ट ने दलील स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि अंतिम अभियोजन स्वीकृति रिकॉर्ड पर मौजूद है और उसमें सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच में जुटाए गए तथ्यों, साक्ष्यों और दस्तावेजों पर विचार किए जाने का उल्लेख है। पहले के प्रस्तावों का आपत्तियों के साथ लौटना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि अंतिम स्वीकृति बिना विचार के दी गई।स्वीकृति देने वाले अधिकारी को बुलाने की मांग भी खारिज हुई। अदालत ने पाया कि ऐसी मांग 22 अक्टूबर 2024 को ट्रायल कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका था और उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी।
मुकेश गुप्ता की स्टेनो रहते फोन टैपिंग विवाद में भी आया था नाम –
रेखा नायर का नाम इससे पहले तत्कालीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता की स्टेनो के रूप में भी सामने आया था। उसी दौर में उनका नाम फोन इंटरसेप्शन/टैपिंग विवाद से जुड़े मामले में आया। हाईकोर्ट के मौजूदा फैसले में भी उनके खिलाफ अवैध इंटरसेप्शन से जुड़े अलग मामले और उसमें उन्हें आरोपी बनाए जाने का उल्लेख है। उस मामले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2019 को रोक लगा दी थी।
पुराने आरोपों में कचना स्थित आवास से फोन टैपिंग और ड्यूटी पर नियमित रूप से उपस्थित नहीं होने के बावजूद वेतन मिलने जैसी बातें भी कही जाती रही हैं। हालांकि इन विशिष्ट आरोपों की पुष्टि मौजूदा हाईकोर्ट फैसले में नहीं होती, इसलिए इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
मामला अब ट्रायल में आगे बढ़ेगा –
हाईकोर्ट ने रेखा नायर को दोषी नहीं ठहराया है। अदालत ने सिर्फ उनकी मौजूदा याचिका खारिज की है। अभियोजन स्वीकृति की वैधता समेत अन्य कानूनी आपत्तियां उचित चरण पर उठाने की स्वतंत्रता बनी हुई है। यानी एक तरफ लोक आयोग की जांच में आय से अधिक संपत्ति का निष्कर्ष नहीं, दूसरी तरफ बाद की एसीबी जांच में 1.21 करोड़ रुपये की कथित अनुपातहीन संपत्ति, अभियोजन स्वीकृति से पहले उठीं आपत्तियां और पुराने फोन इंटरसेप्शन विवाद रेखा नायर से जुड़ी कहानी की कई परतें अब ट्रायल में सामने आनी बाकी हैं।
फिलहाल हाईकोर्ट का फैसला साफ है याचिका खारिज, मामला खत्म नहीं। रेखा नायर के खिलाफ आपराधिक ट्रायल आगे जारी रहेगा।










